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For Study에 의해12 जून 2025 को दोपहर 1:38 बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, जो कि एक बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान था, ने टेकऑफ के कुछ ही सेकंड के भीतर अपने दोनों इंजन खो दिए और सीधे अहमदाबाद के बी.जे. मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की इमारत से टकरा गई। यह विमान महज़ 32 सेकंड तक ही हवा में रहा और उसके बाद तेज़ी से नीचे गिरते हुए एक आवासीय इलाके पर आ गिरा, जिससे भीषण आग लग गई और चारों ओर भगदड़ मच गई। इस हादसे में विमान में सवार कुल 242 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से 241 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोग भी इस त्रासदी का शिकार हो गए। केवल एक यात्री, 40 वर्षीय ब्रिटिश-भारतीय नागरिक, विश्वेश कुमार रमेश, इस भयावह दुर्घटना में जीवित बच पाए। यह हादसा बोइंग 787 सीरीज का पहला घातक दुर्घटना था और भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास में अब तक की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बन गया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, जब विमान ने टेकऑफ किया तो सब कुछ सामान्य था लेकिन कुछ ही सेकंड बाद कॉकपिट में कुछ असामान्य घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें सबसे प्रमुख दोनों इंजन का अचानक बंद हो जाना था। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से यह सामने आया कि टेकऑफ के मात्र तीन से पांच सेकंड बाद दोनों इंजन के फ्यूल कटऑफ स्विच, जो सामान्यतः 'RUN' की स्थिति में होते हैं, अचानक 'CUTOFF' स्थिति में चले गए, जिससे इंजन को ईंधन की आपूर्ति रुक गई और विमान में शक्ति शून्य हो गई। इस घटना के ठीक बाद रैम एयर टरबाइन (RAT) सक्रिय हो गया, जो केवल तभी स्वत: निकलता है जब दोनों इंजन एक साथ बंद हो जाएं और हाइड्रोलिक व इलेक्ट्रिकल सपोर्ट की जरूरत पड़े। इससे यह संकेत मिलता है कि यह इंजन फेल्योर स्वतः हुआ था या फिर जानबूझकर किया गया था। रिकॉर्डिंग्स में पायलटों के बीच संवाद में यह बात भी सामने आई कि एक पायलट ने दूसरे से पूछा, “तुमने कटऑफ क्यों किया?” जिस पर जवाब मिला, “मैंने नहीं किया।” इस संवाद ने जांच एजेंसियों को उलझन में डाल दिया क्योंकि अब यह तय करना मुश्किल हो गया था कि गलती तकनीकी थी या मानव त्रुटि। दुर्घटना के कुछ ही घंटे बाद विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया और जांच शुरू हुई जिसमें भारत की एएआईबी (Aircraft Accident Investigation Bureau), अमेरिका की एनटीएसबी (National Transportation Safety Board), बोइंग कंपनी, और DGCA की टीमें शामिल रहीं। टेक्निकल विश्लेषण में यह बात सामने आई कि विमान के फ्यूल कटऑफ स्विच कुछ समय के लिए फिर से 'RUN' की स्थिति में लाए गए थे, जिससे एक इंजन आंशिक रूप से पुनः चालू हुआ, लेकिन उस समय तक विमान बहुत अधिक ऊंचाई खो चुका था और दुर्घटना टालने का समय बीत चुका था। पायलटों ने 'Mayday' कॉल दी थी, लेकिन आपातकालीन प्रतिक्रिया का समय बहुत सीमित था। इस बीच एयर इंडिया और टाटा ग्रुप द्वारा पीड़ितों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की सहायता दी गई, जबकि राज्य सरकार ने जमीन पर मारे गए नागरिकों के लिए अतिरिक्त राहत की घोषणा की। हादसे के बाद सोशल मीडिया पर दुर्घटना की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिसमें जलता हुआ विमान और उसके मलबे के दृश्य दिखाई दिए। कई चश्मदीदों ने बताया कि उन्होंने विमान को एक तीव्र कोण पर नीचे गिरते हुए देखा, जिसके बाद जोरदार धमाका हुआ और आसमान में काला धुआं भर गया। बी.जे. मेडिकल कॉलेज की इमारत को गंभीर नुकसान पहुँचा और आस-पास की इमारतें भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। कई घायल छात्र और नागरिकों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई गई। इस हादसे के बाद एक नई बहस छिड़ गई कि क्या इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सकता था। रिपोर्ट्स के अनुसार, कैप्टन सुमीत सभरवाल, जो इस विमान को उड़ा रहे थे, उनके पास 15,600 से अधिक घंटे का अनुभव था, जिसमें 8,600 घंटे उन्होंने ड्रीमलाइनर पर उड़ान भरी थी। वहीं फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर के पास लगभग 3,400 फ्लाइट घंटे का अनुभव था। हालांकि मीडिया के एक वर्ग ने यह रिपोर्ट किया कि कैप्टन सभरवाल मानसिक अवसाद में थे और उनके हाल ही में पारिवारिक जीवन में परेशानियाँ चल रही थीं, जिसके आधार पर कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि उन्होंने जानबूझकर दोनों इंजन बंद कर दिए। इस बात पर एयर इंडिया और भारतीय विमानन मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे 'अनैतिक और असमय अनुमान' बताते हुए खारिज कर दिया। जांच एजेंसियों ने कहा कि जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, तब तक किसी पर व्यक्तिगत रूप से दोष मढ़ना अनुचित होगा। बोइंग कंपनी ने भी अपने स्टेटमेंट में कहा कि VT-ANB विमान की आखिरी तकनीकी जाँच में कोई दोष नहीं मिला था और विमान पूर्णतः उड़ान योग्य स्थिति में था। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वास्तव में किसने कटऑफ स्विच को छुआ और क्यों। विमान की उम्र करीब 11 साल थी और इसे कभी भी बड़ी तकनीकी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा था। यह पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर सेवा दे चुका था। दुर्घटना के बाद एयर इंडिया ने हॉटलाइन सेवाएँ शुरू कीं और पीड़ितों के परिजनों के लिए हेल्प डेस्क तथा उड़ानें संचालित कीं, ताकि वे घटनास्थल तक पहुँच सकें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नागरिक उड्डयन मंत्री, और कई राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने इस त्रासदी पर शोक व्यक्त किया और पारदर्शी जांच की मांग की। जैसे-जैसे हादसे की जांच आगे बढ़ रही है, कुछ नई जानकारियाँ भी सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, AAIB ने यह पुष्टि की कि फ्यूल स्विचेज को वापस रन पोजीशन पर लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन समय बहुत कम था। इसके साथ ही यह तथ्य भी सामने आया कि इस विमान में पहले से कोई ऑटोमैटिक कटऑफ सिस्टम नहीं था जो स्वचालित रूप से फ्यूल फ्लो को रोक सके। FAA द्वारा 2018 में जारी एक चेतावनी के अनुसार कुछ ड्रीमलाइनर विमानों में फ्यूल स्विच मैकेनिज्म के फेल होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि VT-ANB उन विमानों में शामिल था या नहीं।
यह हादसा वैश्विक विमानन सुरक्षा के लिए एक बड़ा झटका रहा है। यह घटना न केवल तकनीकी जाँच प्रक्रिया, पायलट ट्रेनिंग और मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन को लेकर गंभीर सवाल उठाती है, बल्कि इसने यात्रियों की सुरक्षा की वर्तमान प्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता को भी जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम रिपोर्ट में ही यह स्पष्ट होगा कि यह एक मानवीय त्रुटि थी, तकनीकी खामी थी, या इन दोनों का मिश्रण था। जो एक बात स्पष्ट है, वह यह है कि 12 जून 2025 को भारत ने एक और विमानन त्रासदी झेली जिसने सैकड़ों परिवारों को असमय ही उजाड़ दिया और एक ऐसे सवाल को जन्म दिया जिसका जवाब शायद महीनों बाद मिलेगा—कि वास्तव में AI-171 को आसमान से जमीन पर लाने की जिम्मेदारी किसकी थी?