एक बार की बात है, महान राजा विक्रमादित्य शिकार के लिए जंगल में गए थे।घना जंगल, शांत माहौल... तभी उनकी नजर एक अजीब सी गुफा पर पड़ी। गुफा काली, गहरी और रहस्यमयी थी – जैसे उसमें कोई राज छिपा हो।राजा निडर थे। तलवार हाथ में ली और गुफा में दाखिल हो गए। भीतर अंधेरा था, लेकिन किसी की मदद की पुकार सुनाई दी।राजा आगे बढ़े... और सामने दिखा एक भूत जैसा प्राणी, जो कह रहा था –"मैं बेताल हूँ, मुझे इस श्राप से मुक्ति चाहिए। पर पहले तुम्हें मेरी पहेली सुलझानी होगी।" राजा ने सहमति दी।बेताल ने एक-एक कर गूढ़ प्रश्न पूछे।विक्रमादित्य ने हर बार बुद्धिमानी से उत्तर दिया। अंत में बेताल बोला –"तुम्हारा साहस और ज्ञान अतुलनीय है। तुम ही सच्चे राजा हो।" बेताल मुक्त हो गया और आशीर्वाद देकर गायब हो गया। गुफा से बाहर आते ही विक्रमादित्य के चेहरे पर तेज था –साहस और बुद्धि की जीत।