"कभी-कभी शोर-शराबे से दूर, बस अपनी गाड़ी उठानी चाहिए और निकल जाना चाहिए... बिना किसी मंज़िल के, बस खुली सड़क और मैं।" "लोग पूछते हैं कहाँ जा रहे हो? मैं कहता हूँ—जहाँ ये रास्ते ले जाएँ। ज़िंदगी भी तो ऐसी ही है, कभी एकदम स्मूथ डामर जैसी, तो कभी कच्ची और धूल भरी। लेकिन मज़ा तो इसी में है कि आप चलते रहो। आज की दोपहर, ये सन्नाटा और मेरी ये प्यारी राइड... बस यही तो असली सुकून है।" "शहर की भागदौड़ से ब्रेक लेना बहुत ज़रूरी है। कभी-कभी खुद से बात करने के लिए आपको बस एक छोटी सी राइड की ज़रूरत होती है। आपकी आज की थकान दूर करने के लिए आपका 'कंफर्ट ज़ोन' क्या है? कमेंट्स में बताइए।" "खैर, मंज़िल नहीं, ये रास्ता ही आज की कहानी है। अगर आप भी मेरी तरह राइड्स के शौकीन हैं, तो जुड़ जाइए मेरे इस सफर में। मिलते हैं अगली राइड पर, तब तक... राइड सेफ!"