रामु एक छोटे से गाँव का बच्चा था। उसके पापा भी बेरोजगार थे। मां भी कपड़े सिलाई कर कर घर चलाती थीं गरीबी इतनी थी कि उसके पास पढ़ने के लिए न किताबें थीं, न अच्छे कपड़े। थे फिर भी उसका सपना बड़ा था—पढ़-लिखकर कुछ बनने का।हौसला
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