भक्तों का मन भगवान का ही चिंतन करेगा उनके रूप की उनकी लीला की उनके नाम की उनकी बातों का और जब हम हमारे द्वारा अधर्मा चरण जो शास्त्र विरुद्ध आचरण तो फिर वह गंदी बातों का चिंतन करता है और जब गंदी बातों का चिंतन करता है तो वही दूसरों पर आरोप लगाने लगता है जो हमारा मन गंदा होता ह ै ना तो हमारा मानसिक पाप बनन े लगता है जो हमारा चिंतन होता ह ै जैस े
hi
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il y a 3 mois
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