अर्जुन का प्रश्न तुम्हारा प्रश्न है। वह युद्धभूमि में खड़ा है, तुम जीवन की युद्धभूमि में खड़े हो। वह भ्रमित है, तुम भी भ्रमित हो। वह पूछता है—'क्या करूँ?' और यही प्रश्न हर संवेदनशील मनुष्य के हृदय में उठता है।