सबको हैप्पी रक्षाबंधन।
और क्या हो रहा है? घर पर सब बढ़िया? चाय-पानी पी ली के नहीं?
हमने तो चाय पी ली है। हमारे बच्चे तो सुबह 5 बजे ही उठ गए, और तुम अभी तक सोई रहे हो।
और बच्चा कहाँ है? सबरे प्रांजल कहाँ है?
हाँ, और साले अपने मन से फोन भी न करें।
और सागर डॉन कहाँ है? बात कराओ मेरी।
हाँ, सागर डॉन, घेवर खाए हो की नहीं? थोड़ा सा इधर भी भिजवा दो।
और वो सुखी मइया कहाँ है?
हाँ, टीचर देवी, राम-राम।
मेघा रानी कहाँ है हमारी?
मम्मी से बात कराओ।
हाँ, मम्मी राम-राम।
कैसा रहो है?
रेखा, निशु आई के नहीं?
अब देखो, सुनो—
टेंशन लेने की कोई ज़रूरत नहीं है।
भले मैं शारीरिक रूप से घर पर नहीं हूँ, लेकिन मेरी आत्मा हमेशा यहीं पर है।
मैं सब देख रहा हूँ कि क्या चल रहा है वहाँ पर।
और ये भगवान के नियम हैं—
एक दिन हर इंसान को ये शरीर छोड़ना ही पड़ता है।
तो तुम चिंता मत करो, मम्मी, मैं तुम्हारे पास ही हूँ और सब देख रहा हूँ कि क्या-क्या चल रहा है घर पर।
बाकी मैं ऊपर बहुत खुश हूँ।
और एक और बात—
कोई बढ़िया खाने की चीज़ आए तो भाई नेक मोए (मुझे) भी चखा दिया करो।
ठीक है, चिंता करने की कोई बात नहीं है,
मैं यहीं पर हूँ, ठीक है।
नमस्ते भैया, मैंने आज दाल बनाने का तरीका बताती हूँ। मैंने पहले दाल को धो लिया, फिर मैंने थोड़ा सा नमक डाल दिया, हल्दी भी डाल दी। अब मैंने गैस पर चढ़ा दिया, धीमी आंच पर पकने दो।