SHARWAN

SHARWAN

@Sandeep Kumar
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(Verse 1) तेरी हँसी की वो गूंज अभी तक आती है, खामोश कमरों में यादें जगाती है। दरवाज़े पर जैसे आहट सी होती है, पर खोलूं तो बस तन्हाई नज़र आती है। कितना आसान था तेरा यूँ मुड़ जाना, मुश्किल है मेरा तुझे भूल पाना। हर मोड़ पे ढूंढा, हर राह में देखा, तू ही नहीं था, था बस वीराना। (Pre-Chorus) कहते हैं वक्त हर ज़ख्म भर देता है, फिर क्यों ये दिल तेरा नाम लेता है। (Chorus) तू दूर गया तो दुनिया भी रूठ गई, हाथों की लकीरें जैसे टूट गईं। मैं चल तो रहा हूँ पर जिंदा नहीं, सांसें हैं मगर धड़कन छूट गई। (Verse 2) तेरी बातें अब भी रातों को जगाती हैं, आँखों से चुपके चुपके बरसातें लाती हैं। तस्वीर को तेरी सीने से लगाकर, हम अपनी किस्मत को ही आज़माते हैं। सोचा था मिलकर घर सा बनेगा, सपनों का कोई शहर सा बनेगा, एक पल में सब रेत हुआ, जो मेरा था वो गैर सा बनेगा। (Bridge) अगर कभी तुझे मेरी याद आए, तो चाँद से मेरी खबर ले जाना, मैं आज भी वहीं ठहरा हूँ, जहाँ छोड़ के तुम गए थे जाना। (Chorus – Slow) तू दूर गया तो दुनिया भी रूठ गई, मेरी हर खुशी मुझसे छूट गई। मैं जी तो रहा हूँ तेरे बिना, पर जीने की वजह कहीं खो गई।

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