Amardeep
von Ritika SharmaScript IPS officer ki
बिहार के एक छोटे से गाँव रामपुर में रवि नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता रामप्रसाद एक साइकिल मैकेनिक थे, और माँ सावित्री देवी लोगों के घरों में काम किया करती थी।
रवि के पास स्कूल के लिए सिर्फ एक ही यूनिफॉर्म थी, जिसे वह रोज़ धोकर और सुखाकर पहनता था। रवि रोज़ सुबह गांव के कुएं से पानी भरता, फिर अपनी माँ के साथ अंगीठी जलाता, और दोपहर में स्कूल के बाद पिता के साथ साइकिल रिपेयर की दुकान ,पर उनका हाथ बँटाता।
रवि का जीवन बहुत सरल चल रहा था, और वह पढ़ाई में भी एक एवरेज स्टूडेंट था।
एक दिन रवि के स्कूल में एक एनुअल फंक्शन था। स्कूल में बड़े अधिकारी और टीचर्स आए थे, जिनमें एक IPS ऑफिसर भी था। सभी लोग IPS ऑफिसर का बहुत अच्छे से स्वागत करते हैं और उन्हें बहुत सम्मान देते हैं।
IPS ऑफिसर सभी बच्चों को इंस्पिरेशनल और मोटिवेशनल कहानियाँ सुनाते हैं और उन्हें बड़े-बड़े सपने देखने और उनको पूरा करने के लिए प्रेरित करते हैं।
IPS के चले जाने के बाद, स्कूल के प्रिंसिपल राकेश सभी बच्चों को बताते हैं कि "बच्चों, ये IPS साहब पहले बहुत गरीब हुआ करते थे, लेकिन उनके सपने बड़े थे और उन्होंने अपने सपनों पर काम किया। उनकी कड़ी मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय की वजह से आज वह इस पद पर हैं।"
IPS की कहानी और टीचर की बातें रवि के दिल को छू गईं। ये बातें सुनकर उसकी आँखों में चमक सी आ गई। उसने मन ही मन ठान लिया था कि वह भी IPS ऑफिसर बनेगा।
स्कूल से छुट्टी होने के बाद वह अपने घर पहुँचा और आज का यह सारा किस्सा अपनी माँ को बताया और माँ से कहा कि "देखना माँ, मैं भी एक दिन IPS ऑफिसर बनूँगा।" उसकी माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ बेटा, तू ज़रूर IPS ऑफिसर बनेगा।"
अगले दिन जब रवि स्कूल गया, तो क्लासरूम में इंग्लिश टीचर पढ़ा रहे थे। टीचर ने सभी बच्चों से पूछा, "बच्चों, बताओ तुम सभी बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?" सभी बच्चों ने जवाब दिया। किसी ने टीचर बताया, किसी ने डॉक्टर और किसी ने आर्मी ऑफिसर। टीचर ने रवि से पूछा, "बताओ रवि, तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?"
रवि ने मुस्कुराते हुए कहा, "सर, मैं तो IPS ऑफिसर बनना चाहता हूँ।"
रवि की बात सुनकर उसकी क्लास के सभी बच्चे ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। तभी एक स्टूडेंट ने कहा, "रवि, तूने कभी अपनी शक्ल देखी है आईने में? रोज़ वही यूनिफॉर्म और फटे जूते पहन कर आता है। तुझ पर तो यूनिफॉर्म खरीदने के भी पैसे नहीं हैं और चला है IPS ऑफिसर बनने।"
तभी दूसरा लड़का कहता है, "रवि, सपने वो देखे जाते हैं जो पूरे हो सकें, वो सपने मत देखा कर जो कभी सपने में भी पूरे न हो सकें।"
टीचर ने सभी स्टूडेंट्स को डाँट लगाई और रवि से कहा, "बेटा, तुम ज़रूर IPS ऑफिसर बनोगे। बस, मेहनत और लगन से पढ़ाई करो।" टीचर की यह बात सुनकर रवि को थोड़ा हौसला मिला।
रवि इस बार 10वीं कक्षा में था। उसने ठान लिया था कि इस बार अच्छे नंबर लाने हैं और पूरी क्लास में टॉप करना है। रवि ने बहुत मेहनत से पढ़ाई की। लाइट चली जाती तो वह लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करता। और फिर एग्ज़ाम का दिन आ गया। रवि ने बहुत अच्छे से अपना एग्ज़ाम दिया। सबको यही लग रहा था कि यह तो पढ़ाई में इतना अच्छा नहीं है, तो इसके तो एवरेज मार्क्स ही आएँगे। लेकिन सबका घमंड टूटने वाला था।
आख़िरकार रिजल्ट का दिन आ गया और रवि ने सच में पूरी क्लास में टॉप किया। सभी बच्चों और टॉपर के मुँह खुले के खुले रह गए। वह सब सोच रहे थे कि रवि तो हमेशा एवरेज मार्क्स स्कोर करता था, पास भी बहुत मुश्किल से होता था, इसने टॉप कैसे किया!
रवि के टीचर बहुत खुश थे। उन्होंने रवि को बधाई दी और कहा, "रवि बेटा, आज पूरी क्लास में टॉप किया है, कल IPS भी बनोगे, बस मेहनत करते रहो।"
इसी तरह रवि ने 11वीं और 12वीं में भी अच्छा स्कोर किया।
12वीं ख़त्म होने के बाद रवि कॉलेज में आ गया था। कॉलेज के साथ-साथ रवि अपनी यूपीएससी की पढ़ाई भी कर रहा था। रवि ने बहुत मेहनत और लगन से पढ़ाई की। बिना किसी कोचिंग के, अपने घर से ही सेल्फ़ स्टडी करके। वह थोड़ा-बहुत अपने पिताजी के काम में हाथ बँटाता, लेकिन उसके पिताजी कहते, "तू बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, यह सब काम तो मैं कर लूँगा।"
धीरे-धीरे समय बीता और एग्ज़ाम का दिन आ गया। रवि की ग्रेजुएशन भी कंप्लीट हो गई थी। आज उसका यूपीएससी प्रीलिम्स का पहला एग्ज़ाम था। वह सुबह जल्दी सब काम ख़त्म करके और अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेकर एग्ज़ाम के लिए निकल गया। रवि पहली बार एग्ज़ाम दे रहा था इसलिए थोड़ा नर्वस और डरा हुआ था, लेकिन एक्साइटेड भी था।
फिर उसने अपना एग्ज़ाम दिया। उसे उम्मीद थी कि प्रीलिम्स के पहले एग्ज़ाम में वह पास हो जाएगा और ऐसा ही हुआ। उसका प्रीलिम्स का एग्ज़ाम क्लियर हो गया। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था। उसके माता-पिता भी बहुत खुश थे और जो लोग उसका पहले मज़ाक उड़ाते थे, वह लोग भी आज उसे बधाई दे रहे थे।
रवि ने सोचा कि बस अब मेन्स का एग्ज़ाम और इंटरव्यू क्लियर हो जाए, फिर मैं IPS बन जाऊँगा। मेन्स के एग्ज़ाम के लिए रवि के पास अभी साढ़े तीन महीने थे। उसने फिर से बहुत मेहनत और लगन से पढ़ाई की। वह पूरा दिन बस पढ़ता ही रहता।
धीरे-धीरे समय बीता। मेन्स के एग्ज़ाम के लिए केवल अब एक महीना ही रह गया था, लेकिन एक दिन रवि की माँ बहुत बीमार हो जाती हैं और फिर रवि और रवि के पिताजी उनको हॉस्पिटल ले जाते हैं। डॉक्टर ने जाँच करके बताया कि उनको डेंगू बुखार हो गया है, जिसकी वजह से उनकी प्लेट्स बहुत कम हो गई हैं। डॉक्टर ने कुछ दवाइयाँ दीं और कहा कि इन्हें दो हफ़्तों तक आराम की सख़्त ज़रूरत है, इसलिए इनसे कोई भी काम न करवाएँ।
अब घर की सारी ज़िम्मेदारी रवि पर आ गई। माँ की तबियत ज़्यादा ठीक नहीं रहती, इसलिए घर का काम भी रवि को ही करना पड़ता। अब रवि को पढ़ने के लिए ज़्यादा टाइम नहीं मिलता और घर की लाइट भी चली जाया करती, तो रवि स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करता।
आख़िरकार यूपीएससी मेन्स के एग्ज़ाम का समय भी आ गया और रवि ने यूपीएससी मेन्स का एग्ज़ाम दिया। रवि को उम्मीद थी कि इस बार भी उसका एग्ज़ाम क्लियर हो जाएगा। अब बस रवि को रिजल्ट का इंतज़ार था। कुछ दिनों बाद रवि के यूपीएससी मेन्स का रिजल्ट आया, लेकिन इस बार रवि का एग्ज़ाम क्लियर नहीं हुआ।
रवि बहुत निराश हो गया। उसके दोस्त और रिश्तेदारों ने कहा कि "यूपीएससी तुम्हारे बस का नहीं है। तुम कोई और जॉब देख लो।"
रवि ने कुछ नहीं कहा। वह अपनी माँ के पास गया। उसकी माँ ने कहा, "कोई बात नहीं बेटा, इस बार पास नहीं हुआ तो क्या, अगली बार हो जाएगा। बस हिम्मत मत हारना। मुझे पता है, तुम आख़िरी समय पर पढ़ नहीं पाए थे क्योंकि मेरी तबियत ख़राब हो गई थी। अब मैं ठीक हो गई हूँ। अब तुमको कोई काम करने की ज़रूरत नहीं। अब तुम बस एक बार फिर से अपनी यूपीएससी की तैयारी शुरू करो। मुझे अपने बेटे को IPS ऑफिसर की वर्दी में देखना है।"
अपनी माँ की बातें सुनकर रवि के अंदर थोड़ी हिम्मत आई। रवि ने फिर से एक बार यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। अब वह दिन-रात केवल अपनी पढ़ाई पर ही फोकस करता। पूरा दिन बस पढ़ता ही रहता।
रवि ने अगले साल फिर से यूपीएससी का एग्ज़ाम दिया, और इस बार रवि की कड़ी मेहनत और माता-पिता के समर्थन की वजह से उसके दोनों एग्ज़ाम - प्रीलिम्स और मेन्स - दोनों क्लियर हो गए।
अब बस उसको इंटरव्यू का इंतज़ार था कि बस उसका इंटरव्यू और क्लियर हो जाए। कुछ दिनों बाद इंटरव्यू की डेट भी आ गई। वह इंटरव्यू देने गया। थोड़ा नर्वस था। थोड़ी देर बाद उसका इंटरव्यू हो गया और वह बाहर आया। उसे लगा कि इस बार हो जाएगा, क्योंकि उसका इंटरव्यू भी अच्छा गया था। उसे अपने ऊपर पूरा विश्वास था कि इस बार उसका हो जाएगा।
कुछ दिनों बाद उसका रिजल्ट आता है, लेकिन उसका सेलेक्शन इस बार भी नहीं होता क्योंकि इस बार वह इंटरव्यू में डिसक्वालीफाई हो गया था।
अपना रिजल्ट देखकर रवि पूरी तरह से टूट गया था। उसने इतनी मेहनत और लगन से पढ़ाई करी और दोनों एग्ज़ाम क्लियर किए, लेकिन इस बार वह इंटरव्यू में फेल हो गया। अब उसमें बिल्कुल भी हिम्मत नहीं बची थी।
एक दिन रवि एक झील के किनारे उदास बैठा था। वह आज बहुत मायूस था। रवि अपनी आँखें बंद करके वही घास पर लेट गया। वह जैसे ही अपनी आँखें बंद करता है, उसे अपनी माँ का चेहरा दिखाई देता है कि किस तरह उन्होंने बहुत दुःख से अपनी ज़िंदगी काटी है और अपने पिता का ख़याल आता है कि कैसे उसके माता-पिता ने उसे आज यहाँ तक पहुँचाया है और इतना पढ़ाया। और फिर उसे लोगों का ख़याल आता है जो हमेशा उसका मज़ाक बनाते थे कि वह कभी भी IPS नहीं बन पाएगा, हमेशा गरीब ही रहेगा।
रवि अपनी आँखें खोलता है, और फिर एक बार यूपीएससी का एग्ज़ाम देने की सोचता है। फिर उसे अपनी माँ की कही बात याद आती है कि "बेटा, ज़रूरी नहीं कि सफलता एक बार में ही मिल जाए। कभी-कभी सफलता थोड़ी देर से मिलती है। बस थोड़ा धैर्य रखो। मेहनत करने वाले को सफलता ज़रूर मिलती है।"
रवि के अंदर एक बार फिर से उम्मीद की रोशनी जागती है, और फिर से थोड़ी हिम्मत आती है। एक बार फिर से रवि अपने सपने को पूरा करने के लिए उन पर काम करता है। रवि फिर से यूपीएससी की तैयारी शुरू करता है। इस बार ज़्यादा पढ़ना नहीं पड़ता क्योंकि वह दो बार यूपीएससी का एग्ज़ाम दे चुका था।
रवि अगली साल फिर से एग्ज़ाम देता है - पहले प्रीलिम्स और फिर मेन्स का - और दोनों एग्ज़ाम उसके क्लियर हो जाते हैं। अब बस उसे अपने फाइनल इंटरव्यू का इंतज़ार था।
थोड़े दिन बाद इंटरव्यू की डेट भी आ जाती है। आज उसका IPS का इंटरव्यू था। वह अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेकर और भगवान से प्रार्थना करके इंटरव्यू के लिए निकल जाता है।
रवि इंटरव्यू के लिए रूम में एंटर करता है। वहाँ पर कुछ ऑफिसर बैठे थे। ऑफिसर्स उससे कुछ सवाल पूछते हैं। रवि उनका जवाब बहुत कॉन्फ़िडेंस के साथ देता है। कुछ देर बाद इंटरव्यू ख़त्म होता है और रवि रूम से बाहर आता है। रवि के दिमाग में चल रहा था कि अगर इस बार नहीं हुआ तो वह कोई दूसरी जॉब करने लगेगा, क्योंकि वह अपने माता-पिता को और निराश नहीं करना चाहता था।
धीरे-धीरे समय बीता और कुछ दिनों बाद यूपीएससी एग्ज़ाम का फाइनल रिजल्ट आ गया।
मेरिट लिस्ट में अपना नाम देखकर रवि की खुशी का ठिकाना नहीं था। रवि की आँखों में आँसू आ जाते हैं। वह अपनी माँ को फ़ोन करता है, "हेलो मम्मी, हो गया मेरा सेलेक्शन!"
"आख़िरकार तू IPS बन ही गयो रवि,"
"हाँ मम्मी।"
थोड़ी देर बाद रवि वापस अपने गाँव आता है। गाँव वाले उसका स्वागत बड़ी धूमधाम से करते हैं क्योंकि उनके गाँव में पहली बार कोई IPS ऑफिसर बना था।
जो लोग पहले रवि का मज़ाक उड़ाते थे, आज उनकी बोलती बंद थी। उनका मन ग्लानि से भरा हुआ था।
कुछ दिनों बाद रवि अपनी IPS की ड्यूटी जॉइन कर लेता है। रवि के माता-पिता अपने बेटे को IPS ऑफिसर की वर्दी में देखकर बहुत गर्व महसूस करते हैं। जो आँसू पहले कभी दुःख के हुआ करते थे, आज वही आंसू खुशी में परिवर्तित थे।