युवा की बात कोई सुनता ही नहीं, हर बात पर टोका-टाकी करते हैं, खुद की मरज़ी का करते हैं, दूसरों की राय की कोई कीमत नहीं, हम कुछ नया करें तो तुरंत रोक देते हैं, हमारी मेहनत कोई नहीं देखता, बस अपनी चलाते हैं, युवाओं को मौका देना तो जैसे पाप हो गया, समाज बदलना चाहते हैं, पर पुराने सोच वाले समझते ही नहीं, जब तक चुप रहें तो कहते हैं आलसी हैं, जब बोलें तो कहते हैं बदतमीज़ हैं, हर काम में राजनीति घुसेड़ देते हैं, इज़्जत की बात करें तो मज़ाक उड़ाते हैं, हमारा जोश देखकर डर जाते हैं, इसलिए दबाना चाहते हैं, कहते हैं समाज हमारा है, पर फैसले हमेशा वही लेते हैं, युवा अगर सवाल पूछे तो बागी कह देते हैं, बदलाव से डरते हैं, इसलिए युवाओं को पीछे रखते हैं, हमारे अंदर आग है, लेकिन उसे बुझाने पर तुले हैं!
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4 месяца назад
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