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@Roshan Javir
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Imagine कीजिए… आप ऑफिस में बैठे हैं… लंच टाइम हो चुका है… पेट में भूख है… लेकिन मेन्यू कार्ड ढूंढने के लिए आपको हर रेस्टोरेंट में जाना पड़े… आज हम एक क्लिक में खाना ऑर्डर कर लेते हैं… लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यह सब नामुमकिन लगता था। और इसी समस्या से जन्म हुआ — Zomato का। एक साधारण ऑफिस कर्मचारी… एक छोटा सा आइडिया… और आज अरबों डॉलर की कंपनी। लेकिन क्या आप जानते हैं? Zomato कई बार डूबने के कगार पर था… आज की वीडियो में हम जानेंगे — Zomato की पूरी अनकही कहानी… Struggle, Failures, Controversies और Billion Dollar Success तक का सफर। वीडियो को अंत तक देखिए… क्योंकि आखिर में है वो फैसला… जिसने Zomato को बना दिया भारत की सबसे बड़ी फूड डिलीवरी कंपनियों में से एक। साल 2008… दिल्ली का एक ऑफिस… दो दोस्त — Deepinder Goyal और Pankaj Chaddah काम कर रहे थे Bain & Company में। लंच टाइम पर हर दिन एक ही समस्या… सब लोग मेन्यू कार्ड ढूंढते रहते थे… किसी के पास पेपर मेन्यू था… किसी के पास नहीं… Deepinder ने सोचा — “अगर ये मेन्यू ऑनलाइन मिल जाए तो?” और यहीं से शुरू हुआ एक छोटा सा प्रोजेक्ट — Foodiebay.com शुरुआत में ये सिर्फ दिल्ली के कुछ रेस्टोरेंट्स के मेन्यू ऑनलाइन डालता था। लेकिन लोगों को ये आइडिया इतना पसंद आया कि कुछ ही महीनों में लाखों लोग वेबसाइट विजिट करने लगे। Foodiebay से Zomato तक लेकिन एक समस्या आई… Foodiebay नाम सुनने में मिलता था eBay से… ब्रांडिंग में कन्फ्यूजन था। 2010 में नाम बदल दिया गया — Foodiebay बन गया Zomato। नाम छोटा, याद रखने में आसान और ग्लोबल। अब कंपनी ने फोकस किया एक्सपेंशन पर — मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई… फिर इंटरनेशनल मार्केट। Zomato ने UAE, UK, Australia तक एंट्री कर ली। सब कुछ तेजी से बढ़ रहा था… लेकिन असली गेम अभी बाकी था। Startup चलाना आसान नहीं होता। Server cost… Team salary… Expansion cost… Zomato को चाहिए था बड़ा निवेश। तब एंट्री होती है — Info Edge की। Info Edge ने Zomato में निवेश किया। धीरे-धीरे कंपनी ने करोड़ों डॉलर की फंडिंग जुटाई। लेकिन… 2015-16 में कंपनी को भारी नुकसान हुआ। International expansion में बहुत पैसा जल गया। कई देशों से बिजनेस बंद करना पड़ा। Zomato को लगा — अब या तो मॉडल बदलो… या खत्म हो जाओ। इसी समय भारत में एंट्री हो चुकी थी — Swiggy की। अब शुरू हुआ असली युद्ध। Discount war Cashback war Free delivery war कंपनियां घाटे में जा रही थीं… लेकिन मार्केट पकड़ना जरूरी था। Zomato ने बड़ा फैसला लिया — खुद की डिलीवरी शुरू करना। फिर लॉन्च हुआ — Zomato Gold (Subscription Model) लोगों ने खूब पसंद किया… लेकिन रेस्टोरेंट्स ने विरोध भी किया। कई शहरों में Zomato का बहिष्कार हुआ। फिर भी Deepinder पीछे नहीं हटे। 2020… Lockdown… रेस्टोरेंट बंद… ऑर्डर लगभग शून्य। Zomato की हालत खराब। कर्मचारियों की छंटनी… Salary cut… कई लोगों को लगा — अब Zomato खत्म। लेकिन यहीं से आया टर्निंग पॉइंट। Contactless delivery Safety campaign Hyperpure (Restaurant supply chain) धीरे-धीरे ऑर्डर वापस आने लगे। 2021 में Zomato ने कर दिया इतिहास। भारत का पहला बड़ा FoodTech IPO। Stock market में लिस्ट होते ही कंपनी की valuation अरबों डॉलर पहुंच गई। Deepinder Goyal अब बन चुके थे अरबपति। लेकिन सफर अभी खत्म नहीं था। आज Zomato सिर्फ फूड डिलीवरी कंपनी नहीं है। यह एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म है… जो लाखों रेस्टोरेंट्स और करोड़ों ग्राहकों को जोड़ता है। लेकिन इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है? 👉 Problem ढूंढो 👉 Simple solution दो 👉 Risk लो 👉 Failure से मत डरो एक छोटा सा आइडिया… अगर सही तरीके से execute हो… तो वो दुनिया बदल सकता है। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो तो Like करें, Share करें और Subscribe जरूर करें… क्योंकि अगली कहानी हो सकती है — आपकी।

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