कुछ जख्म सदियों बाद भी ताज़ा ही रहते हैं, कुछ लोग बिछड़कर भी यादों में साथ रहते हैं। हमने तो चाहा था उन्हें अपनी जान से भी बढ़कर, मगर नसीब देखिए, हम आज भी उनके बिना तन्हा रहते हैं।"