लालच… इंसान को अक्सर ऐसी जगहों पर ले जाता है, जहाँ से वापस आना मुश्किल हो जाता है। सपना… शहर की एक मशहूर मेकअप आर्टिस्ट। रात के लगभग दस बज चुके थे। वो पैक-अप कर ही रही थी कि तभी उसका फोन बजा। दूसरी तरफ से एक महिला ने घबराई हुई आवाज़ में कहा— “मेरी बेटी की शादी है… मेकअप आर्टिस्ट तुरंत चाहिए। आप पुरानी हवेली आ जाइए। पैसे… जितने माँगोगी मिल जाएंगे।” पचास हज़ार का नाम सुनते ही सपना रुक गई। दिल ने कहा—“जाना नहीं चाहिए…” लेकिन जेब ने कहा—“एक रात का काम है… कर लो।” और सपना चल पड़ी। हवेली शहर से बहुत दूर थी। बाहर से ही अजीब लग रही थी—दीवारें काली पड़ी हुईं… जैसे कभी भयानक आग लगी हो। अंदर पहुंचते ही उसे एक कमरे में ले जाया गया। कमरे में दुल्हन बैठी थी—लाल जोड़ा, भारी गहने… बिलकुल परफेक्ट। लेकिन माहौल में एक बात बहुत गलत थी। कमरा… असहनीय रूप से ठंडा था। सपना ने फाउंडेशन लगाने के लिए दुल्हन के गाल को छुआ… और उसका हाथ अचानक सुन्न पड़ गया। वो त्वचा… इंसानी नहीं थी। पत्थर जैसी सख्त… और बर्फ जैसी ठंडी। सपना डर गई। उसने गौर किया—पिछले आधे घंटे से दुल्हन ने एक बार भी पलक नहीं झपकाई थी। किसी तरह उसने मेकअप खत्म किया और फाइनल लुक दिखाने के लिए शीशा उठाया। और शीशे में जो दिखा… उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। शीशे में सपना दिख रही थी… कुर्सी भी दिख रही थी… लेकिन दुल्हन गायब थी! कुर्सी… खाली थी। सपना समझ गई— वो किसी ज़िंदा इंसान का मेकअप नहीं कर रही थी… वो एक मुर्दे को सजा रही थी। वो पीछे हटकर भागने लगी, लेकिन उसी पल… दुल्हन ने उसका हाथ पकड़ लिया। उसकी पकड़… लोहे जैसी कड़ी। दुल्हन ने अपनी काली, जली हुई आँखों से घूरते हुए कहा— “इतनी जल्दी क्या है? दूल्हा अभी आया ही नहीं… आज मेरा श्रृंगार पूरा होगा… तुम जाओगी नहीं।” सपना ने पूरी जान लगाकर हाथ छुड़ाया और हवेली से बाहर भागी। पीछे से… दुल्हन की हंसी अभी भी गूंज रही थी— लंबी… डरावनी… ठंडी। अगली सुबह जब सपना उठी, तो उसके हाथ पर जले हुए पंजों के निशान साफ़ दिख रहे थे। और बाद में… पता चला— वो हवेली पचास साल पहले ही आग में जल चुकी थी। और जिस दुल्हन का सपना मेकअप कर रही थी… वो अपनी शादी की ही रात… उसी आग में मरी थी।
