सिर घुमा के देखूँ, हर पहलू को साधूँ मैं, पुराने कपड़े छोड़ अब जंजीरें तोड़ूँ मैं। कीबोर्ड की टक-टक, स्क्रीन की वो हल्की रौशनी, बस रफ़्तार बढ़ा रहा, देख रहा मेरी तरक़्क़ी। वो समझते हैं कम मुझे, ठीक है, उनको सोने दो, मैं घंटे लगा रहा, खुद को कसौटी पे ढोने दो। नक्शे से शुरुआत, फिर अंतिम बनावट तक, इस काम को अपनाना है, इसको चमकाना है हर हद तक। हाँ, मैं सच बोलता, फ़ालतू बात नहीं, जब मिशन बुलाए, तो अच्छा होना काफ़ी नहीं!
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há 3 meses
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