Generador de Voz AI Ravish por Fish Audio
Genera la voz Ravish confiable para más de 0+ creadores. Crea discursos high-quality con texto a voz AI.
Muestras - Ravish
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Muestra 1
नमस्कार मैं रवश कुमार। दोस्तों जरा सोचिए अब तक पश्चिमी देशों की नाराजगी बस बयानों और प्रस्तावों तक सिमटी रहती थी। लेकिन इस बार मामला और भी गर्म हो गया। जब लोग सड़कों पर उतरे तो सिर्फ नारे नहीं लगे। पूरा का पूरा इजराइली दूतावास आग के हवाले कर दिया गया। धू-धू करके जलती इमारत और उस धुएं के साथ उड़ गया इजराइल के कूटनीति का सारा गुरु। और यही नहीं उस देश ने साफ कह दिया अब ना इजराइल चाहिए ना इजराइली। जरा तस्वीर कीजिए। नेतन्या की नींदें उड़ चुकी हैं। चेहरा उतना ही पीला जितना टेलीविजन स्टूडियो की लाइट।
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आज सरकार ने कहा है कि महंगाई कम हो गई है। मैं सोच रहा हूं कि क्या आप लोगों की जेब में यह खबर पहुंची है या नहीं। सब्जी मंडी में जाइए तो पता चलेगा कि सरकारी आंकड़े कितने सच्चे हैं। हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए, पूरी रिपोर्ट देखिए।
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देखिए, आज मैं आपसे एक महत्वपूर्ण विषय पर बात करना चाहता हूं। सोशल मीडिया पर फैली फर्जी खबरों से सावधान रहिए। हर खबर को फैक्ट चेक करें, विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लें। यही सच्ची पत्रकारिता का धर्म है।
Sample Transcriptions
Default Sample - Muestra 1
नमस्कार मैं रवश कुमार। दोस्तों जरा सोचिए अब तक पश्चिमी देशों की नाराजगी बस बयानों और प्रस्तावों तक सिमटी रहती थी। लेकिन इस बार मामला और भी गर्म हो गया। जब लोग सड़कों पर उतरे तो सिर्फ नारे नहीं लगे। पूरा का पूरा इजराइली दूतावास आग के हवाले कर दिया गया। धू-धू करके जलती इमारत और उस धुएं के साथ उड़ गया इजराइल के कूटनीति का सारा गुरु। और यही नहीं उस देश ने साफ कह दिया अब ना इजराइल चाहिए ना इजराइली। जरा तस्वीर कीजिए। नेतन्या की नींदें उड़ चुकी हैं। चेहरा उतना ही पीला जितना टेलीविजन स्टूडियो की लाइट।
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आज सरकार ने कहा है कि महंगाई कम हो गई है। मैं सोच रहा हूं कि क्या आप लोगों की जेब में यह खबर पहुंची है या नहीं। सब्जी मंडी में जाइए तो पता चलेगा कि सरकारी आंकड़े कितने सच्चे हैं। हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए, पूरी रिपोर्ट देखिए।
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देखिए, आज मैं आपसे एक महत्वपूर्ण विषय पर बात करना चाहता हूं। सोशल मीडिया पर फैली फर्जी खबरों से सावधान रहिए। हर खबर को फैक्ट चेक करें, विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लें। यही सच्ची पत्रकारिता का धर्म है।
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दोस्तों आज की सबसे बड़ी खबर, सरकारी आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। क्या आप जानते हैं कि किस तरह से आम जनता को गुमराह किया जा रहा है? यह सवाल हर नागरिक को सोचने पर मजबूर कर रहा है।
Default Sample - ravish
नमस्कार मैं रवीश कुमार। आज हम बात करेंगे शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती समस्याओं की। विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है। सरकार कहती है सब ठीक है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है। इस पर गंभीर चर्चा की जरूरत है।
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देखिए आज फिर एक बड़ा सवाल हमारे सामने है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की हालत क्यों खराब होती जा रही है? डॉक्टर हैं, दवाएं हैं, लेकिन व्यवस्था नहीं है। अधिकारी जवाब देने को तैयार नहीं हैं। यह कैसी प्रशासनिक लापरवाही है?
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नमस्कार, मैं रवीश कुमार। आज की बड़ी खबर है कि विधानसभा चुनाव में मतदान के दौरान लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। स्थानीय मुद्दों पर लोगों में गहरी चिंता दिखाई दी।
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आज जो लोग विकास की बात करते हैं, वो कल गरीबी को नज़रअंदाज क्यों करते थे? जो आज डिजिटल इंडिया का जश्न मना रहे हैं, वो ग्रामीण भारत की बदहाली पर चुप क्यों हैं? मीडिया इन सवालों से भागता क्यों है?
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नमस्कार मैं रवीश कुमार, चीन और भारत के बीच सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बैठक की तैयारी चल रही है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।
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सरकार की नई नीति पर सवाल उठ रहे हैं। जनता के पैसे से चल रही योजनाओं का हिसाब कहाँ है? अधिकारी चुप हैं, मंत्री मौन हैं। क्या यह लोकतंत्र की मर्यादा है? देश को जवाब चाहिए, स्पष्टीकरण चाहिए।
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نمسکار، میں رویش کمار۔ آج کی خبر میں دیکھیں گے کہ کس طرح عالمی برادری انسانی حقوق کی پامالی پر خاموش ہے۔ معصوم بچے اور عورتیں روزانہ ہلاک ہو رہے ہیں، طبی سہولیات کی شدید کمی ہے۔
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नमस्कार मैं रवीश कुमार, आज हम बात करेंगे किसान आंदोलन की। सरकार ने किसानों की रैली को रोकने के लिए सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए हैं। सवाल उठता है
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नमस्कार मैं रवीश कुमार, आज का सबसे बड़ा सवाल: क्या विपक्षी दलों का गठबंधन चुनाव में कारगर साबित होगा? सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में कितना फर्क है? इन सवालों पर आज होगी विस्तृत चर्चा।
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