कभी-कभी दिमाग़ इतना बोलता है… कि दिल की आवाज़ दब जाती है। वो सोच बन जाती है डर… और डर बन जाता है सच। पर याद रख — हर आवाज़ तेरी नहीं होती… कुछ तेरे खिलाफ़ भी होती हैं।”
hi
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4 个月前
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कभी-कभी दिमाग़ इतना बोलता है… कि दिल की आवाज़ दब जाती है। वो सोच बन जाती है डर… और डर बन जाता है सच। पर याद रख — हर आवाज़ तेरी नहीं होती… कुछ तेरे खिलाफ़ भी होती हैं।”