पहले लिखा था दर्द फिर मैं खुद ही तुक बन गया। गलती मेरी थी शायद [संगीत] या वक्त ही गलत चल गया। दिल तो जिंदा था अब तक पर दिमाग गुनाह करता रहा। जिंदा हूं आज भी मैं पर जीना मुझसे छूटता रहा ना धूप आई आज तक और बारिश भी थम सी गई रोज खुद से लड़ते लड़ते ये आदत पुरानी बन सी गई आज फिर हिम्मत करके मैंने टूटने की कोशिश की पर मौत भी शायद [संगीत] मुझसे आज थोड़ी दूर ही रही इस चमड़े के घर में रूह धीरे-धीरे जा रही है कुछ बचा भी [संगीत] है अंदर तो जुबान साथ नहीं दे रही है इसी तरह तेरी याद हर रोज चली आती है तेरी ख्वाहिश पूरी हुई शायद मौत अब्बास आती है बस थोड़ी सी दूरी है पर मैं पहुंच [संगीत] नहीं पाता तू मेरे लिए एक पल भी क्यों नहीं सोच पाता तू भी ख्वाहिशों [संगीत] का गला धीरे-धीरे घोट रही है खुद को लाख समझाया मैंने पर तू लौट के नहीं [संगीत] आती है मैं जैसा भी हूं अपनी गलतियां मानता हूं पर सजा पूरी मेरी रहमत आधी क्यों पाता हूं बस एक मौका मांगा था कुछ भी ज्यादा ज्यादा नहीं मुझे पहले जैसा थोड़ा सा लौटका दे यहीं अगर ऊपर वाला सुन रहा है तो थोड़ी दया कर दे पैर पकड़े खड़ा हूं मैं या तो ले जा या संभाल ले दुनिया के कान बंद है इनमें थोड़ी शर्म भर दे क्या हासिल हुआ दिल की बातें सबके सामने कह दे कहते हैं बोल दो सब मन हल्का हो जाएगा जब बोला तो कहां गया चुप रहो वक्त गुजर जाएगा मैं कहना चाहता हूं तुम सुनने भी आया करो सिर्फ बोलना नहीं कभी समझने भी आया करो तूने कह दिया [संगीत] सब कुछ तुझे हल्का लग गया मुझे रुला कर कैसे तेरा चेहरा खिल गया तुझे पता भी नहीं ये कहानी क्या बन रही है तू खून करके अपने हाथ आराम से धो रही है तूने बहुत वादे किए पर निभाया एक भी नहीं कहती थी कल आऊंगी पर वो कल कभी आया ही नहीं कहते हैं जो अपने हो वो लौट के [संगीत] जरूर आते हैं। शायद मैं ही बदनसीब हूं। मेरे वो पल नहीं आते हैं। लोग कहते हैं तू मजबूत [संगीत] है। सब कुछ सह जाएगा। कोई यह नहीं पूछता तू कब तक झेल पाएगा। रात के सन्नाटे मुझसे खामोशी में बात करते हैं। दिन में जो मुस्कुराता हूं वो झूठ सब जानते हैं। आईने के सामने खड़ा खुद से नजर चुराता हूं। खुद को संभालते संभालते खुद से ही हार जाता हूं। अगर कल मैं ना रहूं तो बस इतना याद रखना मैं हार कर नहीं गया मैं लड़ते लड़ते थक गया बस अगर भगवान [संगीत] सुन रहा है तो बस गिनी सी बात मुझे [संगीत] पहले जैसा बना दे दे बस से एक [संगीत] और रात या तो इस दर्द को कम कर दे या सांस ही रोक [संगीत] दे रोज रोज मरने से अच्छा [संगीत] है एक बार पूरा खत्म कर दे
00 Uso total•00 Total de Me gusta•00 Cuota total•00 Total ahorrado•
hace 8 meses
hi
Masculino
Joven
कैसे समझाऊं तुम्हें मेरी बेचैनी, हर रात तेरी यादों में गुजरती है। सोचता हूं कि भूल जाऊं तुझे, पर हर सांस में तेरी खुशबू बसी है। काश तुम समझ पाती कि मेरे दिल में क्या है, शायद फिर यह दूरियां ना होती।