Kallixis

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@Danish Imran
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तेजी से बहती लहरें, अंधेरी रात, और पीछे से आती हज़ारों घोड़ों की टाप की आवाज। स्क्रीन पर धुंधली रोशनी में एक सेना दिखाई देती है, जो डर से कांप रही है।) Narrator: सोचिए… एक तरफ गहरा, बेरहम समंदर है, जिसकी लहरें मौत का पैगाम दे रही हैं, और दूसरी तरफ दुनिया का सबसे बड़ा जालिम फ़िरौन, अपने खूंखार सैनिकों के साथ आपका कत्ल करने आया है। न भागने का रास्ता है, न लड़ने का साधन। क्या मौत तय है? या फिर कुछ ऐसा होने वाला है, जो इंसानी दिमाग को हैरान कर देगा? हजारों साल पहले, मिस्र के किनारे एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने न सिर्फ एक क़ौम की तक़दीर बदल दी, बल्कि अहंकार को मिट्टी में मिला दिया। 2️⃣ INTRODUCTION Narrator: यह कहानी है हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम की। वही नबी जिन्हें अल्लाह ने "कलीमुल्लाह" का उपनाम दिया। मिस्र की सदियों पुरानी इतिहास गवाही देती है कि बनी इस्राएल पर फ़िरौन के ज़ुल्म की इत्ता सीमा हो चुकी थी। बच्चों का कत्ल और पुरुषों की गुलामी उनका मुक़द्दर बन चुकी थी। लेकिन अल्लाह का वादा सच था। कुरआन में सूरह अल-क़सस में अल्लाह फ़रमाता है कि हमने निर्णय किया कि हम उन लोगों पर कृपा करेंगे जिन्हें ज़मीन पर कमज़ोर किया गया था। हज़रत मूसा (AS) को हुक्म मिला कि वे अपनी क़ौम को लेकर रात के अंधेरे में मिस्र से निकल खड़े हों। यह एक हिजरत थी—गुलामी से आज़ादी की ओर, और कुफ़्र से ईमान की ओर। 3️⃣ MAIN STORY: खुफ़्र और ईमान का टकराव (Visual: रेगिस्तान की धूल, हज़रत मूसा (AS) का शांत और गरिमामय चेहरा, और उनके पीछे हज़ारों पुरुष, महिलाएं और बच्चे।) Narrator: हज़रत मूसा (AS) ने अल्लाह के हुक्म से बनी इस्राएल को इकट्ठा किया और ख़ामोशी से निकल पड़े। लेकिन जल्दी ही फ़िरौन को इस बगावत की ख़बर मिली। उसका अहंकार भड़क गया। उसने अपने राज्य के कोने-कोने से बेहतरीन सैनिक, रथ और घोड़े इकट्ठा किए। सीरत इब्न हिशाम और अन्य ऐतिहासिक हवाले के अनुसार, फ़िरौन की सेना इतनी बड़ी थी कि उसकी धूल और धुएँ से आसमान छुप गया। वे तेजी से मूसा (AS) का पीछा कर रहे थे ताकि उन्हें समुद्र तक पहुँचने से पहले ही खत्म कर दें। Scene: समुद्र के किनारे फंसी हुई क़ौम सुबह की पहली किरण के साथ, बनी इस्राएल ने पीछे मुड़कर देखा। दूर से उठती धूल उनकी मौत की चेतावनी थी। सामने बहार-ए-अहमर (Red Sea) की नीली और गहरी लहरें थीं। क़ौम में अफ़रा-तफ़री मच गई। लोग चिल्लाए: "ऐ मूसा! हम तो फँस गए! सामने मौत है और पीछे दुश्मन!" लेकिन यहीं ईमान बोलता है। कुरआन में सूरह अश-शूअरा में इस लम्हे का ज़िक्र मिलता है। जब लोग मायूसी में कह रहे थे कि हम फँस गए, तो मूसा (AS) ने पूरी आत्म-विश्वास भरी आवाज़ में कहा: "हरगिज नहीं! मेरे साथ मेरा रब है, वह जरूर मुझे रास्ता दिखाएगा।" 4️⃣ CLIMAX: MOJIZA-E-KALIMULLAH (Visual: हज़रत मूसा (AS) समुद्र के किनारे खड़े हैं, हाथ में छड़ी (असा) है। चारों ओर सन्नाटा।) Narrator: वही हुआ जिसका वादा अल्लाह ने किया था। अल्लाह ने हज़रत मूसा (AS) की ओर फरमान भेजा: "अपनी छड़ी समुद्र पर मारो।" जैसे ही मूसा (AS) ने पुरानी छड़ी समुद्र के पानी पर मारी, क़ायनात ने वह दृश्य देखा जो न पहले कभी देखा गया था, न बाद में। सूरह अश-शूअरा की आयत के अनुसार, समुद्र फट गया! पानी के बीच में रास्ते बन गए, और पानी की लहरें दोनों तरफ पहाड़ जैसी खड़ी हो गईं। बनी इस्राएल हैरान और उत्साहित होकर उन रास्तों पर दौड़ पड़े। ज़मीन सूखी हो चुकी थी, जैसे वहाँ कभी पानी था ही नहीं। यह अल्लाह की कुदरत का खुला इज़हार था। फ़िरौन की हलाकत जब हज़रत मूसा (AS) और उनकी क़ौम दूसरे किनारे पहुँच गए, तो पीछे से फ़िरौन अपनी सेना समेत उन्हीं रास्तों में प्रवेश कर गया। उसका अहंकार उसे अंधा कर चुका था। उसने सोचा कि अगर मूसा के लिए रास्ता बना है, तो मेरे लिए भी रहेगा। लेकिन जब वह समुद्र के बीच पहुँचा, तो अल्लाह का हुक्म बदल गया। वह पानी जो पहाड़ बन कर खड़ा था, अचानक गिरने लगा। सहीह बुख़ारी की हदीस में आता है कि जब फ़िरौन डूबने लगा और मौत को सामने देखा, तो कहने लगा: "मैं ईमान लाया उस पर जिस पर बनी इस्राएल ने ईमान लाया।" लेकिन अब देर हो चुकी थी। अल्लाह ने उसकी मौत को क़यामत तक सबक बनाकर रख दिया। 5️⃣ CONCLUSION AND MORAL LESSON (Visual: हज़रत मूसा (AS) का शांतिपूर्ण दृश्य और फ़िरौन का शव समुद्र तट पर पड़ा हुआ।) Narrator: फ़िरौन का शरीर आज भी मिस्र के म्यूज़ियम में एक मृत निशानी के रूप में मौजूद है, जैसा कि कुरआन ने भविष्यवाणी की थी: "हम आज तेरे शरीर को बचा लेंगे ताकि तू आने वालों के लिए निशानी बने।" (सूरह यूनुस) यह कहानी हमें सिखाती है कि जब दुनिया के सभी दरवाज़े बंद हो जाएँ, तब भी अल्लाह का दरवाज़ा खुला रहता है। शर्त सिर्फ़ ईमान और तवक्कुल (भरोसा) की है। मूसा (AS) के पास न हथियार थे, न सेना, सिर्फ़ अपने रब पर भरोसा था। आज का मुसलमान भी अगर मुश्किलों के समुद्र में फँसा हो, तो उसे घबराना नहीं चाहिए। याद रखिए, जो रब पानी के बीच रास्ता बना सकता है, वही आपकी ज़िन्दगी की मुश्किलों को भी पल भर में दूर कर सकता है। Voice-over: बेशक, हक आया और बातिल मिट गया, और बातिल तो मिटने ही वाला था।

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