तेरी कायनात मेरे खाली हाथ और तारतार सपने गए जख्म जोग मेरे सीने लगी सांस सांस तपने तेरी कायनात मेरे खाली हाथ और तारतार सपने दर्दों से चू ूर गम का गुरूर कहूं क्या मैं हाल अपने आवारा आवारा रातों में डूबा अंबर का बंजारा जाने टूटा क्यों मैं शीशा ना तारा तेरी कायनात मेरे खाली हाथ और तारतार सपने गए जख्म जाग मेरे सीने आग लगी सांसे सांस तपने कोई उधारी है सीने पे भारी है पत्थर है या दिल है मैं ही अकेला हूं मैं ही तो मेरा हूं ये कैसी महफिल है रूठे सवेरे हैं आधे ही मेरे हैं आधे हैं ये तेरे तू है निगाहों में लवा है आहों में बस सर्द शाम आवारा आवारा आवारा आंसू है मेरे या पिघला है पारा जाने टूटा क्यों मैं शीशा ना तारा मेरा इंतहा तू जो ले रहा है अब ना रियायत कर मैंने इश्क सीखा मैंने प्यार सीखा तू चाहे नफरत कर
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5 days ago
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