social teach

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@Govind Kushwah
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हुक लाइन हम इंसानों ने हमेशा से अपने काम को आसान बनाने की कोशिश की है| चाहे कोई मैन्युफैक्चरिंग हो, चाहे एजुक्शन हो, को या एंटरटेनमेंट| हमने विकाश किया है | जैसे पहले पेन्सिल आई फिर पेन आया और अब हमें पेन की भी जरूत काम होती दिखाई दे रही है, जहा हमें मनोरंजन के लिए विक्रम वेताल जैसी कहानिया सुनाई जाती थी अब हजारो कहानियो को एक्सपीरियंस करने के लिए मूवीस मौजूद है | एक टाइम था जब क्रिकेट सिर्फ रेडियो पर सुन कर या अखबारों में पढ़कर एक्सपीरियंस किया जाता था और आज हम हर क्रिकेट मैच अपने फ़ोन पर लाइव देख सकते है| जहा बैंक में पैसे डालने या निकालने ने के लिए लम्बी लाइनों में लगना पड़ता था! अब हर ट्रांजेक्शन घर बैठे हो जाता है| पर क्या वास्तव में टेक्नोलॉजी कितनी आसान है की इसके आने भर से बोहोत से काम आसान हो जाते है? किसी को अब रास्ते भर चल कर नहीं जाना पड़ता, टाइम पास करने के लिए सिर्फ किताबे नहीं पड़ी जाती| लिखने के लिए अब कोई पेन का इस्तेमाल नहीं करता और मेसेज भेजने के लिए किसी डाकिये की जरुरत नहीं पड़ती | ये ऊपर ऊपर से सुनने में आसान तो लगता है पर हकिगत कुछ और होती है कुछ ऐसे लोग भी होते है जिन्हे इस टेक्नोलॉजी की एक बोहोत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है| जिनकी बात आगे वीडियो में होगी

hi
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