"क्या हो अगर... जो कुछ भी तुम देख रहे हो... वो सब एक भ्रम हो?" "क्या हो अगर ये संसार... सिर्फ माया हो?" "माया — यानी वो जो दिखे... लेकिन हो नहीं।" "एक सपना — जो खुली आँखों से देखा जा रहा है।" "वेदों ने कहा — 'ब्रह्म सत्य है, जगत माया है।'" "यह दुनिया बदलती है — और जो बदले, वो स्थायी कैसे हो सकता है?" "सत्य वही है... जो सदा है, जो अडिग है।" "माया कोई दुश्मन नहीं — वो एक पर्दा है।" "एक इम्तिहान — जिसे पार कर के ही हम आत्मज्ञान की ओर बढ़ते हैं।" "तो सोचो — क्या तुम माया में खोए हो?" "या उस सत्य की तलाश में हो जो हर भ्रम के पार है?"
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7ヶ月前
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