चंपा भाभी जैसे ही आती उनके तरबूज दिख जाते तभी देवर मोहन मचल जाते मस्त तरबूजों को देख कर वो शरमा जाता चंपा भाभी भी समझ जाती मोहन एक दम गर्म हो जाता भाभी कपड़े सूखा रही उनका मस्त फिगर देकर देवर मोहन तड़प रहा चंपा भाभी थी ही एकदम बवाल लेकिन मोहन क्या ही बोले भाभी भी प्यासी है अब वो मोहन के पास आकर कहती है, क्या आप बाजार जाओगे? मोहन हाँ कहता तो भाभी बोलती यार मेरा एक काम करोगे? मोहन पूछता तो चंपा कहती बाजार से कुछ लाना है, ले आओगे वो फिर से हाँ कहता अब चंपा भाभी मचलते हुए कहती यार कुछ फल चाहिए मोहन पूछता कौन से फल, अंगूर या इमली तो चंपा भाभी पहले तो सोचती फिर कहती इमली खाने का भी टाइम कहाँ आया है? मेरे लिए तुम लाल लाल गाजर और लंबे के लिए ले आना मोहन समझ जाता तो कहता ठीक है अब चंपा भाभी तरबूजो से पैसे निकालती वो देवर को फलों के लिए पैसे दे रही, वो ले लेता वो मचलते हुए बोलती बस कैला थोड़ा बड़ा ही लाना दरअसल चंपा के आमवासना में जल रही देवर भी सब समझ रहा है, वो भी उनकी लेना चाहता अब दिन में भरी दोपहरी में चंपा भाभी लकड़ियां इकट्ठी कर रही तभी मोहन आता तो वो कहती वह बड़े जल्दी आ गए यार देवर मोहन Speaker 1 मुस्कुरा रहा आगे के लिए कमेंट में पार्ट टू लिखे
