dalklsh panwar
por Kunnu Panwar[संगीत] यह है गुरुग्राम, मिलेनियम सिटी, नए भारत का चमकता टिमटिमाता प्रतिबिंब, ग्लोबल इंडिया का शोकेस जिसे मल्टीीनेशनल कॉरपोरेशंस अपना घर कहते हैं और यह है गुरुग्राम की सच्चाई कुछ घंटे बारिश के बाद। हमारे देश में कोर्ट, कैग, पीआईएल सबको दबा दिया गया है। लेकिन इंद्र देवता कुछ ही घंटों के अंदर करप्शन, धांधली, दलाली की पोल खोल देते हैं और एक दिन के लिए ही सही लोगों को टैक्स देने के बाद भी कॉकरोच होने का एहसास भरपूर होता है। दरअसल बोर और मुंबई की तरह किसी ने गुरुग्राम की हाइड्रोग्राफी को ध्यान से पढ़ा ही नहीं। यह शहर एक टाइम पर शाबी रिवर बेसिन का एक हिस्सा हुआ करती थी जहां सीजनल लेकक्स हुआ करते थे। इसी कैचमेंट एरिया के ऊपर 1990 में बड़े-बड़े इमारत बना दिए गए। पैसे खिलाकर बिल्डर्स ने इंक्रोचमेंट कर दिया। नेचुरल ड्रेनेज चैनल्स को ब्लॉक कर दिया। नतीजा आज यह हुआ कि मसूनंस में 100-100 करोड़ वाली अपार्टमेंट्स के सामने गटर वाली वेनिस फीलिंग आती है। 100 करोड़ के फ्लैट पानी देखो आप। लेकिन चलो हर साल डूबते हुए मैक्सिमम सिटी मुंबई और मिलेनियम सिटी गुरुग्राम को मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया आउटरेज तो मिल जाता है। इस बार तो हमारे हिल्स में जो हुआ उसकी हालत भी पूरे देश ने देखा। जम्मू एंड कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में कुल मिलाकर 500 मौतें के आसपास दर्ज की गई है एक मसून के अंदर। लेकिन जो पंजाब में आज हो रहा है वो शायद इससे भी ज्यादा ट्रैजिक और इससे भी ज्यादा प्रिवेंटेबल ट्रेजडी है। लेकिन चाहे वो 1988 हो, 208 हो या 20-28 ही क्यों ना हो, हम कुछ सीखने वाले कहां हैं? पंजाब 40 सालों में सबसे बुरे बाढ़ का आज सामना कर रहा है। 30 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है आने वाले दिनों में। 3 लाख एकड़ की खेतीबाड़ी तबाह हो चुकी है। हजार से ज्यादा गांव डूब चुके हैं। 12,000 लोगों को रेस्क्यू किया गया है और हजारों और बेघर हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू एंड कश्मीर में तेज बारिश के चलते सतलज और ब्यास और रावी नदी उफान पर है। बाढ़ का पानी गुरदासपुर, अमृतसर, तरनारण, फिरोजपुर, पठानकोट, कपूरथला, होशियारपुर डिस्ट्रिक्ट्स में तबाही मचा रहे हैं। रावी और ब्यास नदी पर आधे दर्जन परमानेंट या टेंपरेरी इंबैंकमेंट्स भी कोलैप्स कर चुके हैं। पानी का बहाव इतना तेज है और उधर भाखरा, पोंग और रंजीत सागर जो बांध है उन पर भी पानी उनको छोड़ना पड़ रहा है जिससे आने वाले दिनों में और भी गांव और भी शहर और स्कूल, खेतीबाड़ी पानी के नीचे जा सकते हैं। बारिश इतनी तेज हुई है कि 36 घंटों के अंदर-अंदर भाखड़ा डैम का स्तर 4 फीट बढ़ गया। अभी डैम अपने डेंजर मार्क के आसपास आ चुकी है। पोंग डैम और रंजीत सागर डैम तो पिछले हफ्ते ही अपना डेंजर मार्ग क्रॉस कर चुकी थी और इनसे पानी रिलीज करना पड़ा जो बांध है उस पर प्रेशर कम करने के लिए। इतने पानी ने पंजाब के कई इलाकों को तबाह कर दिया है। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स या एनडीआरएफ, आर्मी, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स अपना सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशंस कंडक्ट कर रही है। वहीं मटोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने आने वाले दिनों में और भी बारिश का प्रेडिक्शन किया है। अब ये चिंता का विषय है। इसलिए क्योंकि यहां के जो एरियाज हैं उनके रिजवायर्स सेप्टेंबर एंड तक भर जाते हैं जब मसून खत्म होता है। लेकिन आलम अभी यह है कि सितंबर की शुरुआत हुई है और ऑलरेडी बांध ओवरफ्लो कर रहे हैं और और भी ज्यादा बारिश अभी बाकी है। 2025 के फ्लड्स ने पंजाब में 1988 की यादें ताजा कर दी हैं। 1988 वो साल जब सतलज, ब्यास और रावी नदी वाटर ऑफ सोरोस बनकर 500 लोगों की जाने ले लेती है। उस साल ताबड़तोड़ बारिश मार्च के महीने में शुरू होती है और सितंबर में बारिश रुकने की जगह और ज्यादा तेज हो जाती है। नतीजा यह होता है कि गुरदासपुर से लेकर लुधियाना, जालंधर से लेकर संगूर तक मानो पूरा पंजाब पानी के नीचे आ गया हो। इस बड़े हादसे के बाद सरकार ने कई स्टडीज करवाई पता लगाने के लिए कि मेन कारण क्या था? हर स्टडी ने ये पाया कि मेन कल्पिट मनसूनंस में ओवर फ्लोइंग रिवर्स है। लेकिन उतना ही इंपॉर्टेंट था हमने क्या काम किया था। हमारा ह्यूमन इंटरवेंशन, हमारी गलती। पुअर मैनेजमेंट जो हमने वाटर मैनेजमेंट करना था वो हमने ठीक से किया ही नहीं। जो वाटर ड्रेनेज सिस्टम था उसे हमने ठीक से चलाया नहीं। कैनाल्स नेचुरल वाटर वेज़ जो थी वो चोक थी। दूसरी बांस जो है छोटे बांध्स हैं उनको हमने ठीक से मेंटेन नहीं किया। उसके ऊपर इललीगल माइनिंग किया, डिफॉरेस्टेशन किया। इललीगल एंड माइंडलेस कंस्ट्रक्शन जो किया फ्लड प्लेन के ऊपर बेसिकली आ बैल मुझे मार। सालों से एक्सपर्ट्स की वार्निंग्स के बावजूद पंजाब की नदियों को डिसिल्ट नहीं किया गया। उनकी वाटर कैरिंग कैपेसिटी कम होती गई। ऊपर से क्लाइमेट चेंज आज स्कूल की टेक्स्ट बुक में एक अध्याय बनकर नहीं रह गया है। इंडिया और पाकिस्तान पंजाब की अगर हम बात करें तो क्लाइमेट चेंज रेगुलरली तबाही मचा रही है हमारी आंखों के सामने। पाकिस्तान पंजाब में तो हालत और भी ज्यादा खराब है। 20 लाख लोग इंपैक्ट हुए हैं इस फ्लडिंग के चलते इस साल। सरकार ने 7 लाख लोगों को रेस्क्यू किया है। 5 लाख लाइव स्टॉक फ्लड में अभी फ्लड के पानी में फंसे हुए हैं। 850 जाने ऑलरेडी जा चुकी हैं। पंजाब में लोग इस बाढ़ का मुकाबला डटकर कर रहे हैं। सरकार मदद करे या ना करे लोग खुद एक दूसरे की मदद जरूर कर रहे हैं। जगह-जगह पर लंगर भी आपको देखने को मिलेंगे। लेकिन क्या इस बाढ़ के बाद लोग अपने कामकाज में फिर से वापस लग जाएंगे? बिजी हो जाएंगे या इस बात की मांग करेंगे कि इतने इतने बड़े-बड़े बांध बनने के बाद प्रीवियस बाढ़ होने के बाद आज हालत 2025 में ऐसा क्यों है? घागर नदी आज भी मानसून में तबाही क्यों मचा रही है? क्या सब कुछ नेचर थ्योरी, क्लाइमेट चेंज बोलकर हम सह लेंगे चुपचाप या इस बात को समझने की हिम्मत रखेंगे कि इसमें हमने क्या गलत किया है? हमारी मिस्टेक क्या है? कहां-कहां हम अंधे हो गए हैं। बात अंधेपन की हो रही है तो पहले नेता टाइप लोगों की बात पहले कर लेते हैं। आप सरकार पर लोगों का खासा गुस्सा है इस बाढ़ के बाद और कभी-कभी यह जो क्रेडिट लेने की जो आदत है यह बैकफायर भी कर जाती है। जैसा कि पंजाब के तीन मिनिस्टर्स को पता चला। जब वो फ्लड इंस्पेक्शन के लिए बोट राइड पर निकले। स्वीटन 24 घंटे गोवा सुना आपने बोट राइड पर बैठे रिलीफ मेजर्स लोगों की दुख दर्द की बातें नहीं हो रही है बल्कि कैमरा ने उन्हें स्वीडन और गोवा में लग्जरी क्रूजेस के बारे में डिस्कस करते हुए पकड़ लिया। जाहिर सी बात है कि लोग गुस्सा हैं और कह रहे हैं इलेक्शन आने दो भूलेंगे नहीं। उधर भगवंत मान प्रधानमंत्री को चिट्ठी पर चिट्ठी लिख रहे हैं कि पंजाब के 60 हजार करोड़ जो फंड्स हैं वो सेंटर के पास जो फंसे हुए हैं उनको भाई रिलीज कर दो जिससे हम लोगों का रिलीफ रिहबिलिटेशन और एड कर पाएं। पंजाब फाइनेंस मिनिस्टर हरपाल सिंह चीमा ने बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। कहा कि वह पंजाब की तरफ देख भी नहीं रहे हैं। वैसे बात तो सही है। टेक्सस में बाढ़ आ जाती है तो प्रधानमंत्री मोदी ट्वीट करते हैं। पाकिस्तान में बाढ़ आ जाती है तो प्रधानमंत्री मोदी सपोर्ट अपना देते हैं। अफगानिस्तान में अर्थक्वेक आता है तो झटके खत्म होते ही नहीं। मोदी जी का ट्वीट आ जाता है। सपोर्ट आ जाता है। लेकिन पंजाब से इतना लगाव कि एक ट्वीट भी नहीं इतने सारे दिनों में। अच्छा हो सकता है एसइओ समिट में बिजी थे। उस पर भी हमने पूरा एपिसोड बनाया था। देख लीजिएगा। प्रधानमंत्री चाइना से वापस आते हैं। भगवंत मान को फोन मिलाते हैं। बोलते हैं नहीं सेंटर पूरा सपोर्ट करेगा। लेकिन एक बात तो साफ है। वार्निंग होते हुए भी आप सरकार ने समय रहते हुए सही कदम नहीं उठाए थे। लेकिन ऐसा नहीं है कि भगवंत मान सरकार कोई भी काम नहीं कर रही है। नहीं नहीं अरे ठोस कदम उठा रही है। जैसे कि अपने ही पार्टी के सनौर एमएलए हरमीत सिंह को अरेस्ट करवा कर। दरअसल हुआ यह एमएलए हरमीत सिंह ने अपनी ही आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ ना कुछ बातें कह दी। अब उन्होंने कड़ी निंदा कर दी अपने पार्टी के एक्शंस के बारे में और ये कि दिल्ली लॉबी जो है वो पंजाब के मामलों में दखल अंदाजी कर रही है। हरमीत सिंह चाहते थे कि भगवंत मान उन अफसरों को ड्यूटी से हटा दे जिन्होंने फ्लड से पहले सही एक्शन नहीं लिया। अब सही एक्शन नहीं लिया तो उससे हुआ क्या उनकी कंस्टीट्यूएंसी में 11 गांव थे वो डूब गए। अब जो गांव के लोग हैं उनका गुस्सा उन पर फूट पड़ा। अब वो अपने बच-बचाव करने में अपनी ही सरकार को क्रिटिसिज्म करने लगे। लेकिन फिलहाल हो ये रहा है कि एमएलए साहब पर पंजाब पुलिस का कहर भी अब टूट पड़ रहा है। जब एक पुराने रेप केस के सिलसिले में उन्हें अरेस्ट करने के लिए पूरी पंजाब पुलिस की टोली पहुंच गई। फिर उनको एसइयू में बैठकर वहां से भागना पड़ा। देखिए हर आपदा में राजनीतिक पार्टियां अपना अवसर ढूंढती है। आम आदमी पार्टी सरकार को भी अपना हिसाब तो देना पड़ेगा जब इलेक्शन आएगी। कांग्रेस पार्टी आपको फेलियर बता रही है इस फ्लडिंग के बाद। लेकिन जब पंजाब की फ्लडिंग की बात आती है तो सारे पार्टी दोषी हैं। सारे पार्टी गुनहगार हैं। समझाता हूं कैसे। पंजाब को लैंड ऑफ द रिवर्स कहा जाता है और रिवरन एरियाज में कुछ हद तक फ्लडिंग होना काफी नॉर्मल है। लेकिन जिस फ्रीक्वेंसी और जिस इंटेंसिटी से पंजाब में फ्लडिंग हो रहा है वो कहीं से भी नॉर्मल नहीं है। अभी 2025 की फ्लडिंग। उससे 2 साल पहले 2023 में भी फ्लडिंग हुई थी पंजाब में। उससे 2 साल पहले भी फ्लडिंग हुई थी जब करीबन 1400 विलेजेस 18 डिस्ट्रिक्ट में पानी के नीचे चले गए थे और इसका कारण सिर्फ नेचर नहीं है। नेचर को दोष देना अपने काम पर फिर लग जाना बहुत आसान है। लेकिन ये रहे सिक्स ह्यूमन इंड्यूस्ड फैक्टर्स जिसकी वजह से आज पंजाब की ये हालत है। पहले थोड़े कारण समझ लीजिए उसके बाद सलूशंस की भी बात करेंगे। सबसे पहला कारण है डैम्स। जी हां, भाखरा, पोंग, रंजीत सागर डैम जिन्हें बनाया तो गया था अच्छे कारणों के वजह से। हाइड्रोइिक पावर जनरेट होगा। सिंचाई के लिए पानी डिस्ट्रीब्यूट हो जाएगा। तो डैम्स अच्छे होते तो हैं लेकिन वही डैम्स मानसून में भारी पानी भी रिलीज करते हैं। वो भी झटके में पानी रिलीज करते हैं जिससे डाउनस्ट्रीम तबाही मच जाती है। भाखरा डैम दुनिया के सबसे विशाल सबसे प्रसिद्ध बांधों में उसे गिना जाता है। यहां इतना पानी स्टोर होता है, इतना पानी स्टोर होता है कि सतलज नदी बस एक सूखी हुई धारा बनकर रह जाती है। अब सालों से लोगों ने क्या किया? इसी सूखे हुए रिवर बेड पर फार्मिंग करने लगे और घर भी बसाने लगे। लेकिन जब बाढ़ आती है, जब बांध में पानी भर जाता है, जब फ्लड गेट्स को खोला जाता है, तो यही घर, यही खेत तबाह हो जाते हैं और साथ ही साथ यह जो पानी जिसको ब्लॉक फील करता है, पानी दूसरे जगहों तक भी पहुंच जाता है। दूसरा कारण एक्सेस रेन वाटर को संभालने के लिए ड्रेंस, सीजनल रिवेलेट्स और इंबकमेंट्स बनाए जाते हैं। लेकिन उन्हें मेंटेन करना बहुत जरूरी होता है। इस साल रावी और ब्यास के इंबैंकमेंट्स कोलैप्स कर जाते हैं। जब बांध अपनी पानी तेजी से छोड़ता है तो यह एंबकमेंट्स टूटने के चांसेस और भी बढ़ जाते हैं और उसके ऊपर आपने मेंटेनेंस तो की नहीं तो हुई ना तबाही का फार्मूला। तीसरा कारण 2020 में डिपार्टमेंट ऑफ माइंस एंड जियोलॉजी गवर्नमेंट ऑफ पंजाब की रिपोर्ट की बात कर रहा हूं। उन्होंने 2019 के फ्लड्स के ऊपर एक मेजर रिपोर्ट निकाली। कारण निकाला कि सिल्ट एक मेजर रीजन है पंजाब में फ्लडिंग की वजह से। नदी अपने बहाव में आपको मालूम है सिं्ट कैरी करती है। इससे फर्टाइल प्लेन बनते हैं। उसी फर्टाइल प्लेन पर खेती होती है। ये बेसिक ज्योग्राफी है। लेकिन इंसानों ने रिवर को कंट्रोल करने के लिए दोनों साइड पर इ्ंबकमेंट्स बना दी ऊंची ऊंची। नतीजा यह हुआ कि सिल्ट अब एक बहुत छोटे और बहुत पतले कॉरिडोर में जमा होने लगा। और इसका नतीजा होता है कि नदी की जो वाटर कैरिंग कैपेसिटी होती है वो कम हो जाती है। अब पानी है भाई साहब वो तो अपना रास्ता कहीं ना कहीं ढूंढ ही लेती है और भारी नुकसान फिर किसानों को सहना पड़ता है। अब पंजाब सरकार को इस रिपोर्ट को देखकर इस रिपोर्ट को पढ़कर एक डीसिल्टिंग प्रोग्राम शुरू करना था क्योंकि इससे नदी की वाटर कैरिंग कैपेसिटी 15,000 से 5000 क्यूसेक तक बढ़ सकती थी। एक छोटा एग्जांपल देता हूं। सतलज नदी 46 कि.मी. का बहाव है। 1500 मीटर्स का इसकी चौड़ाई है। वाटर कैरिंग कैपेसिटी बोले तो 2 लाख से 3 लाख क्यूसेक है इस नदी में। लेकिन सिल्टिंग की वजह से सरकारी रिपोर्ट बोल रहा हूं। सिल्टिंग की वजह से नदी की कैपेसिटी कम होकर 80 से 90 हजार क्यूसेक रह गई है। अब जब कैरिंग कैपेसिटी ही इतनी कम हो जाएगी तो नेचुरली फ्लडिंग तो होगी ही क्योंकि नदी का पानी कहीं ना कहीं तो जाएगा। यह सब जानते हुए भी सरकार ने इस पर खास फोकस नहीं दिया। आप सोचो जो फ्लड रिलीफ में काम कर रहे हो, जो फ्लड रिलीफ में आप पैसा लगा रहे हो, वही पैसा अगर आपने डिसिल्टिंग में लगा दिया होता तो पंजाब के आज इतने बुरे हाल ना होते। चौथा पॉइंट फ्लड प्रोन एरियाज के ऊपर कंस्ट्रक्शन करना जानबूझ के। आज अगर पटियाला अंडर वाटर है तो वो इसलिए है क्योंकि शहर के कई हिस्से चोल या सीजनल रिवलेट लैंड के ऊपर बना दिए गए हैं। अब ये इललीगल है। लेकिन इस इललीगल कंस्ट्रक्शन की मंजूरी खुद स्टेट के अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने दी है तो कर लो बात। पांचवा कारण पंजाब की पैडी कल्टीिवेशन भी सिचुएशन को और बिगाड़ती है। पहले कॉटन मेज कल्टीिवेशन हुआ करता था। पंजाब के एग्रो क्लाइमेटिक कंडीशन को ये सूट करता था। एक्सेस रेन वाटर जो होता था वो जमीन में खींच जाती थी। लेकिन पैडी को तो पहले से ही स्टैंडिंग वाटर चाहिए होता है। तो अगर इसके ऊपर आप बारिश करा दोगे तो नेचुरल अब्सॉर्प्शन इनू द लैंड तो होगा नहीं। छठा कारण क्लाइमेट चेंज और जिस आग में हम और घासलेट आज डाल रहे हैं। नॉर्थ पोल साउथ पोल के बारे में तो आपने सुना है। हिमालयज को दुनिया का थर्ड पोल कहा जाता है और क्लाइमेट चेंज का इंपैक्ट पहले यहां दिख रहा है। हिमालयज के ग्लेशियर्स और परमा फ्रॉस्ट एशिया के 10 मेजर नदियों को फीड करते हैं। जिन नदियों के भरोसे बाय द वे 1.3 बिलियन लोगों की जिंदगी चलती है। लेकिन क्लाइमेट चेंज के चलते ग्लेशियर्स तेजी से रिट्रीट कर रहे हैं। वाटर फ्लो जो हो रहा है वो अनप्रिडिक्टेबल बन रहा है। जिसकी वजह से फ्लड्स, लैंडस्लाइड, फ्लैश फ्लड्स हैं उनके चांसेस बढ़ रहे हैं दिन-बदिन। जैसे कि घागर एक सीजनल रेनफेड रिवर है। माने उसके ऊपर ना कोई बांध है ना कोई वाटर कंट्रोल फीचर है। लेकिन जब हिमाचल, हरियाणा से भारी बारिश होगी। उनके कैचमेंट एरिया में बहुत ज्यादा अगर बारिश होती है तो यह पानी का उफान इस नदी में आ जाता है और पंजाब में तबाही मचाता है तो यह पूरा इंटरकनेक्टेड होता है। ये मैंने आपको सिर्फ कुछ कारण बताए हैं। कारण इससे भी ज्यादा है। अब आप बोलोगे कि फिर सलूशन क्या है? ये तो क्लाइमेट चेंज है। हम कुछ कर नहीं सकते हैं। कर बहुत कुछ सकते हैं। पूरी चीज अगर खत्म नहीं कर सकते हैं तो मिटिगेट कर सकते हैं। माने जो जान माल का जो नुकसान होता है उसे कम कर सकते हैं। देखिए सबसे पहले तो मैं हमेशा कहता हूं मैं पहले आपको मानना पड़ेगा प्रॉब्लम है। आधे लोग तो बोलते हैं प्रॉब्लम ही नहीं है। सब चंगा सी है। लेकिन अगर आपने मान लिया कि प्रॉब्लम है तो सबसे पहले चाहे वो आम आदमी पार्टी हो या कांग्रेस हो या एसएडी हो या बीजेपी हो सबको बोलना पड़ेगा कि हमने पंजाब में वी हैव मेस्ड अप। हमने कुछ नहीं काम किया है। हमें इस मामले में और सीरियस होने की दरकार है। अगर आपने यह बात मान ली है तो सारे पार्टीज मिलकर एक प्लेज ले सकते हैं कि पार्टी में जो भी पावर में हो ये सारे जो काम है जो मैं अभी आपको बता रहा हूं ये कोई भी पार्टी जो है वो पावर में है वो करेगी। यहां से पैसे चुराएगी नहीं। इस पर फोकस हटेगा नहीं। सबसे पहला आपको रेगुलर मेंटेनेंस और अपकीप ऑफ डैम्स करना है। आप डैम तो बना दोगे लेकिन अगर उसके गेट्स को मेंटेन नहीं करोगे, अगर बहाव को कंट्रोल नहीं करोगे, प्रॉपर अटेंशन टू फंड्स नहीं दोगे तो जब क्राइसिस होगा तब बोलोगे हमारे पास तो पैसे ही नहीं थे। अगर आप जो बंद है अगर जो इंबकमेंट्स हैं उन्हें स्ट्रेंथन नहीं करोगे। मसून से पहले उनकी मरम्मत नहीं करोगे तो वो टूटेंगे और उसके बाद फ्लडिंग होगी। जो इनडिसक्रिमिनेट सैंड माइनिंग होती है जिसके बारे में इंडिपेंडेंट मीडिया रिपोर्ट करती है जर्नलिस्ट की मौतें हो जाती हैं क्योंकि इसमें सरकार और पुलिस मिली रहती है उसे आपको रोकना होगा क्योंकि सैंड माइनर्स रिवर बेड में डिगिंग करते हैं बंद के पास एंबकमेंट्स के बाद पास वो डिगिंग करते हैं जिससे ये जो एंबकमेंट्स हैं ये अपने आप कमजोर हो जाती हैं मॉनसून में टूट जाती हैं। अब जो स्टेट का जो वाटर रिसोर्सेज डिपार्टमेंट है उसने ऑलरेडी 2024 एक गाइड बुक निकाला था। तो यह देखिए जो सलूशन है यह अननोन नहीं है। आप सोचिए एक गाइड बुक है जिसे 2010, 2013, 2019, 2023 के फ्लड्स को देखकर बनाया गया था। गाइड बुक में लिखा हुआ है कि स्ट्रक्चरल मेजर्स, ड्रेनेज सिस्टम इंप्रूव करने की दरकार है कि आपको प्रीआइडेंटिफाई करना है। कौन सा इमरजेंसी रूट है, कौन से लोगों के लिए शेल्टर लोकेशन है, कहां से पानी का बहाव जाएगा? यह सारी चीजें आइडेंटिफाई कर कर उस पर एक्शन लेने की दरकार है। लेकिन क्या हुआ इस गाइड बुक का? इसको डस्टबिन में फेंक दिया जाता है। क्लाइमेट चेंज को आज हम रोक तो नहीं सकते हैं। वो टाइम तो हम निकल गया। लेकिन क्या क्लाइमेट चेंज के लिए हम रेडी हो सकते हैं? आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ 10% ऐसे शहर हैं हमारे पूरे देश में जिसके पास स्टम वाटर स्वेज सिस्टम है। माने अगर भारी बारिश होती है, पानी का भारी बहाव आता है तो ये स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम पानी को तेजी से शहर से बाहर निकाल सकते हैं। सिर्फ 10% शहर में यह सिस्टम है। इसीलिए 1 घंटे बारिश के बाद बड़े से बड़ा शहर पानी के अंदर आपको आपको मिलेगा। और फाइनली जो कैनल कैनाल सिस्टम है उसको आपको और इंप्रूव करना पड़ेगा। सिर्फ सिंचाई के लिए नहीं जब एक्सेसिव वाटर होगा तो आपको ऐसे कैनाल्स डिजाइन करने होंगे जिससे एक्सेसिव वाटर बड़े नदी या लो लाइन एरिया में चले जाए अवे फ्रॉम पॉपुलेशन। ये सारी चीजें की जा सकती हैं। इन सारी चीजों के लिए पैसे भी हैं। टैक्स का पैसा बहुत है सरकार के पास। लेकिन कहीं ना कहीं फोकस नहीं है क्योंकि हम बहुत ज्यादा पॉलिटिक्स खेलते हैं। अस वर्सेस देम 80 20 का खेल हम खेलते रहते हैं। लेकिन याद रखिए जिस दिन नेचर 80 20 का खेल खेलने लगेगी अस वर्सेस देम का खेल खेलने लगेगी ना हमें अपनी औकात याद आ जाएगी। तो अभी भी समय है। ये सिचुएशन देखो। कहां मुंबई डूब रहा है। कहां एनसीआर डूब रहा है। कहां हिल्स में ये हालत हो रही है। कहां पंजाब की ये हालत खराब है। नेचर ने वार्निंग तो बहुत दे दिया है। अभी इसको देखकर भी अंधे रहोगे। इसको देखकर भी आपस में ऊंची पॉलिटिक्स खेलना चाहोगे? खेलोगे लेकिन फिर अपने आप को अंडर वाटर जरूर पाओगे। हेलो हाउ आर यू? आई एम अंडर द वाटर। प्लीज हेल्प मी हियर टू मच रेनिंग। [संगीत]