rohan jadav

rohan jadav

@rohan jadav
4Usos
0Comparte
0Me gusta
0Guardado por

समय बीतता गया, विराट की मेहनत और तेज़ होती गई। दिल्ली के मैदानों में अब हर लोग उसके नाम से ख़ुश होजा ते थे। पर ज़िंदगी ने एक ऐसा मोड़ दिया जिसने उसे तोड़ भी दिया और गढ़ भी दिया। एक रात पिता की तबियत अचानक बिगड़ी… वो अस्पताल की ठंडी दीवारों के बीच खड़ा था, आँखों में आँसू और दिल में डर। सुबह हुई… और विराट का सहारा चला गया। पिता का चेहरा आख़िरी बार देखकर उसने धीमे से कहा, “आप देखना, पापा… मैं एक दिन इंडिया के लिए ज़रूर खेलूँगा।” अगले ही दिन मैदान में उतरा, बैट हाथ में था, पर दिल में दर्द का सागर। उस दिन उसने सिर्फ़ मैच नहीं खेला — अपने आँसूओं से इतिहास लिखा। कुछ सालों बाद, वही लड़का भारत की U-19 टीम का कप्तान बना। अब उसका सफ़र सिर्फ़ सपना नहीं, मिशन विराट था।

hivirat kholivirat
Público
Muestras
Aún no hay muestras de audio