बहुत समय पहले की बात है…
एक गरीब किसान था, जिसके इतने बच्चे थे, जैसे चींटियों का ढेर!
घर में रोज़ भूख का तांडव होता था। तीन-तीन दिन तक खाना नसीब नहीं होता था।
आख़िरकार, वो बेचारा किसान एक दिन निकल पड़ा…
जंगल की ओर… खाने की तलाश में।
तभी रास्ते में उसे एक अजनबी मिला…
वो कोई और नहीं, बल्कि… शैतान था, इंसान के रूप में!
👿 शैतान बोलता है
“कहाँ जा रहे हो, गरीब इंसान?”
👨🌾 किसान बोलता है
“अपने बच्चों के लिए खाना ढूंढने जा रहा हूँ… नहीं तो वो भूख से मर जाएंगे।”
👿 शैतान बोला
“रुको! मैं तुम्हें एक चीज़ देता हूँ। अगर समझदारी से इस्तेमाल करोगे…
तो तुम्हारे घर में कभी दुःख नहीं रहेगा।
ये लो – ये छोटा सा अखरोट!
जो चाहो, इससे कहो… और वो काम तुरंत हो जाएगा।”
👨🌾 किसान बोला है
“मगर, बदले में तुम क्या चाहते हो?”
👿 शैतान बोलता है
“बस… तुम्हारे घर में जो चीज़ तुम्हें पता नहीं है… वही चाहिए।”
किसान सोच में पड़ गया।
“ऐसी कौन सी चीज़ है जो मुझे अपने ही घर में पता नहीं?”
लेकिन भूख ने उसे मजबूर कर दिया…
और वो सौदा कर बैठा।
🚪 जब वो घर पहुंचा… उसकी पत्नी ने पूछा:
“कुछ खाना लाए? बच्चे भूख से तड़प रहे हैं!”
👨🌾 किसान बोलता है
“खाना नहीं… पर एक जादुई अखरोट लाया हूँ!
जो कहोगे, वो कर देगा।”
👩🦱 फिर पत्नी ग़ुस्से मैं बोलती है
“किससे लिया ये अखरोट? बदले में क्या माँगा उसने?”
👨🌾 किसान बोलता है की
“बस… जो मुझे अपने घर में नहीं पता… वही माँगा।”
पत्नी ने अपना पेट सहलाया…
👩🦱 और बोली
“ओ मूर्ख! तुझे नहीं पता था कि मैं माँ बनने वाली हूँ!
तूने अपने बच्चे को ही शैतान को सौंप दिया!”
😞 किसान स्तब्ध रह गया…
पर जो हो गया था, वो अब वापस नहीं हो सकता था।
अब उस अखरोट को आदेश दिया गया:
“हमें खाना, कपड़े और रहने की जगह चाहिए!”
और तुरंत… सब कुछ हाज़िर हो गया!
बच्चे खाने में लगे थे…
और वो भूख… जैसे कभी थी ही नहीं।
🌳 किसान ने फिर आदेश दिया:
“मुझे बड़ा सा घर चाहिए… हरे-भरे बाग़, जानवर, खेत!”
और बस… किसान अमीर बन गया।
समय बीता… और वो बच्चा भी पैदा हुआ।
एक दिन…
दो बूढ़े लोग किसान के घर आए और बोले:
👴👵
“शैतान तुम्हारे सबसे छोटे बच्चे को लेने आएगा।
हम तुम्हारी मदद करने आए हैं।
आज रात खाने की मेज़ पर एक रोटी रख देना… और उसे वहीं रहने देना।”
रात आई… सब सो गए…
फिर आधी रात को…
👿 शैतान की आवाज़ आई
“हे मालिक! वादा याद है ना?
मैं आया हूँ… अपने हिस्से को लेने!”
पर किसी ने नहीं सुना…
बस… वो रोटी… बोल उठी:
रुको… जैसे मैं रुकी थी।
मैं धरती में बोई गई… सर्दियों में दबी रही।
फिर अंकुरित हुई… बढ़ी…
कटाई हुई… गट्ठों में बंधी…
मार खाई… पीसी गई… गूंधी गई…
भट्टी में जली… और फिर काटी गई।
मैंने सब सहा… अब तुम भी सहो!
अब तुम भी रुको… इंतज़ार करो… और पीड़ा सहो।”
🌅 जैसे ही सुबह की पहली किरण फूटी…
शैतान की ताकत खत्म हो गई…
और वो भाग खड़ा हुआ।
👨🌾 किसान दौड़ा… अपने बच्चे को सीने से लगाया…
और उन बूढ़े सज्जनों का धन्यवाद किया।
💫 और तब से,
वो किसान अमीर और खुशहाल ज़िंदगी जीने लगा…
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अगर आपके पास जादुई अखरोट होता, तो आप उससे क्या मांगते?
मिलते हैं अगली कहानी में…
क्या आपने कभी महसूस किया है कि पैसा कमाने के बाद भी… ज़िंदगी में कुछ अधूरा सा लगता है
क्या आपने खुद से पूछा है – “मैं दिन-रात मेहनत करता हूँ, फिर भी अमीर क्यों नहीं बन पा रहा?”
इस कहानी में जवाब है… और वो भी एक ऐसे इंसान की कहानी, जिसके दो पिता थे –
एक अमीर सोच वाला, और दूसरा गरीब सोच वाला।