एक बरसात भरी रात थी… हॉस्पिटल के इमरजेंसी गेट पर अचानक एक आदमी अपनी छोटी सी बेटी को गोद में लेकर भागता हुआ आया। उसकी आंखों में डर था… आवाज कांप रही थी… “डॉक्टर साहब… मेरी बेटी को बचा लीजिए… तीन दिन से बुखार उतर ही नहीं रहा…” डॉक्टर ने बिना समय गंवाए बच्ची को अंदर ले लिया। जांच शुरू हुई… मशीनों की आवाज… भागदौड़… और बाहर खड़ा बाप हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना कर रहा था। कुछ देर बाद वो डॉक्टर के पास गया और रोते हुए बोला — “डॉक्टर साहब… मेरे पास ज्यादा पैसे नहीं हैं… लेकिन मेरी बेटी को बचा लीजिए…” डॉक्टर ने उसके कंधे पर हाथ रखा और मुस्कुराकर कहा — “हर इलाज पैसों से नहीं होता… कुछ इलाज इंसानियत से भी होते हैं…” इलाज चलता रहा… रात बीत गई… सुबह जैसे ही सूरज निकला… बच्ची ने धीरे से आंखें खोली और कहा — “पापा…” वो एक शब्द सुनते ही बाप की दुनिया वापस आ गई… वो रोते हुए डॉक्टर के पैरों में गिर पड़ा — “डॉक्टर साहब… आपने मेरी दुनिया बचा ली…” डॉक्टर ने उसे उठाया और कहा — “मैं भगवान नहीं हूँ… लेकिन कोशिश करता हूँ… कि किसी का भगवान मुझसे नाराज़ ना हो जाए…”
