Akshay

Akshay

@Neeru Sharma
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एक छोटे से आश्रम में… एक संत रहा करते थे… (हल्का विराम) हर सुबह… वह भगवान का नाम लेते… और चुपचाप ध्यान में बैठ जाते… (विराम) एक दिन किसी ने पूछा… “भगवान कहाँ मिलते हैं?” (थोड़ा ठहराव) संत मुस्कुराए… और बोले… “जहाँ अहंकार समाप्त होता है… वहीं ईश्वर प्रकट होते हैं…” (विराम) उन्होंने कहा… “जो दूसरों को कष्ट देता है… वह भगवान से दूर हो जाता है… और जो सेवा करता है… वह ईश्वर के पास पहुँच जाता है…” (धीमा विराम) हवा शांत हो गई… मन स्थिर हो गया… और शब्द मौन में बदल गए… (विराम) सीख यही है… भगवान मंदिर में नहीं… शुद्ध मन में वास करते हैं… (गहरा विराम)

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