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Raja Babu에 의해 स्टॉक मार्केट को समझने के लिए, चलिए उन्नीस सौ बानवे के हर्षद मेहता स्कैम की कहानी सुनते हैं। स्टॉक्स का मतलब होता है किसी कंपनी में एक छोटा सा हिस्सा खरीदना, जब आप स्टॉक खरीदते हैं आप उस कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं, और सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड टॉप थर्टी बड़ी कंपनीज़ की एवरेज परफॉरमेंस को दिखाने वाला एक नंबर है ,ये मार्केट का मूड बताता है हर्षद मेहता एक स्टॉक ब्रोकर था जिसे लोग बिग बुल कहते थे उसने बैंकिंग सिस्टम में एक ऐसी कमी ढूँढ निकाली जिसके बारे में किसी को पता नहीं था
उस समय बैंक्स को एक दूसरे से शॉर्ट टर्म लोन लेने के लिए सरकारी बॉन्ड्स गिरवी रखने पड़ते थे, लेकिन बॉन्ड्स ट्रांसफर करने के बजाय बैंक्स एक दूसरे को सिर्फ एक रसीद दे देते थे जिसे बैंक रिसीट या बी आर कहते थे। हर्षद ने इस सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया।
उसने कुछ छोटे बैंक्स के साथ मिलकर नकली बैंक रिसीड्स प्रिंट करवाना शुरू कर दिया, ये रसीदें देखने में बिल्कुल असली लगती थीं, इन नकली रसीदों को वो बड़े बैंक्स को दिखाकर उनसे करोड़ों रुपए का लोन ले लेता था, ये पैसा असल में सिस्टम में था ही नहीं बल्कि एक धोखा था, इस पैसे को हर्षद ने स्टॉक मार्केट में लगाना शुरू किया !उसने कुछ चुने हुए स्टॉक्स जैसे ए सी सी को इतना ख़रीदा कि उनकी क़ीमत फोर थाउज़ेंड परसेंट तक बढ़ इस तेज़ी को देखकर आम लोगों को लगा कि मार्केट में पैसा लगाना बहुत फ़ायदेमंद है, हज़ारों नए इन्वेस्टर्स मार्केट में आ गए, इस वजह से सेंसेक्स जो वन थाउज़ेंड पॉइंट्स पर था, तेज़ी से बढ़कर फोर थाउज़ेंड फाइव हंड्रेड पॉइंट्स तक पहुँच गया, इसे ही मार्केट मैनिपुलेशन कहते हैं जब कोई मार्केट को झूठे तरीकों से ऊपर चढ़ाता है।
ये सब तब तक चला जब तक जर्नलिस्ट सुचेता दलाल ने इस पर रिसर्च शुरू नहीं की
उन्हें पता चला कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास फाइव हंड्रेड करोड़ रुपये का एक बैंक रिसीट है जिसका कोई हिसाब नहीं मिल रहा था, ये एक नकली रसीद थी, जैसे ही उन्होंने ये खबर अखबार में पब्लिश की, शेयर मार्केट में भूकंप आ गया, सबको सच पता चल गया।
घबराकर लोगों ने अपने स्टॉक्स बेचना शुरू कर दिए, मार्केट बुरी तरह से क्रैश हो गया, लाखों छोटे इन्वेस्टर्स ने अपनी पूरी जमा पूँजी गवा दी, ये स्कैम स्टॉक मार्केट के इतिहास का सबसे बड़ा धोखा माना जाता है।