Geeta

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@Gangajali Pathak
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**जय श्री रघुनंदन राम।** सुनि लेउ मन मोर, हरहु भव विषाद।। राम लखन जनक सुत संग, चरणन में मोरे प्रीति भरंग। तुलसीदास के भाव सनेही, भजत रहे दिन रात समीही।। मंदिर मँ बँसत छवि तोहारि, भकतन के तू राखे लाज हमारी। सीता राम रघुनाथ कृपालु, करहु कृपा मोर मन सम्हालु।। धुनि लागे हनुमान के नामा, जहँ रामहि बास, तहँ शुभ धामा। भजत रहौँ दिन रात प्रभु तोहि, अब तो दीन्हु मोही अपन मोही।।

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