Osho 2.o

Osho 2.o

@Rahul Gaikwad
28Usos
0Comparte
0Me gusta
2Guardado por

सुमित एक छोटे से गाँव का साधारण लड़का था। बचपन में गरीबी ने उसे हर कदम पर रोका, लेकिन उसके सपनों की उड़ान कभी नहीं थमी। पढ़ाई के लिए उसने खेतों में काम किया, रातों में जगकर किताबें पढ़ीं। शहर आया तो तानों और तंगी ने उसका स्वागत किया। कई बार हार मानने का मन हुआ, मगर हर बार माँ की एक सीख याद आई — "हिम्मत मत हारना।" आज सुमित अपनी मेहनत से खुद की एक छोटी कंपनी का मालिक है, और अपनी कहानी से दूसरों को प्रेरित कर रहा है।

enMasculinoMediana EdadNarraciónProfundoTranquiloLentoMedidoSerioNarración
Público
Muestras
Aún no hay muestras de audio