Ravi
Ravi Kumar에 의해दोस्तों, कभी-कभी राजनीति की दुनिया ऐसे पलटती है कि बड़े-बड़े खिलाड़ी खुद को बादशाह समझने लगते हैं। लेकिन असली बाज़ीगर कोई और निकलता है।
आज वही हो रहा है – अमेरिका और यूरोप, जो कल तक दूसरों को झुकाते थे, आज खुद भारत के दरवाज़े पर खड़े हैं।
यानी अब खेल वाशिंगटन से नहीं, दिल्ली से लिखा जा रहा है
(A) अमेरिका का दबदबा टूटा
डोनाल्ड ट्रंप याद हैं? बार-बार भारत पर दबाव डालते थे। कहते थे कि भारत उनकी इजाज़त के बिना सांस नहीं ले सकता।
लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अमेरिका बेचैन है और भारत आत्मविश्वास से खड़ा है।
(B) यूरोप का झुकाव
यूरोपियन यूनियन की 12 सदस्यीय टीम दिल्ली आती है और कहती है – हमें अरबों डॉलर का व्यापार भारत के साथ करना है।
वही यूरोप, जिसने कभी भारत को सिर्फ एक बाज़ार समझा था, आज हाथ जोड़कर खड़ा है।
(C) रूस से तेल – भारत की मास्टरस्ट्रोक
अमेरिका ने कहा, रूस से तेल मत खरीदो। भारत ने साफ जवाब दिया – "जहां सस्ता मिलेगा, वहीं से लेंगे।"
तेल खरीदा, रिफाइन किया और यूरोप को बेच दिया। नतीजा – अमेरिका हारा, भारत जीता।
दोस्तों, यही है नया भारत – दबाव में नहीं, अपने हित में फैसले लेने वाला भारत।
(A) कार्बन टैक्स विवाद
यूरोप कहता है – भारत से आने वाले स्टील और सीमेंट पर टैक्स लगेगा।
भारत का जवाब – "अगर आप टैक्स लगाओगे तो हम भी आपकी कारों और कंपनियों पर टैक्स लगाएंगे।"
यानी खेल बराबरी का।
(B) टेक्नोलॉजी और डिफेंस साझेदारी
अब यूरोप सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक में भी भारत के साथ साझेदारी चाहता है –
* ग्रीन हाइड्रोजन,
* न्यूक्लियर एनर्जी,
* और लड़ाकू विमान।
यही अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता है – कि अगर भारत और यूरोप साथ आ गए तो वाशिंगटन की सुपरपावर वाली कुर्सी हिल जाएगी। दोस्तों, कल तक भारत वैश्विक राजनीति का मोहरा था। लेकिन आज वही भारत खेल का निर्माता बन चुका है।
यूरोप मजबूर है, अमेरिका बेचैन है और भारत आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। 21वीं सदी की कहानी अब वाशिंगटन से नहीं बल्कि दिल्ली से लिखी जाएगी… और इस अध्याय का नाम होगा – भारत: दुनिया का नया शक्ति केंद्र। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो तो लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करें और इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।
जय हिंद 🇮🇳