Faheem Ahmad

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@Faheem Ahmed
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रात की स्याही में एक छोटा सा गांव चांद की हलकी रोशनी में नहा रहा था। यह गांव सदियों पुरानी इस्लामी रिवायतों का अमीन था। जहां हर फर्द अपनी इज्जत और ईमान का मुहाफिज था। गांव के किनारे एक पुरानी हवेली में रहती थी ज़ैनब। जिसे सब चांद की किरण कहते थे। ज़ैनब की खूबसूरती की शोहरत दूर-दूर तक फैल चुकी थी। मगर उसकी हया और पर्दा उसकी सबसे बड़ी ज़ीनत थी। वह हमेशा अपनी मां की खिदमत में मशगूल रहती। घर के कामकाज में कोई कोताही ना करती। उसके वालिद शेख हम्माद गांव के मुअज्जस तरीन अफराद में शुमार होते थे। जिनकी दयानतदारी सब पर अया थी। गांव में हर शख्स ज़ैनब की तारीफ करता। मगर कोई भी उसकी इज्जत पर हरफ ना आने देता। उसके हुस्नो जमाल को देखकर कई रईसों ने रिश्ते भेजे। मगर उसके वालिद ने हमेशा किरदार को हुस्न पर तरजीह दी। ज़ैनब खुद भी दुआ करती कि अल्लाह उसे ऐसा शरीके हयात अता करे जो दीनदार और नेक हो। एक दिन काफिलों के गुजरने वाले रास्ते पर एक मुसाफिर आया जिसके चेहरे पर वक्त की थकन नुमाया थी। उसने मस्जिद में जाकर नमाज अदा की और इमाम साहब से गांव के बारे में सवाल करने लगा। यह शख्स निहायत बाकार और मुहजब था। मगर उसके माजी का कोई इल्म ना था। गांव के लोग इस अजनबी को देखकर हैरान हुए क्योंकि वह किसी रईस की तरह लगता था मगर लिबास सादा था। उसने चंद दिन गांव में कयाम किया और जल्द ही अपनी नेकी, ईमानदारी और इल्म की वजह से मकबूल हो गया। इस अजनबी ने शेखा हम्माद से मुलाकात की और उनकी दानिशमंदी से बेहद मुतासिर हुआ। शेखा हम्माद को भी यह नौजवान नेक और दीनदार लगा। जिसका अंदाज गुफ्तगू इंतहाई शाहिस्ता था। इस नौजवान ने बताया कि वह एक ताजिर का बेटा है और जिंदगी का मकसद सच्चाई और इंसाफ को फैलाना है। गांव के लोग उसके इल्म और अखलाकन से बहुत मुतासिर हुए और उसे इज्जत देने लगे। ज़ैनब ने कभी भी इस अजनबी को देखा ना था क्योंकि वह हमेशा पर्दे में रहती थी। लेकिन उसके वालिद ने महसूस किया कि यह नौजवान ज़ैनब के लिए एक बेहतरीन रिश्ता हो सकता है। उन्होंने अपनी बेटी की तकदीर का फैसला अल्लाह पर छोड़ दिया और इस्तखारा करने का इरादा किया। रात के वक्त शेख हमद ने इस्तखारा किया और सुबह के वक्त एक रोशनी सी देखी। उसे महसूस हुआ कि अल्लाह ने इस नौजवान को उनकी बेटी के लिए चुना है। उन्होंने अपनी बीवी से मशवरा किया जो पहले तो हिचकिचाई मगर फिर अल्लाह पर भरोसा कर लिया। जब अजनबी को इस बात की खबर मिली कि शेखा हम्माद उससे बात करना चाहते हैं तो वह हैरान हुआ। शेखा हमद ने कहा कि वह उसके किरदार, इल्म और दयानतदारी को देखकर उसके लिए एक तजवीज रखते हैं। यह सुनकर नौजवान खामोश हो गया जैसे कोई पुरानी याद उसके ज़हन में आ गई हो। थोड़ी देर बाद इस नौजवान ने कहा कि वह कुछ दिन सोचना चाहेगा क्योंकि यह फैसला बहुत अहम है। उस रात वह मस्जिद में दुआ के लिए बैठा और अल्लाह से रहनुमाई मांगी। अगले दिन उसने शेख हम्माद से मुलाकात की और एक हैरानक इंकशाफ किया जिसने सब कुछ चौंका दिया। नौजवान ने शेख हम्माद की तरफ देखा और आहिस्ता से कहा मैं वह नहीं जो मैं दिखाई देता हूं। यह सुनकर शेख हम्माद चौंक गए। मगर उनके चेहरे पर सुकून तारी रहा। जैसे वह मजीद सुनने के लिए तैयार हो। नौजवान ने कहा कि वह एक भागा हुआ मुसाफिर नहीं बल्कि एक खोया हुआ वारिस है। गांव के बुजुर्ग और मुअज अफराद भी इस गुफ्तगू के गवाह बने जो मस्जिद के सहन में हो रही थी। नौजवान ने बताया कि वह एक रईस सजादे का बेटा है। मगर उसका खानदान धोखे और साजिश का शिकार हो गया था। उसके वालिद को दुश्मनों ने कत्ल कर दिया और वह अपनी जान बचाने के लिए सफर पर निकल गया था। यह इंकशाफ सुनते ही सब हैरान रह गए क्योंकि यह कहानी किसी ने पहले नहीं सुनी थी। नौजवान ने कहा कि उसकी दौलत और खानदानी विरासत वापस हासिल करने का कोई इरादा नहीं। बस सुकून चाहता है। शेख हम्माद ने गहरी नजर से उसकी आंखों में झांका और कहा, सुकून सिर्फ सच्चाई और इंसाफ में है। ज़ैनब के भाई हसन ने इस नौजवान की सच्चाई जानने के लिए मज़द सवालात किए। नौजवान ने बड़े तहम्मुल से हर सवाल का जवाब दिया और उसकी बातों में कोई झूठ ना था। यही वह लम्हा था जब शेख हम्माद को यकीन हो गया कि अल्लाह ने उनके लिए सही इंतखाब किया है। शेख हम्माद ने अपनी बेटी ज़ैनब से बात करने का फैसला किया ताकि उसकी मर्जी मालूम की जा सके। वह अपनी बेटी के पास गए और नरमी से पूछा बेटी अगर एक दीनदार नेक और सादिक शख्स तुम्हारा हाथ मांगे तो तुम्हारी क्या राय होगी? ज़ैनब ने नजरें झुका कर कहा अब्बा अगर वह अल्लाह से डरने वाला है तो मैं भी राजी हूं। यह सुनकर शेख ग्माद को इत्मीनान हुआ और उन्होंने इस निकाह की तैयारी शुरू कर दी। गांव वालों को जब इस बात का इल्म हुआ तो सब खुश हो गए क्योंकि यह रिश्ता किरदार और ईमान पर मबनी था। निकाह की तारीख तय कर दी गई और पूरा गांव ज़ैनब की किस्मत के इस खूबसूरत फैसले पर खुशी मना रहा था। मगर तकदीर के खेल निराले होते हैं। क्योंकि निकाह से एक दिन पहले एक अनजान काफिला गांव में दाखिल हुआ। इस काफिले में कुछ ऐसे लोग थे जो इस नौजवान को पहचानते थे और हैरानी से उसे देखने लगे। उनमें से एक शख्स बोला यह तो वही वारिस है जिसे सब मरा हुआ समझ बैठे थे। यह खबर जंगल की आग की तरह गांव में फैल गई और हर शख्स हैरान था कि अब क्या होगा। नौजवान के चेहरे पर संजीदगी छा गई क्योंकि वह जानता था कि उसका मांझी उसके पीछे आया है। काफिले के लोग उसके कदमों में गिर कर रोने लगे। हमें माफ कर दो। हमें नहीं मालूम था कि तुम जिंदा हो। यह वह लम्हा था जब इस नौजवान की असल शनाख्त सब पर वाजे हो गई और उसके असल खानदान का पता चल गया। ज़ैनब की मां ने अपने शौहर से सवाल किया। क्या अब यह निकाह मुमकिन रहेगा? क्या हमारी बेटी इस तकदीर का सामना कर सकेगी? शेख हम्माद ने गहरी सोच में डूब कर कहा, "यह फैसला अब तकदीर के हाथ में है और अल्लाह बेहतरीन फैसला करने वाला है। निकाह से चंद घंटे पहले नौजवान ने सबको इकट्ठा किया और एक अहम ऐलान किया। उसने कहा मेरे लिए दौलत और खानदानी विरासत से ज्यादा जरूरी मेरा ईमान और मेरी सच्चाई है। फिर उसने सबके सामने एक हैरानकून फैसला सुनाया जिसने पूरे गांव को खामोश कर दिया। नौजवान ने कहा मैं अपने मांझी को पीछे छोड़कर एक सादा जिंदगी गुजारना चाहता हूं। उसने काफिले के अफराद को मुखातिब करके कहा अगर मेरा खानदान वाकई मुझसे मोहब्बत करता है। तो वह मेरी खुशी को कबूल करेंगे। यह सुनकर काफिले में मौजूद एक बुजुर्ग आगे बढ़े और बोले, बेटा तुम्हारा इम्तिहान अभी खत्म नहीं हुआ। बुजुर्ग ने कहा, तुम्हारे वालिद के कातिल अभी भी ताकतवर हैं। अगर तुम वापस ना गए, तो वह तुम्हारी मां और बहन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह सुनकर नौजवान के चेहरे पर गहरी सोच छा गई। जैसे वह किसी बड़े इम्तिहान में पड़ गया हो। गांव के लोग खामोशी से यह सब देख रहे थे कि अब क्या फैसला होगा। ज़ैनब के वालिद शेख हम्माद ने कहा, बेटा अल्लाह ने तुम्हें एक आजमाइश में डाला है। मगर याद रखो इंसाफ करना भी फर्ज है। यह सुनकर नौजवान की आंखों में अज्म की रोशनी पैदा हुई और उसने गहरी सांस ली। अगर यह मेरी तकदीर है तो मैं इसे कबूल करता हूं। मगर मैं वादा करता हूं कि किसी भी हालत में ज़ैनब को तन्हा नहीं छोडूंगा। यह सुनकर गांव वालों के दिल मुतमिन हो गए। मगर ज़ैनब की मां अब भी फिक्रमंद थी। अगर यह लड़का चला गया तो क्या हमारी बेटी की कस्मत फिर अधूरी रह जाएगी? उसने दिल में सोचा। ज़ैनब खामोशी से सुन रही थी। मगर उसकी आंखों में खौफ और दुआ का इमतेजाज था। नौजवान ने कहा, मैं अपने दुश्मनों से लड़ने के लिए तैयार हूं। मगर पहले मैं अपने रब के हुजूर निकाह के बंधन में बंधना चाहता हूं। यह सुनते ही शेख हम्माद ने निकाह की तैयारियों को जल्द मुकम्मल करने का हुक्म दिया। पूरे गांव में चरागाह कर दिया गया। क्योंकि सब जानते थे कि यह निकाह सिर्फ दो अफराद का नहीं बल्कि एक तकदीर का फैसला था। निकाह की रस्म मस्जिद में सादगी के साथ अदा की गई और गवाहान ने इस मुकद्दस बंधन पर अल्लाह का नाम लिया। ज़ैनब की आंखों में आंसू थे। मगर वह खुशी और दुआ के आंसू थे। नौजवान ने निकाह के बाद कहा। अब मैं किसी भी आजमाइश का सामना करने के लिए तैयार हूं। अगली सुबह नौजवान ने काफिले के साथ जाने का फैसला किया। ताकि अपने वालिद के कातिलों से इंसाफ ले सके। शेख हम्माद ने कहा बेटा हम तुम्हारे साथ हैं। गांव के चंद लोग भी तुम्हारी हिफाजत के लिए जाएंगे। ज़ैनब ने पहली बार अपने शौहर के लिए एक दुआ की। अल्लाह तुम्हें सलामत रखे और तुम्हें इज्जत के साथ वापस लाए। नौजवान, काफिले के अफराद और गांव के चंद बहादुर मर्दों ने सफर का आगाज किया। यह सफर आसान ना था क्योंकि दुश्मन ताकतवर थे और उनकी चालाकी किसी से कम ना थी। रास्ते में एक मुसाफिर मिला जिसने कहा अगर तुम्हें कामयाब होना है तो ताकत से ज्यादा अकल का इस्तेमाल करो। मुसाफिर ने उन्हें एक पुराने का रास्ता बताया जहां दुश्मनों का ठिकाना था। नौजवान ने सोचा कि यह मौका है कि बगैर जंग के दुश्मनों को जहर किया जाए। रात के वक़ वह कैले के करीब पहुंचे और अल्लाह का नाम लेकर तदबीर इख्तियार की। नौजवान और उसके साथियों ने कैले में छुपकर दुश्मनों की बातें सुनी। उन्हें मालूम हुआ कि दुश्मनों में आपस में ही इख्तलाफात हैं और यह उनके हक में बेहतरीन मौका। दुश्मनों में इख्तलाफात शिद्दत इख्तियार कर गए और वह एक दूसरे के खिलाफ तलवारें सौंपने लगे। इसी दौरान नौजवान और उसके साथियों ने कैले पर कब्जा कर लिया और उनके सरदार को गिरफ्तार कर लिया। नौजवान ने दुश्मन के सरदार से कहा जो जुल्म तुमने मेरे वालिद पर किया उसका बदला तुम्हें इंसाफ की सूरत में मिलेगा। दुश्मन का सरदार कांपने लगा और बोला मुझे माफ कर दो। मैंने लालच में आकर यह सब किया था। नौजवान ने कहा तुम्हारा फैसला अल्लाह के कानून के मुताबिक होगा। मैं जाती इंतकाम नहीं लूंगा। यह सुनकर दुश्मन के साथियों ने भी हथियार डाल दिए क्योंकि उन्हें अंदाजा हो गया था कि अब उनका वक़ खत्म हो चुका है। नौजवान ने अपने वालिद की सल्तनत वापस हासिल कर ली। मगर वह जानता था कि असल कामयाबी इंसाफ है। उसने कगी के तमाम कैदियों को आजाद कर दिया और कहा जो भी जुल्म का हिस्सा बना अल्लाह उसे बेहतर रास्ता दिखाए। फिर उसने अपने सरदारों को बुलाया और कहा हम यहां अदल और रहम की हुकूमत कायम करेंगे। उसके फैसले से आवाम खुश हो गई क्योंकि अब उन पर एक रहम दिल हाकिम था। उसकी वालिदा और बहन जो बरसों से बिछड़ गई थी। खुशी के आंसुओं के साथ उससे आकर मिली। यह लम्हा देखकर नौजवान की आंखों में भी आंसू आ गए और उसने अल्लाह का शुक्र अदा किया। नौजवान के दिल में अब एक ही ख्वाहिश थी। अपनी बीवी ज़ैनब को इज्जत और मोहब्बत के साथ अपने महल में ले जाना। उसने फौरन एक कासिद गांव भेजा ताकि शेखा हम्माद और ज़ैनब को खुशखबरी दे सके। जैनब को जब यह खबर मिली तो उसने सजदा ए शुक्र अदा किया और कहा अल्लाह ने हमारी तकदीर को बेहतरीन तरीके से मुकम्मल कर दिया। चंद दिनों बाद ज़ैनब अपने वालिदैन के साथ नए शहर की तरफ रवाना हुई। रास्ते में गांव के कई अफराद भी उनके साथ शामिल हुए क्योंकि सब जानना चाहते थे कि उनका दामाद कैसा हाकिम बना। जब वह शहर पहुंचे तो हर तरफ जश्न मनाया जा रहा था और लोग खुशी से नारे लगा रहे थे। नौजवान ने अपनी बीवी का इस्तकबाल निहायत इज्जत और मोहब्बत के साथ किया। उसने कहा यह तख्त यह दौलत सब कुछ बेईमानी है। अगर इसमें मोहब्बत और दयानत ना हो। जैनब ने जवाब में कहा और औरत की सबसे बड़ी दौलत उसका शौहर की इज्जत और उसका ईमान होता है। नौजवान ने ऐलान किया कि वह एक रहम दिल हाकिम बनेगा जो हमेशा हक और सच्चाई का साथ देगा। उसने जुल्म का शिकार होने वाले तमाम लोगों को इंसाफ फराहम किया और यतीमों के लिए एक बड़ा मदरसा कायम किया। यह देखकर आवाम ने उसे सच्चे हाकिम का लकब दिया और उसकी नेक दिली की मिसालें देने लगे। जैनब और नौजवान ने अपनी जिंदगी मोहब्बत, दयानत और इस्लामी तालीमात के मुताबिक गुजारी। उनकी कहानी एक ऐसी तकदीर की थी जो सब्र, हया और इंसाफ के जरिए मुकम्मल हुई। यही वजह थी कि उनकी नस्लें भी सदियों तक इस कहानी को एक सबक के तौर पर सुनाती रही। यह कस्सा हमें सिखाता है कि हुस्न, दौलत और ताकत से ज्यादा अहम चीज ईमान, इंसाफ और नेकी है। अल्लाह हमेशा उन लोगों के लिए बेहतरीन रास्ते बनाता है जो उस पर भरोसा रखते हैं। और यूं ज़ैनब और उसके शौहर की कहानी एक लाजवाल सबक बनकर रह गई।

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