कहानी का नाम: “शापित अस्पताल” प्लॉट दो दोस्त – राहुल और समीर। वो स्कूल से लौटते वक्त अचानक बारिश में फँस जाते हैं और मजबूरी में एक पुराने, बंद पड़े हॉस्पिटल में रुकते हैं। यह हॉस्पिटल 20 साल पहले आग और धमाके में सैकड़ों मरीजों और डॉक्टरों के साथ जलकर राख हो गया था। लोग कहते हैं – वहाँ की आत्माएँ अब भी भटकती हैं… --- 📖 कहानी – 24 एपिसोड (हर 5 मिनट) एपिसोड 1 – बारिश और अस्पताल राहुल और समीर स्कूल से घर लौटते हैं। बारिश तेज़ हो जाती है। उन्हें सड़क किनारे एक टूटा-फूटा अस्पताल दिखता है। एपिसोड 2 – मजबूरी दोनों अंदर घुसते हैं। गेट अपने आप कर्कर्र्र की आवाज़ से बंद हो जाता है। चारों ओर अंधेरा और बदबू। एपिसोड 3 – पुराना रिसेप्शन टूटी कुर्सियाँ, बिखरे काग़ज़। नोटिस बोर्ड पर तारीख़—20 साल पुरानी। अचानक घंटी बजती है, जबकि बिजली नहीं है। एपिसोड 4 – स्ट्रेचर की आवाज़ कॉरिडोर में एक स्ट्रेचर अपने आप लुढ़कता है। दोनों घबरा जाते हैं। लगता है कोई दिख रहा है… पर फिर गायब। एपिसोड 5 – एक्स-रे रूम वहाँ एक्स-रे मशीन अपने आप चालू हो जाती है। स्क्रीन पर दोनों की हड्डियाँ नहीं, बल्कि खोपड़ी और कंकाल दिखाई देता है। एपिसोड 6 – वार्ड नंबर 13 दोनों दरवाज़ा खोलते हैं। अंदर बिस्तर पर जली हुई परछाइयाँ पड़ी हैं। अचानक उनमें से एक उठकर कहता है—“डॉक्टर को मत बुलाना…” एपिसोड 7 – भागना बेकार वे भागते हैं लेकिन हर गेट बंद है। बाहर तूफ़ान और तेज़। अंदर दीवारों पर खून से लिखा—“कोई ज़िंदा नहीं गया।” एपिसोड 8 – रिकॉर्ड रूम वहाँ पुरानी फ़ाइलें मिलती हैं। उनमें लिखा है – “1987 में अस्पताल में धमाका, 300 मौतें।” एक पन्ने पर दोनों का नाम भी लिखा हुआ है! एपिसोड 9 – ICU की चीख़ें ICU से मरीजों की चीख़ सुनाई देती है। मशीनें अपने आप बीप करने लगती हैं। पर कमरे में कोई नहीं।
