Shubhankar mishra znews

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@Sunny Kumar
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"धोनी की वो रात – जब 28 साल का इंतज़ार एक हेलिकॉप्टर शॉट में समा गया!" कभी-कभी… एक मैच सिर्फ 22 गज़ की पिच पर नहीं खेला जाता, वो खेला जाता है पूरे देश के दिल में! वो रात भी कुछ ऐसी ही थी — 2 अप्रैल 2011, मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम। बाहर अरब सागर शांत था, पर अंदर 33 हज़ार दिल तूफ़ान की तरह धड़क रहे थे। --- श्रीलंका ने 274 रन बनाए थे… और जब पहली ही गेंद पर वीरेंद्र सहवाग आउट हुए, पूरा स्टेडियम खामोश हो गया। दूसरे ओवर में — सचिन तेंदुलकर, हमारा भारत रत्न, वो भी पवेलियन लौट गए। लोगों ने सिर पकड़ लिया… कहीं फिर वही 1983 के बाद वाला इंतज़ार तो नहीं? पर… किस्मत को कुछ और मंज़ूर था! --- विराट कोहली ने मोर्चा संभाला, गौतम गंभीर ने उम्मीद जगाई… और फिर ड्रेसिंग रूम में एक शख्स — शांत, स्थिर, पर भीतर से आग की तरह जलता हुआ — धीरे से उठता है, ग्लव्स पहनता है, और मैदान की ओर बढ़ता है। नाम — महेंद्र सिंह धोनी। कप्तान। और उस रात वो सिर्फ कप्तान नहीं था… वो था किस्मत का लेखक! --- वो खुद को प्रमोट करता है — नंबर 7 से उठकर नंबर 5 पर आता है। क्यों? क्योंकि उसे पता था — "अंतिम वार मुझे ही करना होगा।" वो मैदान पर उतरा, भीड़ चिल्ला रही थी, पर धोनी के चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान… वो मुस्कान जो तब आती है, जब किसी को पता होता है — आज इतिहास लिखा जाएगा! --- पहला शॉट… हेलिकॉप्टर! गेंद सीधी बाउंड्री की ओर उड़ती है। हर बॉल के साथ पूरा भारत अपनी सांसें रोक लेता है। 275 का लक्ष्य धीरे-धीरे पास आता गया, पर दबाव… हर सेकंड बढ़ता गया। धोनी बोलता नहीं था, बस देखता था, सोचता था… और खेलता था। उसी वक्त गंभीर ने कहा था — > “पूरे मैच में धोनी एक बार भी घबराया नहीं। बस एक लाइन बोला — ‘मैं ख़त्म करूँगा।’” --- 48वाँ ओवर… मालिंगा गेंदबाज़ी कर रहा था। धोनी स्ट्राइक पर था। गेंद आई, और धोनी ने पूरी ताकत के साथ घुमाया बल्ला — हेलिकॉप्टर शॉट! गेंद हवा में गई… आँखें ऊपर उठीं… और उस गेंद के साथ उड़ गया — 28 साल का इंतज़ार! --- रवि शास्त्री की आवाज़ गूँजी — > “Dhoni finishes off in style! India lift the World Cup after 28 years!” भीड़ फट पड़ी… लोग झूम उठे, आँखों में आँसू, दिलों में गर्व। सचिन तेंदुलकर को कंधों पर उठाया गया, और धोनी… बस मुस्कुरा रहा था! क्योंकि लीजेंड्स चिल्लाते नहीं, वो बस इतिहास बन जाते हैं। --- उस रात धोनी ने सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं जीती… उसने हर उस भारतीय का सपना पूरा किया, जो 1983 से हर बार “अगली बार” बोलता आया था। वो सिक्स सिर्फ एक शॉट नहीं था, वो था 125 करोड़ दिलों की पुकार का जवाब! एक जवाब — कि हम भारतीय हैं, और हम हारने नहीं आए। --- (धीमी देशभक्ति धुन) वो रात गुजर गई… पर जब भी कोई हेलिकॉप्टर शॉट देखता है, दिल से एक ही आवाज़ निकलती है — > “धोनी… धोनी… धोनी…” क्योंकि कहानी वहीं पूरी होती है — जहाँ तिरंगा लहराता है, और भारत जीत जाता है। 🇮🇳 ---

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