مولد صوت AI Shrikant مجاني من Fish Audio

توليد صوت Shrikant الموثوق به من قبل أكثر من 0 منشئ محتوى. إنشاء خطاب ذكر, شاب, وسائل التواصل الاجتماعي باستخدام تحويل النص إلى كلام بالذكاء الاصطناعي.

مدعوم من Fish Audio S1

عينات - Shrikant

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Default Sample

عينة 1

ਸਾਡੇ ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ ਵਿਸਾਖੀ ਦਾ ਮੇਲਾ ਲੱਗਣ ਵਾਲਾ ਹੈ। ਸਾਰੇ ਭੈਣ ਭਰਾ ਆ ਜਾਓ, ਢੋਲ ਵੱਜਣਗੇ, ਗਿੱਧਾ ਪਾਵਾਂਗੇ। ਸਾਰਾ ਪਰਿਵਾਰ ਇਕੱਠਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਪਿੰਡ ਦੀ ਰੌਣਕ ਵਧੇਗੀ।

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Shrikant

होई, आता नवीन योजना सुरू जालेली हैं, ज्यामधे शेतकरांना खास सवलत मिळणार हैं. सरकार कडून प्रति एकर 25 हजार रुपये मदत देण्यात येणार हैं. खात्यामधे पैसे जमा करण्याची प्रक्रिया लवकरच सुरू होईल.

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Shrikant

सोचिए, आप मौत के सामने खड़े हैं, आपके पिता आपकी आंखों के सामने हैं, लेकिन फिर भी आप बच नहीं पाते। नोएडा सेक्टर 150 में 27 साल के युवराज के साथ जो हुआ, वो किसी का भी कलेजा कपा दे।" तारीख: यह घटना 16-17 जनवरी, 2026 की रात (शुक्रवार देर रात) की है। स्थान: नोएडा सेक्टर 150, थाना (Knowledge Park) का क्षेत्र। घटनास्थल: यह एक (T-point) था जहाँ एक प्राइवेट बिल्डर द्वारा खोदा गया एक गहरा गड्ढा (बेसमेंट के लिए) सालों से खुला पड़ा था और उसमें पानी भरा हुआ था। 2. आखिर क्या हुआ था? (पूरी कहानी) युवराज मेहता गुड़गांव से अपना काम खत्म करके अपनी Grand Vitara कार से नोएडा (अपने घर) लौट रहे थे। रात में बहुत घना कोहरा था। सेक्टर 150 के पास एक मोड़ पर कोहरे के कारण उन्हें रास्ता साफ नहीं दिखा। वहां सुरक्षा के लिए कोई मजबूत दीवार या बैरिकेडिंग नहीं थी। उनकी कार सड़क किनारे नाले की दीवार तोड़ते हुए सीधे उस 30 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। सबसे दर्दनाक पहलू: कार गिरने के बाद युवराज तुरंत नहीं डूबे। वो कार की छत पर चढ़ गए और अपने पिता को फोन किया। वो करीब 1.5 से 2 घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अंत में कार पानी में डूब गई और उनकी जान चली गई। 3. यह किसकी गलती से हुआ? (जिम्मेदार कौन?) यह हादसा किसी एक की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही का नतीजा था: बिल्डर की लापरवाही (सबसे बड़ी गलती): जिस प्लॉट में यह गड्ढा था, वह MZ Wiztown Planners और Lotus Green नाम के बिल्डर्स का था। उन्होंने बेसमेंट के लिए गड्ढा खोदा और उसे सालों तक खुला छोड़ दिया, न वहां कोई बैरिकेड लगाया, न रिफ्लेक्टर। पुलिस ने इसके लिए बिल्डर के CEO (अभय सिंह) को गिरफ्तार भी किया है। नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority): वहां न तो स्ट्रीट लाइट थी और न ही सड़क पर कोई चेतावनी का बोर्ड। स्थानीय लोग कई बार शिकायत कर चुके थे कि यह मोड़ खतरनाक है, लेकिन अथॉरिटी ने ध्यान नहीं दिया। इस लापरवाही के कारण यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के CEO को हटा दिया है और जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड किया है। बचाव दल की कमी: पुलिस और युवराज के पिता मौके पर पहुँच गए थे, लेकिन पुलिस के पास रस्सियाँ छोटी थीं और गोताखोर (divers) या नाव तुरंत उपलब्ध नहीं थे। कोहरे और संसाधनों की कमी के कारण उन्हें समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका। नोएडा अथॉरिटी: इस घोर लापरवाही के लिए यूपी सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम (Lokesh M) को पद से हटा दिया है। साथ ही जूनियर इंजीनियर (JE) को सस्पेंड किया गया है। पुलिस/SIT: मामले की जांच के लिए एक SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया गया है। 5. परिवार का दर्द: युवराज अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मां का 2 साल पहले निधन हो चुका था, और अब वे अपने बुजुर्ग पिता के एकमात्र सहारे थे। पिता का कहना है कि "मेरा बेटा मेरी आंखों के सामने 2 घंटे तक मदद मांगता रहा और सिस्टम उसे बचा नहीं सका।"

Sample Transcriptions

Default Sample - عينة 1

ਸਾਡੇ ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ ਵਿਸਾਖੀ ਦਾ ਮੇਲਾ ਲੱਗਣ ਵਾਲਾ ਹੈ। ਸਾਰੇ ਭੈਣ ਭਰਾ ਆ ਜਾਓ, ਢੋਲ ਵੱਜਣਗੇ, ਗਿੱਧਾ ਪਾਵਾਂਗੇ। ਸਾਰਾ ਪਰਿਵਾਰ ਇਕੱਠਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਪਿੰਡ ਦੀ ਰੌਣਕ ਵਧੇਗੀ।

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होई, आता नवीन योजना सुरू जालेली हैं, ज्यामधे शेतकरांना खास सवलत मिळणार हैं. सरकार कडून प्रति एकर 25 हजार रुपये मदत देण्यात येणार हैं. खात्यामधे पैसे जमा करण्याची प्रक्रिया लवकरच सुरू होईल.

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सोचिए, आप मौत के सामने खड़े हैं, आपके पिता आपकी आंखों के सामने हैं, लेकिन फिर भी आप बच नहीं पाते। नोएडा सेक्टर 150 में 27 साल के युवराज के साथ जो हुआ, वो किसी का भी कलेजा कपा दे।" तारीख: यह घटना 16-17 जनवरी, 2026 की रात (शुक्रवार देर रात) की है। स्थान: नोएडा सेक्टर 150, थाना (Knowledge Park) का क्षेत्र। घटनास्थल: यह एक (T-point) था जहाँ एक प्राइवेट बिल्डर द्वारा खोदा गया एक गहरा गड्ढा (बेसमेंट के लिए) सालों से खुला पड़ा था और उसमें पानी भरा हुआ था। 2. आखिर क्या हुआ था? (पूरी कहानी) युवराज मेहता गुड़गांव से अपना काम खत्म करके अपनी Grand Vitara कार से नोएडा (अपने घर) लौट रहे थे। रात में बहुत घना कोहरा था। सेक्टर 150 के पास एक मोड़ पर कोहरे के कारण उन्हें रास्ता साफ नहीं दिखा। वहां सुरक्षा के लिए कोई मजबूत दीवार या बैरिकेडिंग नहीं थी। उनकी कार सड़क किनारे नाले की दीवार तोड़ते हुए सीधे उस 30 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। सबसे दर्दनाक पहलू: कार गिरने के बाद युवराज तुरंत नहीं डूबे। वो कार की छत पर चढ़ गए और अपने पिता को फोन किया। वो करीब 1.5 से 2 घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अंत में कार पानी में डूब गई और उनकी जान चली गई। 3. यह किसकी गलती से हुआ? (जिम्मेदार कौन?) यह हादसा किसी एक की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही का नतीजा था: बिल्डर की लापरवाही (सबसे बड़ी गलती): जिस प्लॉट में यह गड्ढा था, वह MZ Wiztown Planners और Lotus Green नाम के बिल्डर्स का था। उन्होंने बेसमेंट के लिए गड्ढा खोदा और उसे सालों तक खुला छोड़ दिया, न वहां कोई बैरिकेड लगाया, न रिफ्लेक्टर। पुलिस ने इसके लिए बिल्डर के CEO (अभय सिंह) को गिरफ्तार भी किया है। नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority): वहां न तो स्ट्रीट लाइट थी और न ही सड़क पर कोई चेतावनी का बोर्ड। स्थानीय लोग कई बार शिकायत कर चुके थे कि यह मोड़ खतरनाक है, लेकिन अथॉरिटी ने ध्यान नहीं दिया। इस लापरवाही के कारण यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के CEO को हटा दिया है और जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड किया है। बचाव दल की कमी: पुलिस और युवराज के पिता मौके पर पहुँच गए थे, लेकिन पुलिस के पास रस्सियाँ छोटी थीं और गोताखोर (divers) या नाव तुरंत उपलब्ध नहीं थे। कोहरे और संसाधनों की कमी के कारण उन्हें समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका। नोएडा अथॉरिटी: इस घोर लापरवाही के लिए यूपी सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम (Lokesh M) को पद से हटा दिया है। साथ ही जूनियर इंजीनियर (JE) को सस्पेंड किया गया है। पुलिस/SIT: मामले की जांच के लिए एक SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया गया है। 5. परिवार का दर्द: युवराज अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मां का 2 साल पहले निधन हो चुका था, और अब वे अपने बुजुर्ग पिता के एकमात्र सहारे थे। पिता का कहना है कि "मेरा बेटा मेरी आंखों के सामने 2 घंटे तक मदद मांगता रहा और सिस्टम उसे बचा नहीं सका।"

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التفاصيل التقنية لصوت Shrikant

Shrikant يعمل مع لغات متعددة تلقائيًا. يكتشف الذكاء الاصطناعي لغة نصك ويولد خطابًا طبيعيًا.
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