Gerador de Voz AI Free Misbah por Fish Audio
Gere voz Misbah confiável por mais de 1+ criadores. Crie fala high-quality com texto para fala por IA.
Amostras - Misbah
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Default Sample
Amostra 1
जिंदगी में कभी किसी को छोटा मत समझो, क्योंकि हर इंसान की अपनी कहानी होती है। आज जो तुम्हारे सामने कमजोर दिख रहा है, कल वही तुम्हारी ताकत बन सकता है। इसलिए हर रिश्ते को सम्मान दो, हर इंसान को प्यार दो।
Default Sample
زندگی میں کامیابی کا راز یہ ہے کہ آپ اپنے خوابوں کو کبھی نہ چھوڑیں۔ لوگ کہیں گے کہ یہ ممکن نہیں، لیکن آپ کو اپنی منزل پر یقین رکھنا ہے۔ اگر آپ کے پاس تجربہ ہے تو شیئر کریں۔
Default Sample
देखो भाई, आप बस मेट्रो पकड़ लो, वो सीधा वहां ले जाएगी। जो ये नई वाली मेट्रो है ना, उसमें भीड़ भी कम होती है और रास्ता भी आसान है। मैं एक बार अपने फोन पर चेक कर लेता हूँ कि कौन से स्टेशन पर उतरना सही रहेगा, फिर बताता हूँ।
Sample Transcriptions
Default Sample - Amostra 1
जिंदगी में कभी किसी को छोटा मत समझो, क्योंकि हर इंसान की अपनी कहानी होती है। आज जो तुम्हारे सामने कमजोर दिख रहा है, कल वही तुम्हारी ताकत बन सकता है। इसलिए हर रिश्ते को सम्मान दो, हर इंसान को प्यार दो।
Default Sample - lains
زندگی میں کامیابی کا راز یہ ہے کہ آپ اپنے خوابوں کو کبھی نہ چھوڑیں۔ لوگ کہیں گے کہ یہ ممکن نہیں، لیکن آپ کو اپنی منزل پر یقین رکھنا ہے۔ اگر آپ کے پاس تجربہ ہے تو شیئر کریں۔
Default Sample - Manish
देखो भाई, आप बस मेट्रो पकड़ लो, वो सीधा वहां ले जाएगी। जो ये नई वाली मेट्रो है ना, उसमें भीड़ भी कम होती है और रास्ता भी आसान है। मैं एक बार अपने फोन पर चेक कर लेता हूँ कि कौन से स्टेशन पर उतरना सही रहेगा, फिर बताता हूँ।
Default Sample - Aus
जिंदगी बहुत छोटी है, और हम इसे छोटी-छोटी बातों में उलझकर बिता देते हैं। आज जिससे नाराजगी है, शायद कल उसे देखने के लिए तरस जाएं। इसलिए खामोशियों को तोड़ो, हाथ थाम लो और जो दिल में है वो कह दो, क्योंकि ये वक्त दोबारा लौटकर नहीं आने वाला।
Default Sample - Arafa
مرحباً أصدقائي. اليوم سأتحدث عن أهمية النوم الجيد. النوم الصحي يساعدنا على التركيز في العمل والدراسة. أنا أنام ثماني ساعات كل ليلة، وأشعر بالنشاط والحيوية كل صباح. هذه عادة مهمة جداً للصحة.
Default Sample - menk
My dear brothers and sisters, remember that every prayer you offer is an investment in your hereafter. Allah has prescribed these times of worship for our benefit. Don't delay your prayers, for they are your connection to your Creator. May Allah guide us all.
Default Sample - Andiong
11 things people learn too late in life. one, the less you say the more your words will matter. two, don't take everything personally not everyone thinks about you as much as you do. three, when you focus on problems you'll have more problems when you focus on possibilities you'll have more opportunities. four, no matter how much it hurts now someday you will look back and realize your struggle changed your life for the better.
Default Sample - Manish
अरे भाई, वहाँ से सीधा निकल जाओ। आज़ादपुर स्टेशन के पास ही तो है। मेट्रो ले लेना, बहुत आसानी से पहुँच जाओगे। हाँ, स्टेशन के नीचे से ही रास्ता जाता है। फिर वहाँ से ऑटो कर लेना, वो सीधा छोड़ देगा। बस तुम समय पर पहुँच जाना, वहीं मिलेंगे।
Default Sample - Osho
मैं तुमसे कहता हूँ, जीवन को जीओ, उसे समझने की कोशिश मत करो। जागरूकता ही एकमात्र क्रांति है। जब तुम पूरी तरह वर्तमान में होते हो, तब कोई दुख नहीं होता। बस साक्षी भाव से देखो कि भीतर क्या घट रहा है, और तुम पाओगे कि तुम स्वयं शाश्वत आनंद हो।
Default Sample - Ayush
वक़्त बड़ी तेज़ी से निकल रहा है और हम बस मसरूफियत का बहाना बना रहे हैं। कभी ठहरकर सोचो, ये सारी भाग-दौड़ किसलिए है? अंत में सिर्फ वो लम्हे साथ रहेंगे जहाँ हमने खुलकर साँस ली थी। शिकायतों को थोड़ा पीछे छोड़ो और आज में जीना शुरू करो।
Default Sample - Govind
تعلیم حاصل کرنے کا کوئی خاص وقت نہیں ہوتا۔ ہر عمر میں علم کی روشنی حاصل کی جا سکتی ہے۔ مطالعہ سے ذہن کی صلاحیتیں بڑھتی ہیں اور نئی معلومات سے آگاہی ملتی ہے۔
Default Sample - Ali
زندگی کے تلخ تجربات نے مجھے یہ سمجھا دیا ہے کہ ہر ہاتھ ملانے والا مخلص نہیں ہوتا۔ میں نے اپنی خاموشی میں وہ سب کچھ سنا جو الفاظ کبھی نہ کہہ سکے۔ اب میں اپنی خوشیوں کی چابی دوسروں کو نہیں دیتا، کیونکہ میں جانتا ہوں کہ جب دل ٹوٹتا ہے تو سمیٹنے والا کوئی نہیں ہوتا۔
Default Sample - Bilal
Bilal Bilal Edit Model 0 Uses 0 Shares 0 Likes 0 Saved by अगर आपकी पूरी दुनिया एक ही पल में बिखर जाए… अगर आपकी आँखों के सामने आपकी मेहनत, आपका सहारा, आपकी उम्मीद सब राख बन जाए… तो क्या आप फिर भी कह पाएँगे — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी”? यह कहानी है दो दोस्तों की। एक का नाम था बिलाल। दूसरा उसका बचपन का साथी था। दोनों ने साथ खेला, साथ बड़े हुए, साथ कारोबार शुरू किया। लेकिन दोनों की सोच अलग थी। बिलाल की ज़ुबान पर हर वक़्त एक ही जुमला रहता था — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी।” उसका दोस्त अक्सर हँस देता और कहता, “यार बिलाल, हर बात में अल्लाह की रज़ा मत ढूँढा करो। नुकसान, नुकसान होता है। दर्द, दर्द होता है।” बिलाल बस मुस्कुरा देता। उसकी मुस्कुराहट में अजीब सा सुकून होता था। एक रात बाज़ार में अचानक आग लग गई। पहले धुआँ उठा, फिर लपटें आसमान को छूने लगीं। लोग चीख रहे थे, भाग रहे थे, पानी फेंक रहे थे, लेकिन आग किसी की नहीं सुन रही थी। उसी बाज़ार में बिलाल की छोटी सी दुकान भी थी। कुछ ही मिनटों में उसकी सालों की मेहनत जलकर राख हो गई। लोग उसके पास आए, कोई अफसोस कर रहा था, कोई सिर पकड़कर बैठ गया। उसका दोस्त दौड़ता हुआ आया, जलती हुई दुकान को देखा और गुस्से में बोला, “सब खत्म हो गया बिलाल! अब क्या करोगे? अब भी कहोगे कि अल्लाह राज़ी है?” कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। बिलाल ने राख बन चुकी दुकान को देखा। उसकी आँखों में आँसू थे, मगर चेहरे पर शिकवा नहीं था। उसने गहरी साँस ली और धीमी आवाज़ में कहा, “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” दोस्त झुंझला गया। “यह कैसी बातें करते हो? मेहनत तुम्हारी जली है, नुकसान तुम्हारा हुआ है!” बिलाल ने बस इतना कहा, “शायद मेरे रब को इससे बेहतर कुछ देना हो।” वक़्त गुज़रा। बिलाल ने फिर से छोटी सी जगह किराए पर ली और नया काम शुरू कर दिया। कमाई कम थी, मुश्किलें ज़्यादा थीं, मगर उसके चेहरे पर वही सुकून था। फिर एक और इम्तिहान आया। उसका इकलौता बेटा अचानक बहुत बीमार पड़ गया। तेज़ बुखार, फिर हालत बिगड़ती गई। अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जाँच के बाद कहा, “हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालत नाज़ुक है। दुआ कीजिए।” उसका दोस्त बाहर बेचैनी से टहल रहा था। उसने बिलाल से कहा, “देखो बिलाल, हर चीज़ में अल्लाह की रज़ा नहीं होती। यह बहुत बड़ा दुख है। इंसान टूट जाता है ऐसे वक्त में।” बिलाल ने अपने बेटे का हाथ पकड़ा, उसकी ठंडी उँगलियों को सहलाया और आसमान की तरफ देखा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, मगर आवाज़ में अजीब सा यक़ीन था। उसने कहा, “या अल्लाह, अगर तू राज़ी है तो मैं भी राज़ी। मेरे दिल को सब्र दे।” वह पूरी रात अस्पताल की कुर्सी पर बैठा रहा। कभी दुआ करता, कभी बेटे के माथे पर हाथ रखता। उसके दोस्त की आँखों में डर था, गुस्सा था, सवाल थे। बिलाल की आँखों में दर्द था, लेकिन शिकायत नहीं थी। सुबह फ़ज्र के करीब डॉक्टर तेज़ कदमों से कमरे में आया। उसके चेहरे पर हैरानी थी। उसने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी, लेकिन बच्चे की हालत अचानक संभल रही है। रिस्पॉन्स बेहतर है। यह बहुत अच्छा संकेत है।” दोस्त हैरान रह गया। बिलाल की आँखें भर आईं। वह चुपचाप झुका और सज्दे में चला गया। उसके होंठों पर बस यही था, “तूने मेरी रज़ा को खाली नहीं जाने दिया, मेरे रब।” दिन बीतते गए। बिलाल ने मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। लोग उसकी ईमानदारी की कद्र करने लगे। उसका कारोबार फिर खड़ा हो गया, बल्कि पहले से बेहतर हो गया। दूसरी तरफ उसका दोस्त तेजी से तरक्की कर रहा था, बड़े सौदे कर रहा था, पैसे कमा रहा था, लेकिन उसके दिल में सुकून नहीं था। हर छोटी बात पर गुस्सा, हर मुश्किल पर शिकायत। फिर एक दिन उसके दोस्त को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। एक बड़ी डील आखिरी वक्त पर रद्द हो गई। करोड़ों का घाटा। वह टूट गया। उसने गुस्से में कहा, “या अल्लाह, मेरे साथ ही क्यों? मैंने क्या बिगाड़ा है?” उसी रात उसे बिलाल की बातें याद आईं — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी…” कुछ समय बाद बिलाल शहर के सम्मानित व्यापारियों में गिना जाने लगा। लोग उससे सलाह लेने आते। एक दिन उसका वही दोस्त, थका हुआ, टूटा हुआ, उसके दफ्तर में आया। उसकी आँखों में नमी थी। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “मैं हार गया बिलाल। मैं हर वक्त शिकायत करता रहा। जब थोड़ा नुकसान हुआ तो मैं गुस्सा हो गया। जब फायदा हुआ तो घमंड आ गया। तुम हर हाल में कहते रहे कि अल्लाह राज़ी… और शायद इसी वजह से अल्लाह तुमसे राज़ी हो गया।” बिलाल ने उसका कंधा थामा। उसकी आवाज़ नरम थी, मगर बात गहरी थी। उसने कहा, “जब इंसान अल्लाह की मर्ज़ी पर आमीन कह देता है, तो अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ता। नुकसान भी उसकी तरफ से इम्तिहान होता है, और कामयाबी भी।” उसका दोस्त रो पड़ा। “क्या अब भी देर नहीं हुई?” बिलाल ने मुस्कुराकर कहा, “जब तक साँस है, देर नहीं होती।” आज भी जब लोग बिलाल से उसकी कामयाबी का राज़ पूछते हैं, तो वह बस इतना कहता है, “मैंने कभी अल्लाह से सवाल नहीं किया कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ। मैंने बस हर हाल में कहा — जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी, मैं भी राज़ी। और शायद उसी दिन से मेरी तक़दीर बदलनी शुरू हो गई थी।” याद रखिए… नुकसान वक्ती होता है, लेकिन सब्र हमेशा रंग लाता है। जो इंसान अल्लाह की रज़ा में राज़ी हो जाता है, अल्लाह उसे वहाँ पहुँचा देता है जहाँ वह खुद सोच भी नहीं सकता। जब ज़िंदगी आपको तोड़ने लगे, जब हालात आपके खिलाफ हो जाएँ, तब बस दिल से कहिए — “जिसमें मेरा अल्लाह राज़ी… मैं भी राज़ी।” शायद उसी पल से आपकी कहानी बदलनी शुरू हो जाए।
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