Hidi pk
Aslam The Heckerによるएक छोटे से गाँव में, जहाँ न बिजली थी न पक्की सड़कें, एक गरीब किसान का बेटा सलमान रहता था, जिसके सपने उसकी गरीबी से कहीं बड़े थे — वो इंजीनियर बनकर अपने माता-पिता की तक़दीर बदलना चाहता था, लेकिन हालात उसके सख्त खिलाफ थे; स्कूल में बच्चे उसकी गरीबी का ताना देते, उसके कपड़ों का मज़ाक उड़ाते, और कहते: "अरे तू इंजीनियर? हाहाहा! पहले जूते तो पहन ले!" लेकिन सलमान चुप रहता, दिल में बस एक बात दोहराता: "एक दिन मैं अपनी कामयाबी से तुम सबको जवाब दूँगा!" — उसके अब्बू दिन-रात खेतों में मजदूरी करते, अम्मी पुराने कपड़ों में सिलाई करतीं, लेकिन सलमान के हौसले को कभी कमजोर नहीं होने देती थीं; जब वो रात को मोमबत्ती की रौशनी में पढ़ता, तो अम्मी कहतीं: "बेटा, आँखें खराब हो जाएंगी!" — और वो जवाब देता: "अम्मी, अगर आज ये आँखें न जलें, तो कल हमारा अंधेरा कभी खत्म नहीं होगा!" — जब दसवीं का इम्तिहान आया, सलमान दिन में स्कूल जाता, शाम को खेतों में काम करता, और रात भर बिना बिजली के पढ़ता रहा, यहाँ तक कि उसने पूरे जिले में टॉप किया — वही बच्चे जो उस पर हँसते थे, अब उसके साथ सेल्फी लेने लगे; उसे स्कॉलरशिप मिली और वो शहर के एक बड़े कॉलेज में दाखिल हुआ, जहाँ हर दूसरा बच्चा अंग्रेज़ी में बात करता, लैपटॉप पर नोट्स लेता, लेकिन सलमान के पास सिर्फ एक पेन और वही पुरानी कॉपी थी — मगर उसका हौसला सबसे नया था; कई बार वो भूखा सोया, कई बार यूनिवर्सिटी की फीस भरने के लिए रातों-रात ठेला लगाया, लेकिन उसने हार नहीं मानी; एक दिन उसके प्रोफेसर ने उसे बुला कर कहा: "सलमान, तुम वो चिराग हो जो खुद जलकर दूसरों को रौशनी देता है!" — वक़्त बीतता गया, सलमान ने इंजीनियरिंग पूरी की, नौकरी हासिल की, और फिर एक दिन अपनी खुद की कंपनी शुरू की — उस कंपनी में उसने उन युवाओं के लिए मुफ्त ट्रेनिंग रखी जो गरीबी के कारण शिक्षा से दूर थे, ताकि वे भी ज़िंदगी में आगे बढ़ सकें; फिर एक दिन वही प्रोफेसर, जिन्होंने बचपन में उस पर भरोसा किया था, उसके ऑफिस आए, सलमान ने उन्हें आदर से बिठाया और कहा: "सर, अगर उस दिन आप मेरे सपने पर हँसते, तो शायद आज मैं यहाँ न होता!" — प्रोफेसर मुस्कराए और बोले: "नहीं बेटा, ये तुम्हारा यकीन था जिसने तुम्हारी तक़दीर बदल दी!" — और सलमान की आँखों में वही रौशनी थी जो कभी मोमबत्ती के नीचे थी — लेकिन अब वो रौशनी एक चिराग बन चुकी थी, जो पूरे समाज को रोशन करने वाला था, क्योंकि सलमान अब सिर्फ एक इंजीनियर नहीं, बल्कि हज़ारों नौजवानों की उम्मीद बन चुका था; और अंत में, सलमान की वो आवाज़ हर युवा के दिल में गूंज रही थी: "अगर मेरे पास कुछ नहीं था, फिर भी मैं कर गया... तो तुम क्यों नहीं? अपने सपनों को गरीबी के पिंजरे में मत क़ैद करो — उड़ना सीखो, क्योंकि आसमान सिर्फ उन्हीं का होता है, जो ज़मीन से नहीं, जज़्बे से उड़ते हैं!"