एक छोटे से गांव में, जहां हरी-भरी खेतियां और साधारण जीवन की सादगी थी, वहां रहता था रामलाल। रामलाल एक गरीब किसान का बेटा था, लेकिन सूखे और गरीबी ने उसके परिवार को तबाह कर दिया था। गांव में काम नहीं मिलता था। फसलें बार-बार बर्बाद हो जातीं, और कर्ज का बोझ बढ़ता जाता। रामलाल की उम्र चालीस के करीब थी, लेकिन उसके चेहरे पर गरीबी की रेखाएं पहले ही गहरी पड़ चुकी थीं। उसकी पत्नी सरिता और छोटा बेटा गोविंद गांव में ही रहते थे। गोविंद अभी सात साल का था, लेकिन रामलाल का सपना था कि वह पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने। "मेरा बेटा डॉक्टर बनेगा या अफसर," वह अक्सर सरिता से कहता। लेकिन गांव में स्कूल दूर था, और किताबें खरीदने के पैसे कहां से आते?
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Общественность
5 месяцев назад
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