بگ बैंग थ्योरी, क्या वाक़ई, अल्लाह तआला के वुजूद को रद्द करती है? शुरू अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम करने वाला है। दोस्तो, आज हम existence of Allah यानी अल्लाह तआला के वुजूद को, साइंसी नज़रियात और फ़िज़िक्स के उसूलों के मद में prove करेंगे। कायनात की इब्तिदा और उसके वुजूद के बारे में साइंसदां सदियों से बहस करते आए हैं। बग बैंग थ्योरी, जो कायनात के आग़ाज़ का एक मशहूर नज़रिया है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह कायनात की तख़्लीक़ की वज़ाहत करती है। लेकिन क्या यह थ्योरी वाक़ई अल्लाह के वुजूद को रद्द करती है? आइए, फ़िज़िक्स के क़वानीन की रोशनी में इस सवाल का जवाब तलाश करते हैं। बग बैंग थ्योरी के मुताबिक़, कायनात तक़रीबन 13.8 अरब साल पहले, एक इंतिहाई गर्म और घने नुक़्ते से फैली थी। लेकिन सवाल यह है कि यह "नुक़्ता" आया कहाँ से? और उसे हरकत देने वाली ताक़त क्या थी? फ़िज़िक्स के पहले क़ानून, "Law of conservation of Energy" के मुताबिक, ताक़त न तो पैदा की जा सकती है और न ही फ़ना की जा सकती है। यह सिर्फ़ एक शक्ल से दूसरी शक्ल में तब्दील हो सकती है। तो फिर, कायनात की ताक़त कहाँ से आई? यहाँ हमारी अक़्ल हमें एक ख़ालिक़ की तरफ़ ले जाती है। अल्लाह तआला, जो ला-महदूद ताक़त और इल्म का मालिक है, वही है जिसने कायनात को अदम से वुजूद बख़्शा। बग बैंग थ्योरी दरअस्ल अल्लाह की क़ुदरत की एक निशानी है, न कि उसके वुजूद के इंकार का सबब। क़ुरान पाक में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "क्या कुफ़्फ़ार इस बात पर तवज्जोह नहीं देते कि यह आसमान और ज़मीन बाहम मिले हुए थे फिर हमने उन्हें जुदा कर दिया है और तमाम जानदार चीज़ों को हमने पानी से बनाया है? तो क्या (फिर भी) वह ईमान नहीं लाएँगे?" यह आयत बग बैंग थ्योरी से हैरत अंगेज़ तौर पर मुताबिक़त रखती है। फ़िज़िक्स के दूसरे अहम क़ानून, "Second Law of Thermodynamics" के मुताबिक, कायनात में बे-तरतीबी यानी Entropy हमेशा बढ़ती है। यह क़ानून बताता है कि कायनात का एक आग़ाज़ था, और यह कि यह हमेशा से नहीं थी। अगर कायनात हमेशा से होती, तो उसकी ताक़त ख़त्म हो चुकी होती और बे-तरतीबी अपने उरूज पर होती। लेकिन हम देखते हैं कि कायनात मुनज़्ज़म है, और उसका एक आग़ाज़ था। जदीद साइंस ने यह भी साबित किया है कि कायनात मुसलसल फैल रही है। क़ुरान पाक में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और आसमान को हमने क़ुव्वत से बनाया और हम ही वुसअत देने वाले हैं।" यह आयत भी जदीद साइंस के साथ मुकम्मल हम आहंग है। Quantum Mechanics के मुताबिक, माद्दा और ताक़त एक दूसरे में तब्दील हो सकते हैं। यह नज़रिया बताता है कि कायनात की बुनियादी इकाइयाँ (जैसे एटम) इंतिहाई पेचीदा और मुनज़्ज़म हैं। लेकिन यह पेचीदगी और नज़म किसने तख़्लीक़ किया? क़ुरान पाक में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "जिसने हर उस चीज़ को जो उसने बनाई बेहतरीन बनाया।" यह आयत कायनात की पेचीदगी और नज़म की तरफ़ इशारा करती है, जो अल्लाह की हिकमत का सबूत है। न्यूटन का क़ानून Law of Gravitation बताता है कि कायनात में हर शय दूसरी शय को अपनी तरफ़ खींचती है। यही क़ुव्वत है जो सैयारों को उनके मदार में रखती है, सितारों को जगमगाती है, और कहकशाओं को मुनज़्ज़म करती है। लेकिन सवाल यह है कि यह क़ुव्वत कहाँ से आई? किसने उसे तख़्लीक़ किया? क़ुरान पाक में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "अल्लाह वह ज़ात है जिसने आसमानों को तुम्हें नज़र आने वाले सतूनों के बग़ैर बुलंद किया फिर उसने अर्श पर सल्तनत इस्तेवार की और सूरज और चाँद को मुसख़्ख़र किया, उनमें से हर एक मुक़र्ररा मुद्दत के लिए चल रहा है, वही उमूर की तदबीर करता है वही निशानियों को तफ़्सील से बयान करता है शायद तुम अपने रब की मुलाक़ात का यक़ीन करो।" कशिश-ए-सक़्ल की क़ुव्वत दरअस्ल अल्लाह की हिकमत और क़ुदरत की एक निशानी है। बग बैंग थ्योरी दरअस्ल अल्लाह की क़ुदरत और हिकमत की एक निशानी है। यह थ्योरी कायनात के आग़ाज़ की वज़ाहत करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि यह आग़ाज़ कैसे हुआ। फ़िज़िक्स के क़वानीन हमें बताते हैं कि कायनात को एक ख़ालिक़ की ज़रूरत है, और वह ख़ालिक़ अल्लाह तआला है। कायनात की हर शय अल्लाह के वुजूद की गवाही दे रही है। सितारे, सैयारे, गैलेक्सीज़, और फ़िज़िक्स के क़वानीन सब हमें एक ही बात की तरफ़ ले जाते हैं: "यक़ीनन आसमानों और ज़मीन की ख़ल्क़त में, रात और दिन के आने जाने में, उन कश्तियों में जो इनसानों के लिए मुफ़ीद चीज़ें ले कर समंदरों में चलती हैं और उस पानी में जिसे अल्लाह ने आसमानों से बरसाया, फिर उस पानी से ज़मीन को मुर्दा होने के बाद (दोबारा) ज़िंदगी बख़्शी और उसमें हर क़िस्म के जानदारों को फैलाया, और हवाओं की गर्दिश में और उन बादलों में जो आसमान और ज़मीन के दरमियान मुसख़्ख़र हैं, अक़्ल से काम लेने वालों के लिए निशानियाँ हैं।" अल्लाह तआला हमें अपनी निशानियों को समझने और उन पर ग़ौर करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
