SADIQUE QYAMAT KI NISHANI

SADIQUE QYAMAT KI NISHANI

@SADIQUE KHAN
0Использование
0Акции
0Нравится
0Сохранено пользователем

आज कल एक वीडियो बहुत ज़्यादा वायरल हो रहा है। उसमें एक चाचा हैं, काफ़ी ज़ईफ़ बुज़ुर्ग, जो जज़्बात में आकर बोल देते हैं कि “2026 में दुनिया ख़त्म है।” लेकिन सच बताऊँ तो शायद ये अल्फ़ाज़ उनके मुँह से बस रिपोर्टर को चुप कराने के चक्कर में निकल गए होंगे। ना उनका ये मतलब था, ना उनका ये अकीदा। अफ़सोस की बात ये है कि हम मुसलमान क्या कर रहे हैं? हम उनका मज़ाक बना रहे हैं। हँस रहे हैं, मीम्स बना रहे हैं, कमेंट्स कर रहे हैं। मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ — क्या हम इतने कमज़ोर ईमान के हो गए हैं कि हमें ये भी याद नहीं रहा कि क़यामत का इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है? नबी-ए-करीम ﷺ ने क़यामत की बहुत सारी निशानियाँ बताई हैं जो अभी तक पूरी ही नहीं हुईं। ज़रा ग़ौर करो — इमाम महदी का ज़ुहूर अभी बाक़ी है, दज्जाल का निकलना अभी बाक़ी है, ईसा अलैहिस्सलाम का आसमान से उतरना अभी बाक़ी है, और सबसे बड़ी निशानी — सूरज का मग़रिब से निकलना — ये सब अभी तक हुआ ही नहीं। तो फिर कोई कैसे कह सकता है कि फलाँ साल, फलाँ तारीख़ को दुनिया ख़त्म हो जाएगी? वो चाचा एक बुज़ुर्ग इंसान हैं। ग़लती हो सकती है। जज़्बात में कोई भी कुछ भी बोल सकता है। कभी आपके माँ-बाप ने नहीं बोला क्या — “तुम्हारी टाँगें तोड़ दूँगा!” लेकिन क्या कभी तोड़ी? “उल्टा लटका के मारूँगा!” लेकिन क्या कभी मारा? तो फिर हम ये क्यों नहीं समझते कि हर बोली हुई बात हक़ीक़त नहीं होती? आज तो हद ही हो गई है। कुछ लोगों ने तो काउंटडाउन शुरू कर दिया — इतने दिन बाक़ी हैं, उतने दिन बाक़ी हैं, दुनिया ख़त्म होने में… मैं आपसे फिर पूछता हूँ — क्या तुम्हारे दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ नहीं है? अगर हँसना है तो अपने गुनाहों पर हँसो। अगर डरना है तो अपनी आख़िरत के लिए डरो। और अगर सुधरना है तो अपने ईमान को सुधारो। क़यामत कब आएगी — ये सिर्फ़ अल्लाह जानता है। हमारा काम अपने आमाल ठीक करना है, ना कि बुज़ुर्गों का मज़ाक बनाना। सोचो… समझो…

urМужскойЭнергичныйМолодойСпокойныйДружелюбный
Общественность
Образцы
Пока нет образцов аудиозаписей.