Shaikh

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@faisal ne
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एक अरब कबीले के एक शेख की कहानी एक अरब कबीले के एक शेख को जब यह पता चला कि उसके जानवरों में से एक मुर्गा ग़ायब हो गया है, तो उसने फ़ौरन अपने नौकरों को मुर्गे की तलाश में इधर-उधर दौड़ा दिया। वह खुद भी टीलों पर चढ़कर देखने लगा, लेकिन मुर्गा नहीं मिला। रात तक यह तलाश जारी रही, लेकिन नाकामी ही हाथ लगी। किसी नौकर ने कहा कि शायद किसी भेड़िये ने मुर्गा उठा लिया होगा। इस पर शेख ने मुर्गे के पंख लाने की माँग कर डाली, जिससे नौकर निरुत्तर रह गया। अगले दिन शेख ने ऊँट ज़बह करवाए और पूरे कबीले को खाने पर बुलाया। साथ ही, उसने सभी से गुज़ारिश की कि वे मुर्गे की तलाश में उसकी मदद करें। लोग हैरान थे कि इतना अमीर आदमी एक मुर्गे के लिए इतना बेचैन क्यों है। कबीले वालों ने शेख की बात अनसुनी कर दी और खाना खाकर चले गए। कुछ दिन बाद किसी कबीले वाले की बकरी ग़ायब हो गई। शेख ने फिर ऊँट ज़बह करवाया, लोगों को बुलाया और मुर्गे की तलाश में मदद माँगी। इस बार कुछ लोगों ने इसे पागलपन कहा—मामला बकरी का था लेकिन बात फिर से मुर्गे की हो रही थी। शेख के बेटों ने भी मेहमानों से अपने पिता के व्यवहार के लिए माफ़ी माँगी और बात वहीं खत्म हो गई। कुछ समय बाद एक ऊँट ग़ायब हो गया। शेख ने फिर वही किया—ऊँट ज़बह करवाया, दावत दी और मुर्गे की तलाश की बात छेड़ दी। इस बार लोगों ने चेतावनी दी कि अगर शेख ने ऐसी पागलपन भरी बातें बंद नहीं कीं, तो उसे सरदारी से हटा दिया जाएगा। शेख ने माहौल देखकर चुप्पी साध ली। करीब एक महीना बीता कि कबीले की एक जवान लड़की ग़ायब हो गई। यह घटना कबीले की इज़्ज़त के लिए एक बड़ा झटका थी। शेख ने फिर से वही किया—दावत दी और मुर्गे की तलाश पर ज़ोर देने लगा। यह सुनकर लोग नाराज़ हो गए और लड़की की तलाश में निकल पड़े। खोजी बुलाए गए, कुओं में झांका गया, नौजवानों की टोलियाँ दूर-दूर तक भेजी गईं। आख़िरकार किसी ने खबर दी कि फलां पहाड़ की एक गुफ़ा में कुछ लोग छुपकर रह रहे हैं। जब कबीले वालों ने उस गुफ़ा पर छापा मारा, तो पता चला कि वहाँ डाकू बसे हुए हैं और उन्हीं ने लड़की को अगवा किया था। वहीं से ग़ायब ऊँट, बकरी और शेख के मुर्गे के अवशेष भी मिले। लड़की के मिलने के बाद लोगों को समझ आया कि शेख बार-बार मुर्गे की नहीं, बल्कि किसी बड़ी बुराई की ओर इशारा कर रहा था। वह चाहता था कि लोग जड़ से समस्या को समझें और उसे वहीं से मिटा दें। --- इस कहानी का सबक इस हिकायत की जड़ें चाहे अरब में हों, लेकिन इसका सबक पूरी दुनिया के लिए है। यही सबक सैकड़ों कहानियों और कहावतों में समाया हुआ है जो पुरानी पीढ़ियों ने नई पीढ़ियों तक पहुँचाया है—जब तक पहली गलती को सुधारा नहीं जाता, कुछ भी ठीक नहीं हो सकता। तबाही किसी एक ग़लती से नहीं होती, बल्कि तब होती है जब हम अपनी ग़लती को ही रणनीति मान लेते हैं।

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