Ravish kumar
by Komal Madamनमस्ते, मैं रवीश कुमार। क्या आपने कभी सोचा कि कोई राजा सबके सामने कटघरे में खड़ा हो सकता है? क्या आपने कल्पना की थी कि जो नेता मोदी जी के सबसे करीबी माने जाते हैं, जो अमित शाह के इशारे पर सहमति जताते हैं, वही नेता अब उस जेल के द्वार पर खड़े होंगे, जिसे कभी विपक्ष के लिए तैयार किया गया था? क्या आपने सोचा था कि टीवी पर चीख-चीखकर विपक्ष को भ्रष्ट बताने वाले नेताओं की आवाज में डर की झलक दिखेगी? नहीं, ना? तो आइए, इस पूरी कहानी को सरल और स्पष्ट अंदाज में समझते हैं, ताकि आप शुरू से अंत तक हमारे साथ बने रहें। और हां, वीडियो को लाइक और सब्सक्राइब करना न भूलें।
राहुल गांधी ने असम में खड़े होकर एक साफ और तीखा बयान दिया कि जल्द ही आप देखेंगे कि यही मीडिया आपके मुख्यमंत्री को जेल जाते हुए दिखाएगा। यह कोई साधारण बात नहीं थी। यह एक राजनीतिक धमाका था, जिसकी गूंज दिल्ली तक पहुंची और सबसे ज्यादा असर दिल्ली के सत्ताधीशों पर हुआ। राहुल गांधी ने न सिर्फ एक मुख्यमंत्री को ललकारा, बल्कि यह भी कहा कि अब देखता हूं कि मोदी और शाह उन्हें कैसे बचाते हैं। यानी संदेश साफ था—अब कोई भी नहीं बचेगा।
वही हेमंत विश्वा शर्मा, जो कभी कांग्रेस में तरुण गोगोई के सबसे भरोसेमंद मंत्री थे। वही हेमंत, जो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और मोदी-शाह के साथ खड़े होकर देशभक्ति और विकास के नए दावे करने लगे। वही हेमंत, जो खुद बताते हैं कि एक बार राहुल गांधी अपने कुत्ते को बिस्कुट खिला रहे थे और उन्हें ध्यान नहीं मिला। बस, यहीं से उनकी नाराजगी शुरू हुई और वे अमित शाह के पास पहुंच गए। उन्होंने उनके सामने निष्ठा जताई और कहा, “अब मैं आपके साथ हूं।” लेकिन राजनीति में सिर्फ वफादारी दिखाने से भरोसा नहीं बनता।
वही हेमंत, जिन्हें बीजेपी ने असम का राजा बनाया, उन पर अब राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाए। राहुल ने कहा कि यह मुख्यमंत्री दलाली करता है, अंबानी और अडानी के लिए जमीनें बेचता है। उन्होंने यहां तक कहा कि इनके और इनके परिवार के भ्रष्टाचार के कारण अब जेल जाना तय है। और फिर वही बात दोहराई, जो सत्ता के गलियारों में तूफान मचा रही है—ना मोदी बचा पाएंगे, ना अमित शाह।
यह बयान कोई भावुकता में दिया गया नहीं था। राहुल गांधी असम में कांग्रेस की राज्य समिति की बैठक में थे। उन्होंने साफ कहा, “लिख लीजिए, यह मुख्यमंत्री जेल जाएगा। आप देखेंगे, मीडिया बदलेगा, राजनीति बदलेगी।” इस बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। हेमंत विश्वा शर्मा गुस्से में आ गए, ट्वीट किया कि राहुल गांधी इतनी दूर सिर्फ मुझे जेल भेजने की धमकी देने आए हैं। फिर तंज कसते हुए कहा कि राहुल जी खुद देशभर में आपराधिक मामलों में जमानत पर हैं। लेकिन हेमंत का यह जवाब उनके डर को छिपा नहीं पाया। उनकी आवाज में वह जोश नहीं था, जो टीवी डिबेट्स में दिखता है। बल्कि, उसमें एक बेचैनी थी, एक घबराहट थी।
राहुल गांधी यहीं नहीं रुके। उन्होंने मीडिया को भी निशाने पर लिया। कहा, “मैंने कभी मीडिया को दोस्त कहा था, लेकिन अब वे दोस्त नहीं रहे। अब उन्हें सच दिखाने की आदत नहीं है। वे दिन-रात अडानी, अंबानी और आपके मुख्यमंत्री का चेहरा दिखाते हैं। लेकिन अब समय बदल रहा है। यही मीडिया आपको दिखाएगा कि आपका मुख्यमंत्री जेल जा रहा है।”
इस बयान का असर बिहार तक पहुंचा। तेजस्वी यादव ने तो मीडिया के सूत्रों को “मूत्र” बता दिया। बोले, “यह वही सूत्र हैं, जो कराची में कब्जा करवाते हैं। यह समाचार नहीं, मूत्र हैं।” उधर, अखिलेश यादव ने दैनिक जागरण के बहिष्कार की घोषणा कर दी। यानी, पूरा विपक्ष अब मीडिया के झूठे सूत्रों पर हमला बोल रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या वाकई मीडिया बदलेगा, या नेताओं को खुद बदलना होगा? असम में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। कांग्रेस 10 साल से सत्ता से बाहर है। इससे पहले 15 साल तक तरुण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस का राज था। आज उनके बेटे गौरव गोगोई कांग्रेस के उपनेता हैं। यही कारण है कि राहुल गांधी अब असम को लेकर इतने आक्रामक हैं। उनके तेवर दिखा रहे हैं कि इस बार कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेगी।