एक समय की बात है, एक विशाल जंगल में एक चौड़ी नदी बहती थी। नदी के किनारे एक ऊंचा जामुन का पेड़ था, जिसकी शाखाओं पर काले-बैंगनी रसीले जामुन लटकते थे। इस पेड़ पर एक समझदार बंदर रहता था, जिसका नाम था चिंटू। चिंटू न सिर्फ चतुर था, बल्कि उसकी आंखों में एक खास चमक थी, जो उसकी बुद्धिमानी को दर्शाती थी। वह हर दिन जामुन खाता, नदी के किनारे बैठकर मछलियों को देखता और अपने दिन का आनंद लेता था। लेकिन उस नदी में एक मगरमच्छ रहता था, जिसका नाम था भोलू। भोलू दिखने में भोला-भाला था, लेकिन उसका मन लालच और चालबाजी से भरा था।
चिंटू और भोलू की दोस्ती का आरंभ
एक दिन भोलू ने चिंटू को पेड़ की सबसे ऊंची डाल पर बैठे हुए देखा। चिंटू एक जामुन तोड़कर बड़े मजे से खा रहा था। भोलू की आंखों में लालच की चमक आ गई। उसने सोचा, “अगर मैं इस बंदर से दोस्ती कर लूं, तो मुझे रोज जामुन मिलेंगे।” उसने चिंटू को आवाज लगाई, “ए बंदर भाई, तुम्हारा नाम क्या है? मैं तुम्हारा दोस्त बनना चाहता हूं।” चिंटू ने नीचे देखा और हंसते हुए कहा, “मेरा नाम चिंटू है। और तुम कौन हो, नदी के राजा?” भोलू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मैं भोलू हूं, इस नदी का मगरमच्छ। चलो, दोस्ती करते हैं। तुम मुझे जामुन दो, और मैं तुम्हें नदी के उस पार की सैर कराऊंगा।”
आज के जमाने में लोग real life में तो एक दूसरे से बात नहीं करते, लेकिन social media पर हर minute status update करते हैं। वाह री technology, कैसा विचित्र experiment कर रही है मानव जाति पर!