Generador de Voz AI Try4 por Fish Audio
Genera la voz Try4, usada 2 veces con 0 me gusta. Crea discursos high-quality con texto a voz de IA.
Muestras - Try4
Escucha muestras de generación que muestran la calidad y versatilidad de la voz
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Muestra 1
আমাদের চোখের সামনে মানবতা মরছে, কিন্তু কেউ দেখতে পাচ্ছে না। প্রতিদিন শিশুরা মারা যাচ্ছে, মায়েরা কাঁদছে, আর আমরা শুধু দেখছি। এই নীরবতা কি আমাদের মানবিকতার শেষ সীমা?
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Imaginez la scène, mes amis. Nous sommes à Athènes, au Ve siècle avant notre ère. Socrate marche dans l'agora, entouré de ses disciples. Un sage parmi les marchands, un philosophe parmi les citoyens. Il pose une simple question qui ébranle les certitudes : "Que savons-nous vraiment ?"
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Bilal Bilal Edit Model 0 Uses 0 Shares 0 Likes 0 Saved by अगर आपकी पूरी दुनिया एक ही पल में बिखर जाए… अगर आपकी आँखों के सामने आपकी मेहनत, आपका सहारा, आपकी उम्मीद सब राख बन जाए… तो क्या आप फिर भी कह पाएँगे — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी”? यह कहानी है दो दोस्तों की। एक का नाम था बिलाल। दूसरा उसका बचपन का साथी था। दोनों ने साथ खेला, साथ बड़े हुए, साथ कारोबार शुरू किया। लेकिन दोनों की सोच अलग थी। बिलाल की ज़ुबान पर हर वक़्त एक ही जुमला रहता था — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी।” उसका दोस्त अक्सर हँस देता और कहता, “यार बिलाल, हर बात में अल्लाह की रज़ा मत ढूँढा करो। नुकसान, नुकसान होता है। दर्द, दर्द होता है।” बिलाल बस मुस्कुरा देता। उसकी मुस्कुराहट में अजीब सा सुकून होता था। एक रात बाज़ार में अचानक आग लग गई। पहले धुआँ उठा, फिर लपटें आसमान को छूने लगीं। लोग चीख रहे थे, भाग रहे थे, पानी फेंक रहे थे, लेकिन आग किसी की नहीं सुन रही थी। उसी बाज़ार में बिलाल की छोटी सी दुकान भी थी। कुछ ही मिनटों में उसकी सालों की मेहनत जलकर राख हो गई। लोग उसके पास आए, कोई अफसोस कर रहा था, कोई सिर पकड़कर बैठ गया। उसका दोस्त दौड़ता हुआ आया, जलती हुई दुकान को देखा और गुस्से में बोला, “सब खत्म हो गया बिलाल! अब क्या करोगे? अब भी कहोगे कि अल्लाह राज़ी है?” कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। बिलाल ने राख बन चुकी दुकान को देखा। उसकी आँखों में आँसू थे, मगर चेहरे पर शिकवा नहीं था। उसने गहरी साँस ली और धीमी आवाज़ में कहा, “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” दोस्त झुंझला गया। “यह कैसी बातें करते हो? मेहनत तुम्हारी जली है, नुकसान तुम्हारा हुआ है!” बिलाल ने बस इतना कहा, “शायद मेरे रब को इससे बेहतर कुछ देना हो।” वक़्त गुज़रा। बिलाल ने फिर से छोटी सी जगह किराए पर ली और नया काम शुरू कर दिया। कमाई कम थी, मुश्किलें ज़्यादा थीं, मगर उसके चेहरे पर वही सुकून था। फिर एक और इम्तिहान आया। उसका इकलौता बेटा अचानक बहुत बीमार पड़ गया। तेज़ बुखार, फिर हालत बिगड़ती गई। अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जाँच के बाद कहा, “हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालत नाज़ुक है। दुआ कीजिए।” उसका दोस्त बाहर बेचैनी से टहल रहा था। उसने बिलाल से कहा, “देखो बिलाल, हर चीज़ में अल्लाह की रज़ा नहीं होती। यह बहुत बड़ा दुख है। इंसान टूट जाता है ऐसे वक्त में।” बिलाल ने अपने बेटे का हाथ पकड़ा, उसकी ठंडी उँगलियों को सहलाया और आसमान की तरफ देखा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, मगर आवाज़ में अजीब सा यक़ीन था। उसने कहा, “या अल्लाह, अगर तू राज़ी है तो मैं भी राज़ी। मेरे दिल को सब्र दे।” वह पूरी रात अस्पताल की कुर्सी पर बैठा रहा। कभी दुआ करता, कभी बेटे के माथे पर हाथ रखता। उसके दोस्त की आँखों में डर था, गुस्सा था, सवाल थे। बिलाल की आँखों में दर्द था, लेकिन शिकायत नहीं थी। सुबह फ़ज्र के करीब डॉक्टर तेज़ कदमों से कमरे में आया। उसके चेहरे पर हैरानी थी। उसने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी, लेकिन बच्चे की हालत अचानक संभल रही है। रिस्पॉन्स बेहतर है। यह बहुत अच्छा संकेत है।” दोस्त हैरान रह गया। बिलाल की आँखें भर आईं। वह चुपचाप झुका और सज्दे में चला गया। उसके होंठों पर बस यही था, “तूने मेरी रज़ा को खाली नहीं जाने दिया, मेरे रब।” दिन बीतते गए। बिलाल ने मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। लोग उसकी ईमानदारी की कद्र करने लगे। उसका कारोबार फिर खड़ा हो गया, बल्कि पहले से बेहतर हो गया। दूसरी तरफ उसका दोस्त तेजी से तरक्की कर रहा था, बड़े सौदे कर रहा था, पैसे कमा रहा था, लेकिन उसके दिल में सुकून नहीं था। हर छोटी बात पर गुस्सा, हर मुश्किल पर शिकायत। फिर एक दिन उसके दोस्त को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। एक बड़ी डील आखिरी वक्त पर रद्द हो गई। करोड़ों का घाटा। वह टूट गया। उसने गुस्से में कहा, “या अल्लाह, मेरे साथ ही क्यों? मैंने क्या बिगाड़ा है?” उसी रात उसे बिलाल की बातें याद आईं — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी…” कुछ समय बाद बिलाल शहर के सम्मानित व्यापारियों में गिना जाने लगा। लोग उससे सलाह लेने आते। एक दिन उसका वही दोस्त, थका हुआ, टूटा हुआ, उसके दफ्तर में आया। उसकी आँखों में नमी थी। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “मैं हार गया बिलाल। मैं हर वक्त शिकायत करता रहा। जब थोड़ा नुकसान हुआ तो मैं गुस्सा हो गया। जब फायदा हुआ तो घमंड आ गया। तुम हर हाल में कहते रहे कि अल्लाह राज़ी… और शायद इसी वजह से अल्लाह तुमसे राज़ी हो गया।” बिलाल ने उसका कंधा थामा। उसकी आवाज़ नरम थी, मगर बात गहरी थी। उसने कहा, “जब इंसान अल्लाह की मर्ज़ी पर आमीन कह देता है, तो अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ता। नुकसान भी उसकी तरफ से इम्तिहान होता है, और कामयाबी भी।” उसका दोस्त रो पड़ा। “क्या अब भी देर नहीं हुई?” बिलाल ने मुस्कुराकर कहा, “जब तक साँस है, देर नहीं होती।” आज भी जब लोग बिलाल से उसकी कामयाबी का राज़ पूछते हैं, तो वह बस इतना कहता है, “मैंने कभी अल्लाह से सवाल नहीं किया कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ। मैंने बस हर हाल में कहा — जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी। और शायद उसी दिन से मेरी तक़दीर बदलनी शुरू हो गई थी।” याद रखिए… नुकसान वक्ती होता है, लेकिन सब्र हमेशा रंग लाता है। जो इंसान अल्लाह की रज़ा में राज़ी हो जाता है, अल्लाह उसे वहाँ पहुँचा देता है जहाँ वह खुद सोच भी नहीं सकता। जब ज़िंदगी आपको तोड़ने लगे, जब हालात आपके खिलाफ हो जाएँ, तब बस दिल से कहिए — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” शायद उसी पल से आपकी कहानी बदलनी शुरू हो जाए।
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আমাদের চোখের সামনে মানবতা মরছে, কিন্তু কেউ দেখতে পাচ্ছে না। প্রতিদিন শিশুরা মারা যাচ্ছে, মায়েরা কাঁদছে, আর আমরা শুধু দেখছি। এই নীরবতা কি আমাদের মানবিকতার শেষ সীমা?
Default Sample - 447
Imaginez la scène, mes amis. Nous sommes à Athènes, au Ve siècle avant notre ère. Socrate marche dans l'agora, entouré de ses disciples. Un sage parmi les marchands, un philosophe parmi les citoyens. Il pose une simple question qui ébranle les certitudes : "Que savons-nous vraiment ?"
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Bilal Bilal Edit Model 0 Uses 0 Shares 0 Likes 0 Saved by अगर आपकी पूरी दुनिया एक ही पल में बिखर जाए… अगर आपकी आँखों के सामने आपकी मेहनत, आपका सहारा, आपकी उम्मीद सब राख बन जाए… तो क्या आप फिर भी कह पाएँगे — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी”? यह कहानी है दो दोस्तों की। एक का नाम था बिलाल। दूसरा उसका बचपन का साथी था। दोनों ने साथ खेला, साथ बड़े हुए, साथ कारोबार शुरू किया। लेकिन दोनों की सोच अलग थी। बिलाल की ज़ुबान पर हर वक़्त एक ही जुमला रहता था — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी।” उसका दोस्त अक्सर हँस देता और कहता, “यार बिलाल, हर बात में अल्लाह की रज़ा मत ढूँढा करो। नुकसान, नुकसान होता है। दर्द, दर्द होता है।” बिलाल बस मुस्कुरा देता। उसकी मुस्कुराहट में अजीब सा सुकून होता था। एक रात बाज़ार में अचानक आग लग गई। पहले धुआँ उठा, फिर लपटें आसमान को छूने लगीं। लोग चीख रहे थे, भाग रहे थे, पानी फेंक रहे थे, लेकिन आग किसी की नहीं सुन रही थी। उसी बाज़ार में बिलाल की छोटी सी दुकान भी थी। कुछ ही मिनटों में उसकी सालों की मेहनत जलकर राख हो गई। लोग उसके पास आए, कोई अफसोस कर रहा था, कोई सिर पकड़कर बैठ गया। उसका दोस्त दौड़ता हुआ आया, जलती हुई दुकान को देखा और गुस्से में बोला, “सब खत्म हो गया बिलाल! अब क्या करोगे? अब भी कहोगे कि अल्लाह राज़ी है?” कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। बिलाल ने राख बन चुकी दुकान को देखा। उसकी आँखों में आँसू थे, मगर चेहरे पर शिकवा नहीं था। उसने गहरी साँस ली और धीमी आवाज़ में कहा, “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” दोस्त झुंझला गया। “यह कैसी बातें करते हो? मेहनत तुम्हारी जली है, नुकसान तुम्हारा हुआ है!” बिलाल ने बस इतना कहा, “शायद मेरे रब को इससे बेहतर कुछ देना हो।” वक़्त गुज़रा। बिलाल ने फिर से छोटी सी जगह किराए पर ली और नया काम शुरू कर दिया। कमाई कम थी, मुश्किलें ज़्यादा थीं, मगर उसके चेहरे पर वही सुकून था। फिर एक और इम्तिहान आया। उसका इकलौता बेटा अचानक बहुत बीमार पड़ गया। तेज़ बुखार, फिर हालत बिगड़ती गई। अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जाँच के बाद कहा, “हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालत नाज़ुक है। दुआ कीजिए।” उसका दोस्त बाहर बेचैनी से टहल रहा था। उसने बिलाल से कहा, “देखो बिलाल, हर चीज़ में अल्लाह की रज़ा नहीं होती। यह बहुत बड़ा दुख है। इंसान टूट जाता है ऐसे वक्त में।” बिलाल ने अपने बेटे का हाथ पकड़ा, उसकी ठंडी उँगलियों को सहलाया और आसमान की तरफ देखा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, मगर आवाज़ में अजीब सा यक़ीन था। उसने कहा, “या अल्लाह, अगर तू राज़ी है तो मैं भी राज़ी। मेरे दिल को सब्र दे।” वह पूरी रात अस्पताल की कुर्सी पर बैठा रहा। कभी दुआ करता, कभी बेटे के माथे पर हाथ रखता। उसके दोस्त की आँखों में डर था, गुस्सा था, सवाल थे। बिलाल की आँखों में दर्द था, लेकिन शिकायत नहीं थी। सुबह फ़ज्र के करीब डॉक्टर तेज़ कदमों से कमरे में आया। उसके चेहरे पर हैरानी थी। उसने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी, लेकिन बच्चे की हालत अचानक संभल रही है। रिस्पॉन्स बेहतर है। यह बहुत अच्छा संकेत है।” दोस्त हैरान रह गया। बिलाल की आँखें भर आईं। वह चुपचाप झुका और सज्दे में चला गया। उसके होंठों पर बस यही था, “तूने मेरी रज़ा को खाली नहीं जाने दिया, मेरे रब।” दिन बीतते गए। बिलाल ने मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। लोग उसकी ईमानदारी की कद्र करने लगे। उसका कारोबार फिर खड़ा हो गया, बल्कि पहले से बेहतर हो गया। दूसरी तरफ उसका दोस्त तेजी से तरक्की कर रहा था, बड़े सौदे कर रहा था, पैसे कमा रहा था, लेकिन उसके दिल में सुकून नहीं था। हर छोटी बात पर गुस्सा, हर मुश्किल पर शिकायत। फिर एक दिन उसके दोस्त को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। एक बड़ी डील आखिरी वक्त पर रद्द हो गई। करोड़ों का घाटा। वह टूट गया। उसने गुस्से में कहा, “या अल्लाह, मेरे साथ ही क्यों? मैंने क्या बिगाड़ा है?” उसी रात उसे बिलाल की बातें याद आईं — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी…” कुछ समय बाद बिलाल शहर के सम्मानित व्यापारियों में गिना जाने लगा। लोग उससे सलाह लेने आते। एक दिन उसका वही दोस्त, थका हुआ, टूटा हुआ, उसके दफ्तर में आया। उसकी आँखों में नमी थी। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “मैं हार गया बिलाल। मैं हर वक्त शिकायत करता रहा। जब थोड़ा नुकसान हुआ तो मैं गुस्सा हो गया। जब फायदा हुआ तो घमंड आ गया। तुम हर हाल में कहते रहे कि अल्लाह राज़ी… और शायद इसी वजह से अल्लाह तुमसे राज़ी हो गया।” बिलाल ने उसका कंधा थामा। उसकी आवाज़ नरम थी, मगर बात गहरी थी। उसने कहा, “जब इंसान अल्लाह की मर्ज़ी पर आमीन कह देता है, तो अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ता। नुकसान भी उसकी तरफ से इम्तिहान होता है, और कामयाबी भी।” उसका दोस्त रो पड़ा। “क्या अब भी देर नहीं हुई?” बिलाल ने मुस्कुराकर कहा, “जब तक साँस है, देर नहीं होती।” आज भी जब लोग बिलाल से उसकी कामयाबी का राज़ पूछते हैं, तो वह बस इतना कहता है, “मैंने कभी अल्लाह से सवाल नहीं किया कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ। मैंने बस हर हाल में कहा — जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी। और शायद उसी दिन से मेरी तक़दीर बदलनी शुरू हो गई थी।” याद रखिए… नुकसान वक्ती होता है, लेकिन सब्र हमेशा रंग लाता है। जो इंसान अल्लाह की रज़ा में राज़ी हो जाता है, अल्लाह उसे वहाँ पहुँचा देता है जहाँ वह खुद सोच भी नहीं सकता। जब ज़िंदगी आपको तोड़ने लगे, जब हालात आपके खिलाफ हो जाएँ, तब बस दिल से कहिए — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” शायद उसी पल से आपकी कहानी बदलनी शुरू हो जाए।
Default Sample - Hasan
إن الحق واضح وضوح الشمس، ومن يظن أنه يستطيع تجاوز الحدود فهو واهم، فالعدل سيأخذ مجراه، والظلم لن يدوم، وسيأتي اليوم الذي يحاسب فيه كل من تجاوز وتعدى على حقوق الآخرين
Default Sample - Rap
آنکھوں میں خون کے آنسو ہیں زبان پر فریاد جب تک ظلم کی رات ہے ہم چپ نہیں رہیں گے یہ دنیا سن لے ہماری آواز کو ہر ظالم کے خلاف ہم کھڑے ہیں آج تک جیسے شیر کی دہاڑ
Default Sample - Shahzaib
आप लोग बार-बार पूछ रहे थे कि फॉलो कहां करना है, तो भाई सीधा मेरी प्रोफाइल पर जाओ। वहां जो लिंक दिया है उस पर क्लिक करते ही आप सही जगह पहुंच जाओगे। एक बार दोबारा देख लो ताकि कोई गलती न हो, फिर मत कहना भाई बताया नहीं।
Default Sample - Killixis
आने वाले एपिसोड में हमें और भी ज़्यादा सस्पेंस देखने को मिलेगा। किरदारों के बीच की ये केमिस्ट्री और इमोशनल सीन्स वाकई कहानी को एक नया मोड़ दे रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि ये क्लाइमेक्स दर्शकों को हैरान कर देगा क्योंकि अब सब कुछ बदलने वाला है।
Default Sample - ناتن ياهو
غزة حرة وستبقى دائما حرة وتحترق تل أبيب أتمنى أن تزول هذه القذارة من العالم أنا الناتن ياهو الذي يقتل أطفال غزة أنا في تونس الخضراء مهان أتمنى أن تذهب هذه الخنازير الى الجحيم سيحرقني أبطال فلسطين تفوه عليكم يا صهاينة
Default Sample - Malik g
Listen, God wanted me to remind you today: Your season of struggle is not your final story. The tears, the waiting, the uncertainty - it's all preparation. God is molding you in the silence. Your breakthrough is coming. Keep believing, keep praying. Your miracle is closer than you think.
Default Sample - Zakir Raza
یا اللہ ہماری تمام پریشانیوں کو دور فرما اور ہمیں صراطِ مستقیم پر چلنے کی توفیق عطا کر۔ اے رب العزت، ہمیں اپنی رحمتوں اور برکتوں سے نواز اور ہمارے دلوں کو ایمان کی روشنی سے منور کر دے۔ ہمیں ہر برائی سے بچا اور نیک اعمال کرنے کی ہمت دے۔
Default Sample - صقر
يا من سكنت الروح وأغلقت خلفك كل الأبواب، لا تسأل عن حالي في غيابك، فكل الوجوه بعدك سراب. أقسم بمن جعل في عينيك سحراً لا ينتهي، أني ما وجدت في هذا الكون نفساً تطيب لها نفسي سواك، فأنت البداية وأنت الختام لكل قصائدي.
Default Sample - Sha 1
یمن میں انسانی بحران بہت سنگین ہو چکا ہے۔ اقوام متحدہ کے مطابق 80 فیصد آبادی کو فوری امداد کی ضرورت ہے۔ ہسپتالوں میں دوائیں ختم ہو رہی ہیں، بچوں کو غذائی قلت کا سامنا ہے۔ عالمی برادری کو فوری اقدامات کرنے چاہئیں۔
Default Sample - Zakir Raza
یا اللہ ہمارے تمام صغیرہ اور کبیرہ گناہوں کو معاف فرما دے اور ہمیں اپنی رضا کے مطابق زندگی گزارنے کی توفیق عطا فرما۔ اے میرے رب، تمام مسلمانوں کی پریشانیاں دور کر اور ہم سب پر اپنی رحمتوں کا سایہ ہمیشہ قائم رکھنا، ہمیں دنیا اور آخرت میں کبھی رسوا نہ کرنا۔
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