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Samples - Mk
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Beispiel 1
अस्सलाम वालेकुम नाज़रीन, तो कैसे हैं आप सब? तो नाज़रीन, इस क़िस्त में हम देखते हैं शमसा खातून सुल्तान को ख़त लिख रही होती हैं और उन्हें मिस कर रही होती हैं। सुल्तान के लिए वह एक प्यारा सा ख़त लिखती हैं और कुछ प्यार भरी बातें लिखती हैं और उनके लिए कुछ दुआएं करती हैं। इसके बाद हमें सुल्तान का सीन दिखाया जाता है जिसमें क़ाज़ी फाज़िल कहते हैं कबूतर बाज़ बाहिफ़ाज़त अबीलिन पहुंच गया है और जवाब में सुल्तान कहते हैं अब बोरो की बारी है अपना काम करने की। इतनी ही देर में ख़लील ख़बर लेकर आता है और कहता है यह बोरो की तरफ़ से ख़बर आई है। ख़बर में लिखा होता है बालियान आने वाले तेल की घात में है। आतसिज़ बे कहते हैं हमें क़ाफ़िले के साथ कुछ फ़ौजी रवाना करने चाहिए लेकिन सुल्तान मना कर देते हैं और सुल्तान कहते हैं क़ाफ़िला वापस मंगवाओ और कहते हैं हम खाली ड्रम भेजेंगे जिसके पीछे बालियान जाएगा, असली तेल का रुख हम बदल देंगे। नाज़रीन फिर हमें शमसा खातून का सीन दिखाया जाता है जो लिखा हुआ ख़त इस्फ़हानी को देती है और उन्हें सुल्तान तक पहुंचाने का हुक्म देती हैं। दूसरी तरफ़ हमें बोरो का सीन दिखाया जाता है वहां पर कबूतर ख़बर लेकर आता है, बोरो यह ख़बर पढ़ते हैं और कहते हैं तेल को बचाने का इंतज़ाम हो गया है फिर वह यह ख़बर जला देते हैं। फिर बोरो बालियान के पास जाते हैं और कहते हैं चलो आओ तेल तबाह करते हैं। बालियान कहता है तुम इतनी देर कहां थे? बोरो कहता है मैं हमले की तैयारी कर रहा था। बालियान कहता है तुम्हें इतनी देर कहां लग गई? बोरो कहता है तुम्हें क्या मुझ पे भरोसा नहीं है? और फिर बालियान कहता है चलो हमला करने जाते हैं। फिर हमें करक का सीन दिखाया जाता है जिसमें मीला बैठी होती है और वहां पर सिपाही आता है और मीला को आस पास की ख़बर देता है और बताता है बोरो और बालियान आपस में इत्तिहादी बन गए हैं और यह ख़बर सुन कर वह हैरान हो जाती है और कहती है ऐसा कैसे हो सकता है यह नामुमकिन है। इसके बाद हमें आतसिज़ बे का सीन दिखाया जाता है जो पानी वाले ड्रम ले जा रहे होते हैं और आपस में कार्तगन हंसी मज़ाक़ कर रहा होता है लेकिन जो असली तेल होता है वह सुल्तान की मौजूदगी में तैयार हो रहा होता है। सुल्तान क़राकुश से पूछते हैं यह कब तक तैयार हो जाएगा? क़राकुश कहता है मेरे सुल्तान बस थोड़ी देर में यह तैयार हो जाएगा। सुल्तान कहते हैं जल्दी करो जल्दी। इसके बाद हमें सिपाहियों का सीन दिखाया जाता है सिपाही पहाड़ी के ऊपर छुपे होते हैं और आपस में बातें कर रहे होते हैं और कहते हैं बालियान जल्दी आ जाओ। नाज़रीन फिर हमें बालियान का सीन दिखाया जाता है जो सिपाहियों के सामने ही होते हैं और वह अपने सिपाहियों को हिदायत देते हैं जल्दी जल्दी से ड्रम को आग लगानी है और यहां से भाग जाना है। नाज़रीन दूसरी तरफ़ लॉर्ड गाई मौजूद होता है और उसके साथ चतीलियोन भी मौजूद होता है। लॉर्ड गाई अपने सिपाहियों को हुक्म देता है कि जैसे ही बालियान के सिपाही आगे जाएंगे हम हमला करके बोरो को लेकर निकल जाएंगे। चतीलियोन कहता है अगर विलियम ने कुछ करने की कोशिश की तो? कहता है उसे भी मार देंगे। फिर बोरो पानी ले जाने वाले सिपाहियों पर हमला कर देता है जब बोरो सिपाहियों को बेहोश कर देता है बालियान आता है और कहता है मशालें जलाओ और उन्हें तेल को आग लगाने का हुक्म देता है। नाज़रीन फिर अचानक से लॉर्ड गाई सामने आ जाता है। बालियान पूछता है तुम्हें मैंने कहा था ना कि मैं बोरो तुम्हें नहीं दूंगा, क्या लेने आए हो? लॉर्ड गाई कहता है मैंने भी तुम्हें कहा था कि यह बादशाह का हुक्म है यह हर हाल में पूरा करना है। इसके बाद बोरो लॉर्ड गाई पर हमला कर देता है और वह आपस में लड़ने लग जाते हैं। नाज़रीन फिर हमें कुद्स का सीन दिखाया जाता है इसमें शहज़ादी और बादशाह आपस में बातें कर रहे होते हैं। शहज़ादी बादशाह को समझा रही होती है कि बालियान तुम्हारे साथ ग़द्दारी नहीं कर रहा उसकी कोई वजह होगी। बादशाह कहता है मुझे इसकी नेक नियती पर कोई शक नहीं लेकिन उसने ख़ता की है, मैं लॉर्ड गाई का इंतज़ार करूंगा उसके बाद कोई फ़ैसला लूंगा। नाज़रीन फिर हमें वही सीन दिखाया जाता है जिसमें लॉर्ड गाई और बोरो आपस में लड़ रहे होते हैं। बोरो लॉर्ड गाई को नीचे गिरा देता है और उसे क़त्ल करने ही वाला होता है कि बालियान उसे रोक लेता है और बालियान कहता है रुक जाओ। बोरो कहता है मैं तब तक नहीं रुकूंगा जब तक इसके टुकड़े टुकड़े नहीं कर देता। सुल्तान के सिपाही यह सब कुछ देख रहे होते हैं और कहते हैं कि अगर बोरो को कुछ होने लगा तो हम हमला कर देंगे। और इसके बाद बोरो के पास सारा आती है और उसे सुल्तान के वह अल्फ़ाज़ याद करवाती है जिसमें सुल्तान कहते हैं मैं तुम्हें ग़लती सुधारने का आख़िरी मौक़ा दे रहा हूं। और इसके बाद चतीलियोन कहता है हमें बोरो दे दो और इस मामले को यहीं ख़त्म कर दो ज़िद न करो बालियान। इसके बाद बालियान कहता है मैं क़िले वापस जा रहा हूं अगर तुम ने हमला करने की कोशिश की तो मैं तुम्हें क़त्ल करने का हुक्म दे दूंगा। बालियान बोरो को लेकर क़िले वापस जाने लगता है। पीछे से लॉर्ड गाई कहता है तुम इसकी क़ीमत चुकाओगे। यह सब देख कर सुल्तान के सिपाही भी वापस जाने लगते हैं अपना मक़सद पूरा होता हुआ देख के। इसके बाद हमें सुल्तान का सीन दिखाया जाता है जो ताज़िर एलिस को समझा रहे होते हैं कि तेल कहां पर छोड़ना है और क्या करना है इसके साथ और इसके बाद कहते हैं तुम्हें इस चीज़ का मुआवज़ा मिलेगा और हिस्सा भी। ताज़िर एलिस कहते हैं मैं अपना हिस्सा ले चुका हूं और कहते हैं मैंने अपने वक़्त में बहुत कुछ देखा है इसीलिए अब से मैं आपके लिए काम करूंगा हमेशा। फिर इसके बाद हमें बालियान का सीन दिखाया जाता है जो क़िले वापस आ चुके होते हैं। बालियान बोरो से कहता है तुम ने हमेशा अपनी मर्जी की है कभी भी मेरा हुक्म नहीं माना, हर जगह अपनी मर्जी करते हो जब मैंने तुम्हें रोका था हमला करने से तो क्यों किया? और बोरो कहता है मैं तुम्हारा गुलाम नहीं हूं बल्कि मैं तुम्हारा इत्तिहादी हूं, दोबारा अगर ऐसे अल्फ़ाज़ बोले तो मैं यहां से चला जाऊंगा। फिर सारा कहती है तुम हर बार ज़्यादती करते हो बालियान, इसने तुम्हारे लिए क्या क्या नहीं किया और तुम क्या करते हो। इसके बाद वहां पर सिपाही आता है और कहता है सलाहुद्दीन ने रास्ता ढूंढ लिया, इसके बाद वह वहां से चला जाता है। फिर हमें नाज़रीन कुद्स का सीन दिखाया जाता है जिसमें लॉर्ड गाई और चतीलियोन बादशाह के सामने पेश होते हैं। बादशाह पूछता है बोरो कहां है? लॉर्ड गाई कहता है बालियान ने आपका हुक्म नहीं माना उसने बोरो हमें नहीं दिया और इसकी हिफ़ाज़त की है हमसे। बादशाह कहता है वह शख़्स अपने आप को समझता क्या है? फिर हमें सुल्तान का सीन दिखाया जाता है जिसमें सुल्तान के सिपाही सुल्तान को सब कुछ आ कर बता रहे होते हैं जो जो कुछ हुआ है। सुल्तान कहते हैं मेरा भाई एक बदतर सूरत-ए-हाल में फंस गया है और कहते हैं लॉर्ड गाई और चतीलियोन से मैं और बोरो मिल कर हिसाब लेंगे। और वहां पर ताज़िर एलिस आते हैं और कहते हैं मेरे सुल्तान काम हो गया है और वह बताते हैं कि हमारे चार सिपाही शहीद हो गए हैं। सुल्तान इन शहीदों के लिए दुआ करते हैं और सुबह फ़ज्र के वक़्त हमले करने का हुक्म देते हैं। फिर हमें बादशाह का सीन दिखाया जाता है। लॉर्ड गाई कहता है कि अब हम बालियान के भरोसे अबीलिन को अकेला नहीं छोड़ सकते और बादशाह को कहता है हमें फ़ौज वहां जल्दी ले जानी होगी। विलियम और शहज़ादी इस बात की मुख़ालिफ़त करती हैं लेकिन बादशाह कहता है यह मेरा हुक्म है और कहता है इस फ़ौज की कमान लॉर्ड गाई संभालेगा। फिर सारा और बोरो का सीन दिखाया जाता है और बोरो कहता है हमें सुबह सिपाहियों को ज़हर देना होगा और हरकत में आना होगा। इसके बाद हमें कुद्स में विलियम का सीन दिखाया जाता है जिसमें विलियम कहता है लॉर्ड गाई को वह मौक़ा मिल गया जिसके वह इंतज़ार में था और फिर शहज़ादी कहती हैं अगर बालियान ऐसा न करता तो ऐसा न होता। और मारिया कहती है हमें हक़ीक़त की तरफ़ आना होगा हमें अबीलिन की तरफ़ बढ़ने वाली फ़ौज को रोकना होगा। मारिया विलियम को कहती है अगर फ़ौज आपस में लड़ पड़े तो वह अबीलिन तक नहीं पहुंच सकेंगे। विलियम यह करने से इंकार कर देता है, मारिया उसे इसी राज़ की धमकी देती है। और फिर हमें बोरो का सीन दिखाया जाता है जिसमें वह सिपाहियों के लिए खाना लेकर आता है और वह कहता है सिपाहियों खाना खा लो। सिपाही कहते हैं पहरे के दौरान हम खाना नहीं खा सकते। बोरो कहता है यह कैसा क़ानून है कुछ नहीं होता खा लो और फिर सिपाही खाना खाने लग जाते हैं। इसके बाद हमें बालियान और बोरो का सीन दिखाया जाता है, बालियान बोरो से कहता है मैंने तीर अंदाज़ों को कहा है कि वह सलाहुद्दीन की फ़ौज में रुकावट बनें, जल्द ही कुद्स से फ़ौज आने वाली है जो हमारी मदद करेगी। इसके बाद वह वहां से चला जाता है। बोरो कहता है घटिया नस्ल। फिर वह सारा से कहता है यह ख़बर हमें सुल्तान तक पहुंचानी होगी। इसके बाद हम दूसरा सीन देखते हैं जिसमें सुल्तान सिपाहियों को हिदायत दे रहे होते हैं कि कैसे हमला करना है और फिर कहते हैं इंशाअल्लाह हम जल्दी मस्ज़िद-ए-अक़्सा में सज्दा करेंगे। वहां पर ख़लील आता है और सुल्तान को शमसा खातून की तरफ़ से आने वाला ख़त देता है। इसके बाद हमें बोरो का सीन दिखाया जाता है बोरो उस ख़त लिखने वाले आदमी को ढूंढता है लेकिन वह नहीं मिलता। वह खुद ही ख़त लिखने लगता है तो स्याही नीचे गिर जाती है, जब वह स्याही उठाने लगता है तो वह ख़त वाले आदमी को मरा हुआ देखता है। यहां पर इस क़िस्त का इख़्तेताम होता है। नाज़रीन हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें ताकि अगली वीडियो जल्दी ही आप तक पहुंच जाए। मैं रोज़ाना 10 बजे वीडियो अपलोड कर देता हूं। शुक्रिया। क्या आप इस कहानी के किसी और हिस्से के बारे में जानना चाहते हैं?
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Bilal Bilal Edit Model 0 Uses 0 Shares 0 Likes 0 Saved by अगर आपकी पूरी दुनिया एक ही पल में बिखर जाए… अगर आपकी आँखों के सामने आपकी मेहनत, आपका सहारा, आपकी उम्मीद सब राख बन जाए… तो क्या आप फिर भी कह पाएँगे — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी”? यह कहानी है दो दोस्तों की। एक का नाम था बिलाल। दूसरा उसका बचपन का साथी था। दोनों ने साथ खेला, साथ बड़े हुए, साथ कारोबार शुरू किया। लेकिन दोनों की सोच अलग थी। बिलाल की ज़ुबान पर हर वक़्त एक ही जुमला रहता था — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी।” उसका दोस्त अक्सर हँस देता और कहता, “यार बिलाल, हर बात में अल्लाह की रज़ा मत ढूँढा करो। नुकसान, नुकसान होता है। दर्द, दर्द होता है।” बिलाल बस मुस्कुरा देता। उसकी मुस्कुराहट में अजीब सा सुकून होता था। एक रात बाज़ार में अचानक आग लग गई। पहले धुआँ उठा, फिर लपटें आसमान को छूने लगीं। लोग चीख रहे थे, भाग रहे थे, पानी फेंक रहे थे, लेकिन आग किसी की नहीं सुन रही थी। उसी बाज़ार में बिलाल की छोटी सी दुकान भी थी। कुछ ही मिनटों में उसकी सालों की मेहनत जलकर राख हो गई। लोग उसके पास आए, कोई अफसोस कर रहा था, कोई सिर पकड़कर बैठ गया। उसका दोस्त दौड़ता हुआ आया, जलती हुई दुकान को देखा और गुस्से में बोला, “सब खत्म हो गया बिलाल! अब क्या करोगे? अब भी कहोगे कि अल्लाह राज़ी है?” कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। बिलाल ने राख बन चुकी दुकान को देखा। उसकी आँखों में आँसू थे, मगर चेहरे पर शिकवा नहीं था। उसने गहरी साँस ली और धीमी आवाज़ में कहा, “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” दोस्त झुंझला गया। “यह कैसी बातें करते हो? मेहनत तुम्हारी जली है, नुकसान तुम्हारा हुआ है!” बिलाल ने बस इतना कहा, “शायद मेरे रब को इससे बेहतर कुछ देना हो।” वक़्त गुज़रा। बिलाल ने फिर से छोटी सी जगह किराए पर ली और नया काम शुरू कर दिया। कमाई कम थी, मुश्किलें ज़्यादा थीं, मगर उसके चेहरे पर वही सुकून था। फिर एक और इम्तिहान आया। उसका इकलौता बेटा अचानक बहुत बीमार पड़ गया। तेज़ बुखार, फिर हालत बिगड़ती गई। अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जाँच के बाद कहा, “हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालत नाज़ुक है। दुआ कीजिए।” उसका दोस्त बाहर बेचैनी से टहल रहा था। उसने बिलाल से कहा, “देखो बिलाल, हर चीज़ में अल्लाह की रज़ा नहीं होती। यह बहुत बड़ा दुख है। इंसान टूट जाता है ऐसे वक्त में।” बिलाल ने अपने बेटे का हाथ पकड़ा, उसकी ठंडी उँगलियों को सहलाया और आसमान की तरफ देखा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, मगर आवाज़ में अजीब सा यक़ीन था। उसने कहा, “या अल्लाह, अगर तू राज़ी है तो मैं भी राज़ी। मेरे दिल को सब्र दे।” वह पूरी रात अस्पताल की कुर्सी पर बैठा रहा। कभी दुआ करता, कभी बेटे के माथे पर हाथ रखता। उसके दोस्त की आँखों में डर था, गुस्सा था, सवाल थे। बिलाल की आँखों में दर्द था, लेकिन शिकायत नहीं थी। सुबह फ़ज्र के करीब डॉक्टर तेज़ कदमों से कमरे में आया। उसके चेहरे पर हैरानी थी। उसने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी, लेकिन बच्चे की हालत अचानक संभल रही है। रिस्पॉन्स बेहतर है। यह बहुत अच्छा संकेत है।” दोस्त हैरान रह गया। बिलाल की आँखें भर आईं। वह चुपचाप झुका और सज्दे में चला गया। उसके होंठों पर बस यही था, “तूने मेरी रज़ा को खाली नहीं जाने दिया, मेरे रब।” दिन बीतते गए। बिलाल ने मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। लोग उसकी ईमानदारी की कद्र करने लगे। उसका कारोबार फिर खड़ा हो गया, बल्कि पहले से बेहतर हो गया। दूसरी तरफ उसका दोस्त तेजी से तरक्की कर रहा था, बड़े सौदे कर रहा था, पैसे कमा रहा था, लेकिन उसके दिल में सुकून नहीं था। हर छोटी बात पर गुस्सा, हर मुश्किल पर शिकायत। फिर एक दिन उसके दोस्त को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। एक बड़ी डील आखिरी वक्त पर रद्द हो गई। करोड़ों का घाटा। वह टूट गया। उसने गुस्से में कहा, “या अल्लाह, मेरे साथ ही क्यों? मैंने क्या बिगाड़ा है?” उसी रात उसे बिलाल की बातें याद आईं — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी…” कुछ समय बाद बिलाल शहर के सम्मानित व्यापारियों में गिना जाने लगा। लोग उससे सलाह लेने आते। एक दिन उसका वही दोस्त, थका हुआ, टूटा हुआ, उसके दफ्तर में आया। उसकी आँखों में नमी थी। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “मैं हार गया बिलाल। मैं हर वक्त शिकायत करता रहा। जब थोड़ा नुकसान हुआ तो मैं गुस्सा हो गया। जब फायदा हुआ तो घमंड आ गया। तुम हर हाल में कहते रहे कि अल्लाह राज़ी… और शायद इसी वजह से अल्लाह तुमसे राज़ी हो गया।” बिलाल ने उसका कंधा थामा। उसकी आवाज़ नरम थी, मगर बात गहरी थी। उसने कहा, “जब इंसान अल्लाह की मर्ज़ी पर आमीन कह देता है, तो अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ता। नुकसान भी उसकी तरफ से इम्तिहान होता है, और कामयाबी भी।” उसका दोस्त रो पड़ा। “क्या अब भी देर नहीं हुई?” बिलाल ने मुस्कुराकर कहा, “जब तक साँस है, देर नहीं होती।” आज भी जब लोग बिलाल से उसकी कामयाबी का राज़ पूछते हैं, तो वह बस इतना कहता है, “मैंने कभी अल्लाह से सवाल नहीं किया कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ। मैंने बस हर हाल में कहा — जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी। और शायद उसी दिन से मेरी तक़दीर बदलनी शुरू हो गई थी।” याद रखिए… नुकसान वक्ती होता है, लेकिन सब्र हमेशा रंग लाता है। जो इंसान अल्लाह की रज़ा में राज़ी हो जाता है, अल्लाह उसे वहाँ पहुँचा देता है जहाँ वह खुद सोच भी नहीं सकता। जब ज़िंदगी आपको तोड़ने लगे, जब हालात आपके खिलाफ हो जाएँ, तब बस दिल से कहिए — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” शायद उसी पल से आपकी कहानी बदलनी शुरू हो जाए।
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في عصر الظلام هذا، تتحدث الأرواح عن مصير لم يكتب بعد. القوة وحدها هي التي تحكم، والحكمة تختبئ في الظلال. من يملك الشجاعة للوقوف في وجه العاصفة القادمة؟
Sample Transcriptions
Default Sample - Beispiel 1
अस्सलाम वालेकुम नाज़रीन, तो कैसे हैं आप सब? तो नाज़रीन, इस क़िस्त में हम देखते हैं शमसा खातून सुल्तान को ख़त लिख रही होती हैं और उन्हें मिस कर रही होती हैं। सुल्तान के लिए वह एक प्यारा सा ख़त लिखती हैं और कुछ प्यार भरी बातें लिखती हैं और उनके लिए कुछ दुआएं करती हैं। इसके बाद हमें सुल्तान का सीन दिखाया जाता है जिसमें क़ाज़ी फाज़िल कहते हैं कबूतर बाज़ बाहिफ़ाज़त अबीलिन पहुंच गया है और जवाब में सुल्तान कहते हैं अब बोरो की बारी है अपना काम करने की। इतनी ही देर में ख़लील ख़बर लेकर आता है और कहता है यह बोरो की तरफ़ से ख़बर आई है। ख़बर में लिखा होता है बालियान आने वाले तेल की घात में है। आतसिज़ बे कहते हैं हमें क़ाफ़िले के साथ कुछ फ़ौजी रवाना करने चाहिए लेकिन सुल्तान मना कर देते हैं और सुल्तान कहते हैं क़ाफ़िला वापस मंगवाओ और कहते हैं हम खाली ड्रम भेजेंगे जिसके पीछे बालियान जाएगा, असली तेल का रुख हम बदल देंगे। नाज़रीन फिर हमें शमसा खातून का सीन दिखाया जाता है जो लिखा हुआ ख़त इस्फ़हानी को देती है और उन्हें सुल्तान तक पहुंचाने का हुक्म देती हैं। दूसरी तरफ़ हमें बोरो का सीन दिखाया जाता है वहां पर कबूतर ख़बर लेकर आता है, बोरो यह ख़बर पढ़ते हैं और कहते हैं तेल को बचाने का इंतज़ाम हो गया है फिर वह यह ख़बर जला देते हैं। फिर बोरो बालियान के पास जाते हैं और कहते हैं चलो आओ तेल तबाह करते हैं। बालियान कहता है तुम इतनी देर कहां थे? बोरो कहता है मैं हमले की तैयारी कर रहा था। बालियान कहता है तुम्हें इतनी देर कहां लग गई? बोरो कहता है तुम्हें क्या मुझ पे भरोसा नहीं है? और फिर बालियान कहता है चलो हमला करने जाते हैं। फिर हमें करक का सीन दिखाया जाता है जिसमें मीला बैठी होती है और वहां पर सिपाही आता है और मीला को आस पास की ख़बर देता है और बताता है बोरो और बालियान आपस में इत्तिहादी बन गए हैं और यह ख़बर सुन कर वह हैरान हो जाती है और कहती है ऐसा कैसे हो सकता है यह नामुमकिन है। इसके बाद हमें आतसिज़ बे का सीन दिखाया जाता है जो पानी वाले ड्रम ले जा रहे होते हैं और आपस में कार्तगन हंसी मज़ाक़ कर रहा होता है लेकिन जो असली तेल होता है वह सुल्तान की मौजूदगी में तैयार हो रहा होता है। सुल्तान क़राकुश से पूछते हैं यह कब तक तैयार हो जाएगा? क़राकुश कहता है मेरे सुल्तान बस थोड़ी देर में यह तैयार हो जाएगा। सुल्तान कहते हैं जल्दी करो जल्दी। इसके बाद हमें सिपाहियों का सीन दिखाया जाता है सिपाही पहाड़ी के ऊपर छुपे होते हैं और आपस में बातें कर रहे होते हैं और कहते हैं बालियान जल्दी आ जाओ। नाज़रीन फिर हमें बालियान का सीन दिखाया जाता है जो सिपाहियों के सामने ही होते हैं और वह अपने सिपाहियों को हिदायत देते हैं जल्दी जल्दी से ड्रम को आग लगानी है और यहां से भाग जाना है। नाज़रीन दूसरी तरफ़ लॉर्ड गाई मौजूद होता है और उसके साथ चतीलियोन भी मौजूद होता है। लॉर्ड गाई अपने सिपाहियों को हुक्म देता है कि जैसे ही बालियान के सिपाही आगे जाएंगे हम हमला करके बोरो को लेकर निकल जाएंगे। चतीलियोन कहता है अगर विलियम ने कुछ करने की कोशिश की तो? कहता है उसे भी मार देंगे। फिर बोरो पानी ले जाने वाले सिपाहियों पर हमला कर देता है जब बोरो सिपाहियों को बेहोश कर देता है बालियान आता है और कहता है मशालें जलाओ और उन्हें तेल को आग लगाने का हुक्म देता है। नाज़रीन फिर अचानक से लॉर्ड गाई सामने आ जाता है। बालियान पूछता है तुम्हें मैंने कहा था ना कि मैं बोरो तुम्हें नहीं दूंगा, क्या लेने आए हो? लॉर्ड गाई कहता है मैंने भी तुम्हें कहा था कि यह बादशाह का हुक्म है यह हर हाल में पूरा करना है। इसके बाद बोरो लॉर्ड गाई पर हमला कर देता है और वह आपस में लड़ने लग जाते हैं। नाज़रीन फिर हमें कुद्स का सीन दिखाया जाता है इसमें शहज़ादी और बादशाह आपस में बातें कर रहे होते हैं। शहज़ादी बादशाह को समझा रही होती है कि बालियान तुम्हारे साथ ग़द्दारी नहीं कर रहा उसकी कोई वजह होगी। बादशाह कहता है मुझे इसकी नेक नियती पर कोई शक नहीं लेकिन उसने ख़ता की है, मैं लॉर्ड गाई का इंतज़ार करूंगा उसके बाद कोई फ़ैसला लूंगा। नाज़रीन फिर हमें वही सीन दिखाया जाता है जिसमें लॉर्ड गाई और बोरो आपस में लड़ रहे होते हैं। बोरो लॉर्ड गाई को नीचे गिरा देता है और उसे क़त्ल करने ही वाला होता है कि बालियान उसे रोक लेता है और बालियान कहता है रुक जाओ। बोरो कहता है मैं तब तक नहीं रुकूंगा जब तक इसके टुकड़े टुकड़े नहीं कर देता। सुल्तान के सिपाही यह सब कुछ देख रहे होते हैं और कहते हैं कि अगर बोरो को कुछ होने लगा तो हम हमला कर देंगे। और इसके बाद बोरो के पास सारा आती है और उसे सुल्तान के वह अल्फ़ाज़ याद करवाती है जिसमें सुल्तान कहते हैं मैं तुम्हें ग़लती सुधारने का आख़िरी मौक़ा दे रहा हूं। और इसके बाद चतीलियोन कहता है हमें बोरो दे दो और इस मामले को यहीं ख़त्म कर दो ज़िद न करो बालियान। इसके बाद बालियान कहता है मैं क़िले वापस जा रहा हूं अगर तुम ने हमला करने की कोशिश की तो मैं तुम्हें क़त्ल करने का हुक्म दे दूंगा। बालियान बोरो को लेकर क़िले वापस जाने लगता है। पीछे से लॉर्ड गाई कहता है तुम इसकी क़ीमत चुकाओगे। यह सब देख कर सुल्तान के सिपाही भी वापस जाने लगते हैं अपना मक़सद पूरा होता हुआ देख के। इसके बाद हमें सुल्तान का सीन दिखाया जाता है जो ताज़िर एलिस को समझा रहे होते हैं कि तेल कहां पर छोड़ना है और क्या करना है इसके साथ और इसके बाद कहते हैं तुम्हें इस चीज़ का मुआवज़ा मिलेगा और हिस्सा भी। ताज़िर एलिस कहते हैं मैं अपना हिस्सा ले चुका हूं और कहते हैं मैंने अपने वक़्त में बहुत कुछ देखा है इसीलिए अब से मैं आपके लिए काम करूंगा हमेशा। फिर इसके बाद हमें बालियान का सीन दिखाया जाता है जो क़िले वापस आ चुके होते हैं। बालियान बोरो से कहता है तुम ने हमेशा अपनी मर्जी की है कभी भी मेरा हुक्म नहीं माना, हर जगह अपनी मर्जी करते हो जब मैंने तुम्हें रोका था हमला करने से तो क्यों किया? और बोरो कहता है मैं तुम्हारा गुलाम नहीं हूं बल्कि मैं तुम्हारा इत्तिहादी हूं, दोबारा अगर ऐसे अल्फ़ाज़ बोले तो मैं यहां से चला जाऊंगा। फिर सारा कहती है तुम हर बार ज़्यादती करते हो बालियान, इसने तुम्हारे लिए क्या क्या नहीं किया और तुम क्या करते हो। इसके बाद वहां पर सिपाही आता है और कहता है सलाहुद्दीन ने रास्ता ढूंढ लिया, इसके बाद वह वहां से चला जाता है। फिर हमें नाज़रीन कुद्स का सीन दिखाया जाता है जिसमें लॉर्ड गाई और चतीलियोन बादशाह के सामने पेश होते हैं। बादशाह पूछता है बोरो कहां है? लॉर्ड गाई कहता है बालियान ने आपका हुक्म नहीं माना उसने बोरो हमें नहीं दिया और इसकी हिफ़ाज़त की है हमसे। बादशाह कहता है वह शख़्स अपने आप को समझता क्या है? फिर हमें सुल्तान का सीन दिखाया जाता है जिसमें सुल्तान के सिपाही सुल्तान को सब कुछ आ कर बता रहे होते हैं जो जो कुछ हुआ है। सुल्तान कहते हैं मेरा भाई एक बदतर सूरत-ए-हाल में फंस गया है और कहते हैं लॉर्ड गाई और चतीलियोन से मैं और बोरो मिल कर हिसाब लेंगे। और वहां पर ताज़िर एलिस आते हैं और कहते हैं मेरे सुल्तान काम हो गया है और वह बताते हैं कि हमारे चार सिपाही शहीद हो गए हैं। सुल्तान इन शहीदों के लिए दुआ करते हैं और सुबह फ़ज्र के वक़्त हमले करने का हुक्म देते हैं। फिर हमें बादशाह का सीन दिखाया जाता है। लॉर्ड गाई कहता है कि अब हम बालियान के भरोसे अबीलिन को अकेला नहीं छोड़ सकते और बादशाह को कहता है हमें फ़ौज वहां जल्दी ले जानी होगी। विलियम और शहज़ादी इस बात की मुख़ालिफ़त करती हैं लेकिन बादशाह कहता है यह मेरा हुक्म है और कहता है इस फ़ौज की कमान लॉर्ड गाई संभालेगा। फिर सारा और बोरो का सीन दिखाया जाता है और बोरो कहता है हमें सुबह सिपाहियों को ज़हर देना होगा और हरकत में आना होगा। इसके बाद हमें कुद्स में विलियम का सीन दिखाया जाता है जिसमें विलियम कहता है लॉर्ड गाई को वह मौक़ा मिल गया जिसके वह इंतज़ार में था और फिर शहज़ादी कहती हैं अगर बालियान ऐसा न करता तो ऐसा न होता। और मारिया कहती है हमें हक़ीक़त की तरफ़ आना होगा हमें अबीलिन की तरफ़ बढ़ने वाली फ़ौज को रोकना होगा। मारिया विलियम को कहती है अगर फ़ौज आपस में लड़ पड़े तो वह अबीलिन तक नहीं पहुंच सकेंगे। विलियम यह करने से इंकार कर देता है, मारिया उसे इसी राज़ की धमकी देती है। और फिर हमें बोरो का सीन दिखाया जाता है जिसमें वह सिपाहियों के लिए खाना लेकर आता है और वह कहता है सिपाहियों खाना खा लो। सिपाही कहते हैं पहरे के दौरान हम खाना नहीं खा सकते। बोरो कहता है यह कैसा क़ानून है कुछ नहीं होता खा लो और फिर सिपाही खाना खाने लग जाते हैं। इसके बाद हमें बालियान और बोरो का सीन दिखाया जाता है, बालियान बोरो से कहता है मैंने तीर अंदाज़ों को कहा है कि वह सलाहुद्दीन की फ़ौज में रुकावट बनें, जल्द ही कुद्स से फ़ौज आने वाली है जो हमारी मदद करेगी। इसके बाद वह वहां से चला जाता है। बोरो कहता है घटिया नस्ल। फिर वह सारा से कहता है यह ख़बर हमें सुल्तान तक पहुंचानी होगी। इसके बाद हम दूसरा सीन देखते हैं जिसमें सुल्तान सिपाहियों को हिदायत दे रहे होते हैं कि कैसे हमला करना है और फिर कहते हैं इंशाअल्लाह हम जल्दी मस्ज़िद-ए-अक़्सा में सज्दा करेंगे। वहां पर ख़लील आता है और सुल्तान को शमसा खातून की तरफ़ से आने वाला ख़त देता है। इसके बाद हमें बोरो का सीन दिखाया जाता है बोरो उस ख़त लिखने वाले आदमी को ढूंढता है लेकिन वह नहीं मिलता। वह खुद ही ख़त लिखने लगता है तो स्याही नीचे गिर जाती है, जब वह स्याही उठाने लगता है तो वह ख़त वाले आदमी को मरा हुआ देखता है। यहां पर इस क़िस्त का इख़्तेताम होता है। नाज़रीन हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें ताकि अगली वीडियो जल्दी ही आप तक पहुंच जाए। मैं रोज़ाना 10 बजे वीडियो अपलोड कर देता हूं। शुक्रिया। क्या आप इस कहानी के किसी और हिस्से के बारे में जानना चाहते हैं?
Default Sample - Bilal
Bilal Bilal Edit Model 0 Uses 0 Shares 0 Likes 0 Saved by अगर आपकी पूरी दुनिया एक ही पल में बिखर जाए… अगर आपकी आँखों के सामने आपकी मेहनत, आपका सहारा, आपकी उम्मीद सब राख बन जाए… तो क्या आप फिर भी कह पाएँगे — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी”? यह कहानी है दो दोस्तों की। एक का नाम था बिलाल। दूसरा उसका बचपन का साथी था। दोनों ने साथ खेला, साथ बड़े हुए, साथ कारोबार शुरू किया। लेकिन दोनों की सोच अलग थी। बिलाल की ज़ुबान पर हर वक़्त एक ही जुमला रहता था — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी।” उसका दोस्त अक्सर हँस देता और कहता, “यार बिलाल, हर बात में अल्लाह की रज़ा मत ढूँढा करो। नुकसान, नुकसान होता है। दर्द, दर्द होता है।” बिलाल बस मुस्कुरा देता। उसकी मुस्कुराहट में अजीब सा सुकून होता था। एक रात बाज़ार में अचानक आग लग गई। पहले धुआँ उठा, फिर लपटें आसमान को छूने लगीं। लोग चीख रहे थे, भाग रहे थे, पानी फेंक रहे थे, लेकिन आग किसी की नहीं सुन रही थी। उसी बाज़ार में बिलाल की छोटी सी दुकान भी थी। कुछ ही मिनटों में उसकी सालों की मेहनत जलकर राख हो गई। लोग उसके पास आए, कोई अफसोस कर रहा था, कोई सिर पकड़कर बैठ गया। उसका दोस्त दौड़ता हुआ आया, जलती हुई दुकान को देखा और गुस्से में बोला, “सब खत्म हो गया बिलाल! अब क्या करोगे? अब भी कहोगे कि अल्लाह राज़ी है?” कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। बिलाल ने राख बन चुकी दुकान को देखा। उसकी आँखों में आँसू थे, मगर चेहरे पर शिकवा नहीं था। उसने गहरी साँस ली और धीमी आवाज़ में कहा, “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” दोस्त झुंझला गया। “यह कैसी बातें करते हो? मेहनत तुम्हारी जली है, नुकसान तुम्हारा हुआ है!” बिलाल ने बस इतना कहा, “शायद मेरे रब को इससे बेहतर कुछ देना हो।” वक़्त गुज़रा। बिलाल ने फिर से छोटी सी जगह किराए पर ली और नया काम शुरू कर दिया। कमाई कम थी, मुश्किलें ज़्यादा थीं, मगर उसके चेहरे पर वही सुकून था। फिर एक और इम्तिहान आया। उसका इकलौता बेटा अचानक बहुत बीमार पड़ गया। तेज़ बुखार, फिर हालत बिगड़ती गई। अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जाँच के बाद कहा, “हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालत नाज़ुक है। दुआ कीजिए।” उसका दोस्त बाहर बेचैनी से टहल रहा था। उसने बिलाल से कहा, “देखो बिलाल, हर चीज़ में अल्लाह की रज़ा नहीं होती। यह बहुत बड़ा दुख है। इंसान टूट जाता है ऐसे वक्त में।” बिलाल ने अपने बेटे का हाथ पकड़ा, उसकी ठंडी उँगलियों को सहलाया और आसमान की तरफ देखा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, मगर आवाज़ में अजीब सा यक़ीन था। उसने कहा, “या अल्लाह, अगर तू राज़ी है तो मैं भी राज़ी। मेरे दिल को सब्र दे।” वह पूरी रात अस्पताल की कुर्सी पर बैठा रहा। कभी दुआ करता, कभी बेटे के माथे पर हाथ रखता। उसके दोस्त की आँखों में डर था, गुस्सा था, सवाल थे। बिलाल की आँखों में दर्द था, लेकिन शिकायत नहीं थी। सुबह फ़ज्र के करीब डॉक्टर तेज़ कदमों से कमरे में आया। उसके चेहरे पर हैरानी थी। उसने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी, लेकिन बच्चे की हालत अचानक संभल रही है। रिस्पॉन्स बेहतर है। यह बहुत अच्छा संकेत है।” दोस्त हैरान रह गया। बिलाल की आँखें भर आईं। वह चुपचाप झुका और सज्दे में चला गया। उसके होंठों पर बस यही था, “तूने मेरी रज़ा को खाली नहीं जाने दिया, मेरे रब।” दिन बीतते गए। बिलाल ने मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। लोग उसकी ईमानदारी की कद्र करने लगे। उसका कारोबार फिर खड़ा हो गया, बल्कि पहले से बेहतर हो गया। दूसरी तरफ उसका दोस्त तेजी से तरक्की कर रहा था, बड़े सौदे कर रहा था, पैसे कमा रहा था, लेकिन उसके दिल में सुकून नहीं था। हर छोटी बात पर गुस्सा, हर मुश्किल पर शिकायत। फिर एक दिन उसके दोस्त को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। एक बड़ी डील आखिरी वक्त पर रद्द हो गई। करोड़ों का घाटा। वह टूट गया। उसने गुस्से में कहा, “या अल्लाह, मेरे साथ ही क्यों? मैंने क्या बिगाड़ा है?” उसी रात उसे बिलाल की बातें याद आईं — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी…” कुछ समय बाद बिलाल शहर के सम्मानित व्यापारियों में गिना जाने लगा। लोग उससे सलाह लेने आते। एक दिन उसका वही दोस्त, थका हुआ, टूटा हुआ, उसके दफ्तर में आया। उसकी आँखों में नमी थी। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “मैं हार गया बिलाल। मैं हर वक्त शिकायत करता रहा। जब थोड़ा नुकसान हुआ तो मैं गुस्सा हो गया। जब फायदा हुआ तो घमंड आ गया। तुम हर हाल में कहते रहे कि अल्लाह राज़ी… और शायद इसी वजह से अल्लाह तुमसे राज़ी हो गया।” बिलाल ने उसका कंधा थामा। उसकी आवाज़ नरम थी, मगर बात गहरी थी। उसने कहा, “जब इंसान अल्लाह की मर्ज़ी पर आमीन कह देता है, तो अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ता। नुकसान भी उसकी तरफ से इम्तिहान होता है, और कामयाबी भी।” उसका दोस्त रो पड़ा। “क्या अब भी देर नहीं हुई?” बिलाल ने मुस्कुराकर कहा, “जब तक साँस है, देर नहीं होती।” आज भी जब लोग बिलाल से उसकी कामयाबी का राज़ पूछते हैं, तो वह बस इतना कहता है, “मैंने कभी अल्लाह से सवाल नहीं किया कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ। मैंने बस हर हाल में कहा — जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी। और शायद उसी दिन से मेरी तक़दीर बदलनी शुरू हो गई थी।” याद रखिए… नुकसान वक्ती होता है, लेकिन सब्र हमेशा रंग लाता है। जो इंसान अल्लाह की रज़ा में राज़ी हो जाता है, अल्लाह उसे वहाँ पहुँचा देता है जहाँ वह खुद सोच भी नहीं सकता। जब ज़िंदगी आपको तोड़ने लगे, जब हालात आपके खिलाफ हो जाएँ, तब बस दिल से कहिए — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” शायद उसी पल से आपकी कहानी बदलनी शुरू हो जाए।
Default Sample - ناني
في عصر الظلام هذا، تتحدث الأرواح عن مصير لم يكتب بعد. القوة وحدها هي التي تحكم، والحكمة تختبئ في الظلال. من يملك الشجاعة للوقوف في وجه العاصفة القادمة؟
Default Sample - story
اس ویران بستی کی گلیوں میں جہاں خواب حسرتوں کی چادر اوڑھ کر سو جاتے ہیں، ہر موڑ پر ایک ان کہی کہانی دفن ہے۔ آؤ آج ہم ان ٹوٹے ہوئے دلوں کا رخ کریں جہاں سچائی کڑوی ہے اور حقیقت کسی ڈراؤنے خواب سے کم نہیں ہے۔
Default Sample - 250
حِيلة إبليس… قصة صراع أبدية بين الإنسان والشيطان… حكاية تكشف لك أن أخطر حيلة… أن تظن أنك بأمان."
Default Sample - بتاع انمي نسخ
السلام عليكم ورحمة الله وبركاته، واهلا وسهلا بيكم، مستغربين صح؟ لا داعي للاستغراب يا صديقي
Default Sample - Abdul hannan
میرے بھائیو! اپنی زندگیوں میں اللہ کو یاد رکھو۔ جب تم اپنے بچوں کو سجدوں کا عادی بناؤ گے اور رزقِ حلال کھلاؤ گے، تو تمہارے گھروں میں وہ نور آئے گا جو نسلیں سنوار دیتا ہے۔ آج ہی عہد کرو کہ برائی کا راستہ چھوڑ کر اپنے رب کی طرف پلٹ آؤ گے، کیونکہ کامیابی صرف ایمان میں ہے۔
Default Sample - Part 01
Why not ??he should also know what his sister is doing right ? That bitch should be punished
Default Sample - احمد يونس
تعرف إيه اللي حصل في المتحف المصري سنة 1922؟ اسمع كده. المومياء دي كان ليها سر غريب. كل ما حد يقرب منها، يسمع موسيقى قديمة بتطلع من مكان مجهول. الحراس كانوا بيسمعوها كل ليلة. غريبة صح؟ طيب تعالى أحكيلك التفاصيل.
Default Sample - محمد دياب
الحمد لله الذي هدانا إلى الصراط المستقيم، وجعل في قلوبنا نوراً من الإيمان. فيا أيها الناس، اتقوا ربكم واعملوا صالحاً، فإن في ذلك فلاحاً عظيماً ونجاةً من العذاب الأليم.
Default Sample - السلطانه حليمه
وقفنا مع بعض وما خفنا، لأنه القوة بالوحدة والإيمان. لما نكون إيد وحدة ما حدا يقدر علينا. شوفي كيف صرنا أقوى لما اتحدنا؟ هاد الشيء اللي دايماً بحكي عنه، القوة بالجماعة وبالإرادة.
Default Sample - س
شفت امبارح في السوق ناس جايين من بعيد، واحد طويل وواحد قصير، الطويل ماشي قدام والقصير وراهو، دخلوا المحل وطلعوا بعد شوية حاملين شنط كبيرة
Default Sample - لونكس
في كل ليلة تهمس لي النجوم أسرار الكون العظيم. أحمل على كتفي مسؤولية حماية التوازن الكوني، وبقوة الميزان سأواصل طريقي. فالظلام لن يدوم طالما تشع أنوار العدالة في قلبي.
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