Hariom

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@Mahadev Shiv
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कहते हैं कि जीवन में सबसे बड़ी शक्ति “विश्वास” है – खुद पर विश्वास और अपने सपनों पर विश्वास। यह कहानी एक छोटे से गाँव के लड़के अर्जुन की है, जिसने हालात से लड़कर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। अर्जुन का जन्म बिहार के एक छोटे से गाँव में हुआ। उसके पिता किसान थे और माँ घर संभालती थीं। परिवार बहुत ही साधारण था, इतना कि कभी-कभी खाने तक की समस्या खड़ी हो जाती थी। लेकिन इन कठिनाइयों के बावजूद अर्जुन के माता-पिता का सपना था कि उनका बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने। अर्जुन भी पढ़ाई में बहुत होशियार था। गाँव के स्कूल में पढ़ते हुए वह हमेशा प्रथम आता। शिक्षक भी कहते – “यह लड़का अगर सही दिशा में मेहनत करे तो बड़ा नाम करेगा।” परंतु समस्याएँ यहीं से शुरू हुईं। दसवीं कक्षा के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि पिता ने कहा – “बेटा, अब आगे पढ़ाई शायद मुश्किल होगी। खेतों में मेरी मदद कर ले।” अर्जुन का दिल टूट गया, क्योंकि वह इंजीनियर बनना चाहता था। उसने अपने पिता से हाथ जोड़कर कहा – “पिता जी, मुझे बस एक मौका दीजिए। मैं मेहनत करके दिखाऊँगा।”

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