عنوان: جادوئی گھر
ایک چھوٹا سا بچہ علی اپنے خاندان کے ساتھ ایک خوبصورت گھر میں رہتا تھا۔ ایک دن اسے گھر کے اسٹور روم میں ایک پرانی چابی ملی۔ جیسے ہی اس نے چابی دروازے میں لگائی، گھر کی دیواریں چمکنے لگیں۔
اچانک گھر بول اٹھا:
"خوش آمدید، علی! آج میں تمہیں اپنے جادوئی راز دکھاؤں گا۔"
کمرے کھلتے گئے، جہاں بولنے والی کتابیں، ناچتے کھلونے اور گانے والے پودے موجود تھے۔ علی حیران رہ گیا اور سب کے ساتھ کھیلنے لگا۔
شام ہونے پر گھر نے کہا:
"یاد رکھو، اصل جادو محبت، صفائی اور اپنے گھر کی حفاظت میں ہے۔"
علی نے مسکرا کر وعدہ کیا کہ وہ ہمیشہ اپنے گھر کا خیال رکھے گا۔ اس کے بعد گھر دوبارہ عام ہو گیا، مگر علی کے دل میں اس کی جادوئی یادیں ہمیشہ زندہ رہیں۔
سبق: اپنے گھر سے محبت کریں، اسے صاف رکھیں اور اس کی قدر کریں۔
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il y a 3 mois
hi
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Tonalité moyenne
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सुंदर वन के एक बहुत बड़े और हरे-भरे आम के पेड़ पर जंगू नाम का एक बूढ़ा और समझदार बंदर रहता था। जंगू के दो बेटे थे—बड़ा बेटा चीकू बहुत चालाक और लालची था, जबकि छोटा बेटा मीकू बहुत सीधा, सच्चा और मेहनती था। जंगू दोनों से बहुत प्यार करता था, लेकिन वह चीकू की लालची आदत से हमेशा परेशान रहता था।
एक दिन, बूढ़े जंगू ने दोनों बेटों को अपने पास बुलाया और कहा, "मेरे बच्चों! अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ। आज मैं तुम दोनों کی परीक्षा (امتحان) लेना चाहता हूँ। मैं तुम दोनों को दो अलग-अलग टोकरियाँ दे रहा हूँ। जो शाम तक इस जंगल से सबसे मीठे और अच्छे फल लेकर आएगा, उसे मैं अपनी जादुई छड़ी दूंगा।" जादुई छड़ी का नाम सुनते ही चीकू की आँखों में चमक आ गई।
चीकू अपनी टोकरी लेकर तेज़ी से भागा। रास्ते में उसे एक पेड़ पर बड़े-बड़े और पके हुए केले दिखे। उसने सोचा, "अगर मैं सारे केले अकेले ही ले लूं, तो पापा मुझे ही विनर बनाएंगे।" उसने जल्दी-जल्दी सारे केले अपनी टोकरी में भर लिए। तभी वहाँ एक छोटी और भूखी गिलहरी आई और बोली, "चीकू भैया, मुझे बहुत भूख लगी है, क्या एक केला मिलेगा؟" लेकिन लालची चीकू ने उसे डांट कर भगा दिया और बोला, "भागो यहाँ से! यह सब मेरे हैं।"
दूसरी तरफ, छोटा भाई मीकू धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। उसने पेड़ से गिरे हुए साफ-सुथरे फल चुने। रास्ते में उसे वही भूखी गिलहरी मिली। मीकू ने बिना सोचे-समझे अपनी टोकरी से दो मीठे आम निकालकर उस गिलहरी को दे दिए। गिलहरी खुश हो गई और उसने मीकू को बताया, "मीकू भैया! आगे मत जाना, वहाँ शिकारी ने जाल बिछाया है।" मीकू ने गिलहरी का शुक्रिया अदा किया اور بچتے ہوئے دوسرے راستے سے گھر کی طرف نکل گیا۔
शाम को दोनों भाई वापस आम के पेड़ के पास पहुँचे। चीकू अपनी भरी हुई टोकरी दिखाकर अकड़ रहा था, "देखो पापा! मैं सबसे ज़्यादा फल लाया हूँ।" तभी जंगू ने चीकू की टोकरी देखी, तो लालच के चक्कर में चीकू ने कई कच्चे और सड़े हुए फल भी भर लिए थे। वहीं मीकू की टोकरी में फल भले ही थोड़े कम थे, लेकिन सब बिल्कुल ताज़े اور میٹھے تھے۔