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Umang Raaj에 의해पहले के समय में हमारे घरों में दादी–नानी डबों में पैसा रखती थी
पैसा कम आता था, पर बचता बहुत था।
लोकीन आज के समय मे
आज UPI है, क्रेडिट कार्ड है, जिंदगी आसान है…
पर जेब हमेशा खाली क्यों रहती है?
हमारे दादा की सैलरी शायद 10 से 15 हजार थी,
पर घर बनाया, पढ़ाई करवाई, शादी करवाई, FD भी बनाई।
हमारी सैलरी आज 50,000 से 2 लाख है,
पर महीने के आखिर में जीरो सेविंग्स।
क्यों?
क्योंकि उस समय खर्च करने के options कम थे—
न मॉल्स, न ब्रांड्स, न हर साल नया फोन,
न Zomato, न Swiggy, न online sale…
Cash निकलते वक्त हर रुपए का दर्द महसूस होता था।
लेकीन
आज एक क्लिक में पैसा उड़ जाता है और हमें महसूस भी नहीं होता।
सबसे बड़ा killer महंगाई नहीं है…
सबसे बड़ा killer है – Easy Access to Money
UPI, कार्ड, EMI, Buy Now Pay Later —
हर सेकंड हमारे हाथ में एक खर्च करने वाला रिमोट है।
और जब पैसा दिखता नहीं है… दर्द भी नहीं होता।
चलो इसे पाइप और टंकी की मदद से समझते है
जैसे
पहले आने वाला पाइप (income) छोटा था,
पर जाने वाला पाइप (expenses) उससे भी छोटा।
इसलिए टंकी यानी सेविंग भरी रहती थी।
आज income का पाइप बड़ा,
पर expenses का पाइप उससे भी बड़ा—
इसलिए टंकी खाली।
लोग 2 से 4 लाख कमाकर भी कंगाल हैं।
क्योंकि प्रॉब्लम income की नहीं,
प्रॉब्लम expense management की है।
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