सुमित एक छोटे से गाँव का साधारण लड़का था। बचपन में गरीबी ने उसे हर कदम पर रोका, लेकिन उसके सपनों की उड़ान कभी नहीं थमी। पढ़ाई के लिए उसने खेतों में काम किया, रातों में जगकर किताबें पढ़ीं। शहर आया तो तानों और तंगी ने उसका स्वागत किया। कई बार हार मानने का मन हुआ, मगर हर बार माँ की एक सीख याद आई — "हिम्मत मत हारना।" आज सुमित अपनी मेहनत से खुद की एक छोटी कंपनी का मालिक है, और अपनी कहानी से दूसरों को प्रेरित कर रहा है।
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hace 9 meses
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