आइशा रजि. से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब नापाकी का गुस्ल फरमाते तो पहले दोनों हाथ धोते, फिर नमाज के वुजू की तरह वुजू करते,उसके बाद अपनी उंगलियाँ पानी में डालकर बालों की जड़ों का खिलाल करते, फिर दोनों हाथों से तीन चुल्लू पानी लेकर अपने सर पर डालते, उसके बाद अपने तमाम जिस्म पर पानी बहाते। फायदे : गुस्ल में बदन पर पानी बहाने से फर्ज अदा हो जाता है, लेकिन सुन्नत तरीका यह है कि पहले वुजू किया जाये। 180 : मैमूना रजि से रिवायत है, उन्होंने फरमाया कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने (गुस्ल के वक्त) पहले नमाज के वुजू की तरह वुजू किया, लेकिन पांव नहीं धोये, अलबत्ता अपनी शर्मगाह और जिस्म पर लगने वाली गन्दगी को धोया, फिर अपने ऊपर पानी बहाया, उसके बाद गुस्ल की जगह से अलग होकर अपने दोनों पांव धोये आपका नापाकी का गुस्ल यही था। फायदे : गुस्ल के लिए जरूरी है कि पहले पर्दे का इन्तिजाम करे, फिर दोनों हाथ धोये जायें, उसके बाद दायें हाथ से पानी डालकर शर्मगाह को धोया जाये और उस पर लगी हुई गन्दगी को दूर किया जाये। फिर वुजू का अहतमाम हो, लेकिन पांव ना धोये जायें। फिर बालों की जड़ों तक पानी पहुंचाकर उन्हें अच्छी तरह तर किया जाये, फिर तमाम बदन पर पानी बहाया जाये। आखिर में गुस्ल की जगह से अलग होकर पांव धोये जायें। 181: आइशा रजि. से रिवायत है। उन्होनें फरमाया कि मैं और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (दोनों मिलकर) एक बर्तन से गुस्ल करते थे,एक बड़ा प्याला, जिसे फरक कहा जाता था। 182 : आइशा रजि. से ही रिवायत है कि उनसे जब नबी सल्लललाहु अलैहि वसल्लम की नापाकी के गुस्ल की हालत पूछी गयी तो उन्होंने एक सा के बराबर पानी का बर्तन मंगवाया, उससे गुस्ल किया और अपने सर पर पानी बहाया, गुस्ल के बीच हजरत आइशा रजि. और सवाल करने वाले के बीच पर्दा लगा था।
