मेने अपनी ज़िंदगी सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि गरीब और आम बच्चों के सपनों के लिए समर्पित कर दी। ये कहानी है – Khan Sir, पटना वाले। --- दोस्तों, Khan Sir का जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले में एक साधारण परिवार में हुआ। घर में पैसे की तंगी थी, हालात अच्छे नहीं थे। लेकिन बचपन से ही पढ़ाई के लिए जुनून था। कई बार स्कूल की फीस भरने तक के पैसे नहीं होते थे, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि – “पढ़ाई ही वो हथियार है जिससे ज़िंदगी बदली जा सकती है।” --- जब उन्होंने अपनी पढ़ाई शुरू की, तो खर्च निकालने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। सोचिए दोस्तों, एक क्लास के बदले उन्हें सिर्फ़ ₹40 मिलते थे। लेकिन Khan Sir ने पैसों को कभी महत्व नहीं दिया। उनके लिए असली खुशी थी – बच्चों की आँखों में समझ की चमक देखना। --- पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने पटना में Khan GS Research Centre की नींव रखी। वो पढ़ाते भी ऐसे थे कि बच्चे सिर्फ़ पढ़ने नहीं, बल्कि हंसने और सीखने दोनों आते थे। उनका मानना था – “Education कोई बिज़नेस नहीं है… ये तो सेवा है, ये तो मिशन है।” --- लेकिन दोस्तों, उनका सफ़र यहीं नहीं रुका। जब उन्हें महसूस हुआ कि क्लासरूम में सीमित बच्चे ही आ सकते हैं, तब उन्होंने YouTube का सहारा लिया। और देखते ही देखते उनका चैनल करोड़ों बच्चों की आशा बन गया। आज लाखों-करोड़ों छात्र Khan Sir की फ्री क्लासेस से पढ़ाई कर रहे हैं। --- दोस्तों, ये वही Khan Sir हैं – जिन्होंने कभी ₹40 में क्लास ली थी, और आज… वो मिलियन्स ऑफ स्टूडेंट्स को फ्री पढ़ाते हैं। यही वजह है कि लोग उन्हें कहते हैं – “गरीबों का मसीहा”। --- और अब दोस्तों, Khan Sir ने शिक्षा के साथ-साथ गरीबों के इलाज की ज़िम्मेदारी भी उठा ली है। जी हाँ, उन्होंने अस्पताल खोलने की पहल शुरू की है। ताकि जिस तरह कोई बच्चा पैसों की कमी से पढ़ाई न छोड़ दे, उसी तरह कोई इंसान पैसों की वजह से इलाज से वंचित न रह जाए। उनकी सोच है – “अगर शिक्षा हक़ है… तो इलाज भी इंसान का हक़ है।” --- दोस्तों, Khan Sir की कहानी हमें यही सिखाती है कि – अगर आपके इरादे मज़बूत हों, तो हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, सपने ज़रूर पूरे होते हैं। वो कहते हैं – “अगर आपको दुनिया बदलनी है, तो पहले अपनी सोच बदलनी होगी।”
